क्या नागरिकता की नई परिभाषा से कुवैत बचा पाएगा अपना कल्याण तंत्र
अगर ज़्यादातर नागरिक राज्य पर निर्भर हैं, तो कुवैत को लाभ पाने वालों की संख्या सीमित करने के बजाय कल्याण व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।
राधिका लक्ष्मीनारायणन शोधकर्ता और इतिहासकार हैं, जिन्होंने 3 दशकों से अधिक समय तक कुवैत और भारत की अग्रणी संस्थाओं के साथ काम किया है। वे Small States Security Dilemma—Kuwait after 1991 की लेखिका हैं।

नागरिक कौन है? कुवैत में 2026 के डिक्री नंबर 52 ने नागरिकता को नियंत्रित करने वाले राष्ट्रीयता क़ानून (1959 का डिक्री नंबर 15) में संशोधन किया। इसमें मौजूदा प्रथा को स्पष्ट रूप से संहिताबद्ध किया गया है और जीवनसाथियों तथा कुवैत के बाहर जन्मे लोगों के नागरिकता हासिल करने से जुड़े नियमों को और विस्तार से बताया गया है। यह ऐतिहासिक बसावट और वंशानुक्रम के आधार पर ‘मूल’ कुवैतियों की परिभाषा तय करता है। इसमें कहा गया है कि मूल कुवैती वे हैं जो 1920 से पहले कुवैत में बस गए थे और 14 दिसंबर 1959 तक वहाँ अपना स्थायी निवास बनाए रहे। साथ ही, इसमें यह भी माना गया है कि कोई व्यक्ति मूल कुवैती होगा, अगर उसका जन्म कुवैत में या विदेश में किसी मूल कुवैती के यहाँ हुआ हो, वंश की पीढ़ी चाहे कोई भी हो।
फिर भी, कुवैत में नागरिकता महज़ क़ानूनी दर्जा भर नहीं है, क्योंकि इसका रिश्ता राज्य और उसके नागरिकों के बीच आर्थिक व सामाजिक अनुबंध से भी जुड़ा है। कुवैती नागरिकता राज्य-लाभों की एक व्यवस्था तक पहुँच देती है, जिसमें रोज़गार के अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं। “जन्म से मृत्यु तक” वाली ऐसी कल्याण व्यवस्था दुनिया की सबसे व्यापक व्यवस्थाओं में से एक है।
नागरिकों और ग़ैर-नागरिकों के बीच जनसांख्यिकीय असंतुलन नागरिकता के आर्थिक मूल्य को और बढ़ा देता है। आँकड़े बताते हैं कि 5.3 मिलियन की कुल आबादी में नागरिकों की संख्या लगभग 1.56 मिलियन है