ऑस्ट्रिया में ‘राजनीतिक इस्लाम’ पर पाबंदी की तैयारी, सत्तारूढ़ गठबंधन का यू-टर्न
चांसलर की पार्टी ने इससे पहले इस्लामवाद पर पाबंदी वाले प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट दिया था।
जूल्स गोम्स रोम में रहने वाले बाइबिल विद्वान और पत्रकार हैं।

ऑस्ट्रिया में चांसलर क्रिश्चियन श्टॉकर के नेतृत्व में ऑस्ट्रियन पीपुल्स पार्टी (ÖVP) की अगुवाई वाला सत्तारूढ़ गठबंधन अब “राजनीतिक इस्लाम” पर पाबंदी लगाना चाहता है। इसने अपना रुख़ बदलते हुए विपक्षी FPÖ (फ्रीडम पार्टी ऑफ़ ऑस्ट्रिया) के उस प्रस्ताव को अपना लिया है, जिसका वह पहले विरोध कर चुका था।
श्टॉकर ने 28 अगस्त को ऑस्ट्रियाई अख़बार Heute से कहा, “अगर इस्लाम की व्याख्या राजनीतिक अर्थ में की जाए, तो वह हमारे लोकतंत्र और हमारे पश्चिमी मूल्यों के साथ मेल नहीं खाता।” उन्होंने कहा, “हम धर्म की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं—हर कोई जो चाहे उस पर यक़ीन कर सकता है और अपने धर्म का पालन कर सकता है। लेकिन जब धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक रूप से किया जाए, तो हमें पूरी दृढ़ता के साथ उसका विरोध करना चाहिए।”
श्टॉकर ने कहा, “इसलिए मैं एक संवैधानिक क़ानून के ज़रिए राजनीतिक इस्लाम पर पाबंदी लगाने के पक्ष में हूँ।” उन्होंने कहा, “हम एक मध्य-दक्षिणपंथी पार्टी हैं। हम जिस बात के लिए खड़े हैं वह यह है: जो कोई ऑस्ट्रिया आता है, उसे यहाँ लागू नियमों का सम्मान करना होगा और समाज में योगदान देना होगा।”
चांसलर ने बाद में X पर लिखा, “मैं बिल्कुल साफ़ कह रहा हूँ: मैं नहीं चाहता कि हमारे बच्चे और नाती-पोते किसी इस्लामी राज्य में बड़े हों।” उन्होंने लिखा, “जैसे हम धर्म के पालन की रक्षा करते हैं, वैसे ही हमें अपने लोकतंत्र की भी रक्षा करनी चाहिए।”
ऑस्ट्रियाई स्कूलों में हालिया हेडस्कार्फ़ प्रतिबंध को लेकर हुए विरोध के बाद श्टॉकर ने कहा कि वियना के स्कूलों में मुसलमानों का पहले ही वर्चस्व है। उन्होंने कहा, “क्या ये लड़कियाँ और लड़के बड़े होकर ऐसे लोकतंत्रवादी बनेंगे जो हमारी क़ानून व्यवस्था और हमारे समाज को स्वीकार करें, उसका पालन करें और उसके भीतर जीवन जिएँ? या वे इस्लामवादी और राजनीतिक रूप से प्रभावित हो जाएँगे? मैं चाहता हूँ कि वे लोकतंत्रवादी बनें।”
यूरोप, एकीकरण और परिवार मामलों की संघीय मंत्री क्लाउडिया बाउअर (Claudia Bauer) ने यह कहते हुए श्टॉकर का समर्थन किया कि वह गठबंधन सहयोगियों के लिए एक प्रस्ताव का मसौदा तैयार करेंगी। उन्होंने कहा: “मैं ऑस्ट्रिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं चाहती जो खुलेआम कट्टरपंथी विचारधाराएँ फैलाए, हमारे समाज को कमज़ोर करे और राज्य को ख़िलाफ़त में बदलना चाहे। मौजूदा क़ानूनी स्थिति पर्याप्त नहीं है।”
इस्लामवाद पर अपने प्रस्ताव रोकने को लेकर विपक्ष का सरकार पर हमला
FPÖ नेता हर्बर्ट किकल (Herbert Kickl) ने एक प्रेस विज्ञप्ति में ÖVP पर हमला बोला। उन्होंने श्टॉकर पर आरोप लगाया कि उन्होंने वर्षों से FPÖ की ओर से उठाई जा रही ऐसी ही माँगों को रोके रखा और उनका मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें ऐसा चांसलर बताया जो “हर चीज़ को सोते हुए गुज़ार देते हैं।”
15 फ़रवरी 2025 को विलाख में हुए जिहादी सामूहिक चाकूबाज़ी हमले के बाद, जिसमें एक सीरियाई ने 14 साल के एक लड़के की हत्या कर दी थी और पाँच अन्य को घायल कर दिया था, FPÖ ने एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें संसद से “राजनीतिक इस्लाम पर व्यापक पाबंदी की शुरुआत” करने का आह्वान किया गया था।
इस प्रस्ताव में राजनीतिक इस्लाम के ख़िलाफ़ एक ऑम्निबस क़ानून की माँग की गई है, जो कुछ ख़तरनाक कृत्यों पर रोक लगाए और उन्हें आपराधिक घोषित करे। इनमें ऑनर किलिंग, महिला जननांग विकृतीकरण और इस्लामवादी आतंकवाद जैसे अपराधों का सार्वजनिक समर्थन या औचित्य ठहराना शामिल है, साथ ही शरिया की स्थापना का सार्वजनिक आह्वान भी, जहाँ तक यह ऑस्ट्रियाई क़ानूनी व्यवस्था के साथ असंगत हो।
प्रस्ताव में इस्लामवादी प्रचार के प्रसार पर भी पाबंदी की माँग की गई, जहाँ तक उसमें महिलाओं को नीचा दिखाना, दूसरों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं (जैसे यौन रुझान या अखंडता) को मान्यता न देना, ऑस्ट्रियाई क़ानूनी व्यवस्था की अस्वीकृति या इसराइल राज्य के अस्तित्व के अधिकार की अस्वीकृति व्यक्त होती हो।
FPÖ के प्रस्ताव में नफ़रत फैलाने वाले उपदेशकों का रजिस्टर बनाने, बुर्क़ा प्रतिबंध को पुलिस के ज़रिए लागू करने—जिसमें क़ानून तोड़ने वालों पर कड़े दंड शामिल हों—स्वीकृत प्रक्रियाओं के ज़रिए इस्लामी पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने और राजनीतिक इस्लाम के ख़िलाफ़ एक राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाने की माँग की गई।
FPÖ के महासचिव मिषाएल श्नेडलिट्ज़ (Michael Schnedlitz) ने कहा, “हमारा प्रस्ताव पुराना है: ÖVP को बोलना बंद करके इसे लागू करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “इस माँग पर श्टॉकर की विश्वसनीयता शून्य है।” ÖVP पर अब जाकर FPÖ की मुहिम पर सवार होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने जोड़ा: “हमें सस्ती नक़लें नहीं चाहिए, बल्कि मूल, स्वतंत्रतावादी संस्करण चाहिए।”
प्रस्ताव से ‘राजनीतिक इस्लाम’ की परिभाषा पर बहस छिड़ी
सरकार के प्रस्ताव ने “राजनीतिक इस्लाम” शब्द की परिभाषा और वैधता को लेकर तीखी बहस छेड़ दी है।
ऑस्ट्रिया में मुसलमानों के आधिकारिक प्रतिनिधि संगठन के रूप में काम करने वाले इस्लामिक रिलीजियस कम्युनिटी इन ऑस्ट्रिया (IGGÖ) ने ज़ोर देकर कहा कि “वह ‘राजनीतिक इस्लाम’ शब्द को किसी ठोस विधायी प्रस्ताव के लिए अनुपयुक्त मानता है।”
IGGÖ के अध्यक्ष उमित वुराल (Ümit Vural) ने समाचार चैनल Zeit im Bild पर सरकार के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की और तर्क दिया कि चरमपंथ से निपटने के लिए क़ानून पहले से मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “अगर इसका मतलब यह है कि हर चरमपंथी आंदोलन से लड़ा जाएगा, तो हम स्पष्ट रूप से क़ानून के राज के पक्ष में हैं,” और इशारा किया उस धुर-दक्षिणपंथी चरमपंथ की ओर जो इस्लामवाद के उभार से लड़ने का दावा कर रहा है।
धार्मिक रूप से प्रेरित राजनीतिक चरमपंथ के दस्तावेज़ीकरण के लिए बने ऑस्ट्रियाई कोष ने कहा कि वह “राजनीतिक इस्लाम” को “एक शासकीय विचारधारा के रूप में परिभाषित करता है जो ऐसे मूल्यों और मानदंडों के आधार पर समाज, संस्कृति, राज्य या राजनीति को बदलने या प्रभावित करने की कोशिश करती है जिन्हें उसके समर्थक इस्लामी मानते हैं, लेकिन जो लोकतांत्रिक क़ानून के राज और मानवाधिकारों के सिद्धांतों के विरुद्ध हैं।”
सोरबोन विश्वविद्यालय में वरिष्ठ व्याख्याता और The Making of Contemporary Propaganda Discourse: How and Why Does It Work? की लेखिका याना ग्रिनशपुन (Yana Grinshpun) ने FWI से कहा, “अगर ‘राजनीतिक इस्लाम’ का इस्तेमाल इस्लामवाद के पर्याय के रूप में किया जाता है, तो इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित करना ज़रूरी है।” ग्रिनशपुन ने समझाया कि “इस्लाम, राजनीतिक इस्लाम और इस्लामवाद—इन शब्दों के इर्द-गिर्द मौजूद अस्पष्टता के इस मुद्दे को समझने के तरीक़े पर गंभीर परिणाम होते हैं।”
ट्रांसअटलांटिक इंस्टिट्यूट फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ कंटेम्पररी आइडियोलॉजीज़ (TISCI) की शोधकर्ता ग्रिनशपुन ने कहा, “कई विद्वान धर्म के रूप में इस्लाम और एक राजनीतिक व क़ानूनी व्यवस्था के रूप में इस्लाम के बीच भेद को अस्वीकार करते हैं। उनका तर्क है कि ‘इस्लाम’ और ‘राजनीतिक इस्लाम’ के बीच का अंतर कृत्रिम है, क्योंकि अपनी उत्पत्ति से ही इस्लाम में न केवल धार्मिक और धर्मशास्त्रीय पहलू रहे हैं, बल्कि क़ानूनी, सामाजिक और राजनीतिक पहलू भी रहे हैं।”
ग्रिनशपुन ने कहा, “इस्लामवादी अंततः शरिया पर आधारित एक इस्लामी क़ानूनी व्यवस्था लागू करना चाहते हैं, हालाँकि उनके तरीक़ों और राजनीतिक रणनीतियों में काफ़ी अंतर हो सकता है। यह परिभाषा हमें इस्लामवाद को राजनीतिक चरमपंथ की व्यापक श्रेणी से अलग करने में भी मदद करती है।”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “इस्लामवाद को महज़ चरमपंथ का एक और रूप—चाहे धुर-दक्षिणपंथ का हो या धुर-वामपंथ का—बताने में यह ख़तरा है कि उसकी अपनी ख़ास विशेषता नज़रअंदाज़ हो जाए। इस्लामवादी आंदोलनों की कुछ विशेषताएँ दूसरे चरमपंथी आंदोलनों से मिल सकती हैं, लेकिन इस्लामवाद इस्लामी क़ानून के अधिकार और धर्म, राजनीति व क़ानून के आपसी संबंध की एक ख़ास अवधारणा पर आधारित है।”
इस्लामवाद से लड़ने के लिए यूरोप की धुर-दक्षिणपंथी पार्टियों ने मिलाया हाथ
यूरोप में क़ानून-निर्माण पर असर डाल सकने वाले एक क़दम के तहत FPÖ ने इस्लामवाद के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई मज़बूत करने के लिए ऑल्टरनेटिव फ़ुअर ड्यूशलांड (AfD) के साथ एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। यह घोषणापत्र वियना और बर्लिन में हुए जिहादी हमलों के बाद तैयार किया गया, ख़ासकर जुलाई में अब्दुल बल्लूत (Abdul Ballout) के बर्लिन प्राइड परेड पर किए गए हमले के बाद, जिसमें 29 लोग घायल हुए थे और एक महिला की मौत हो गई थी।
वियना में FPÖ के प्रांतीय पार्टी अध्यक्ष डोमिनिक नेप (Dominik Nepp) ने कहा, “बर्लिन और वियना के सामने बहुत मिलती-जुलती चुनौतियाँ हैं। दोनों बड़े शहरों ने वर्षों में भारी आप्रवासन देखा है और अब समानांतर समाजों तथा इस्लामवादी ढाँचों के नतीजों से जूझ रहे हैं।” उन्होंने कहा, “इसीलिए हम आगे अपने अनुभवों का अधिक सघन आदान-प्रदान करना चाहते हैं और एक-दूसरे से सीखना चाहते हैं।”
सितंबर 2025 में FPÖ ने घोषणा की थी कि वह 1912 के इस्लाम क़ानून में संशोधन के लिए निर्णायक क़दम उठाएगी, जिसने इस्लाम को ऑस्ट्रिया में एक आधिकारिक धर्म बनाया था। यह घोषणा तब हुई जब वियना की एक अदालत को दो मुसलमानों के बीच एक अनुबंध विवाद में इस्लामी क़ानून को दीवानी मध्यस्थता के वैध आधार के रूप में मान्यता देने पर आलोचना का सामना करना पड़ा, जैसा कि FWI ने रिपोर्ट किया था।
ऑस्ट्रिया के इस्लाम क़ानून (Islamgesetz) ने 1900 के दशक की शुरुआत में इस्लाम को सार्वजनिक क़ानून के तहत एक धार्मिक संप्रदाय के रूप में मान्यता दी थी, जिससे उसे ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य के भीतर आधिकारिक दर्जा मिला। 2015 में इस क़ानून में संशोधन कर धार्मिक त्योहारों को मनाने की अनुमति दी गई, जबकि देश में मस्जिदों की विदेशी फ़ंडिंग पर पाबंदी भी लगाई गई।
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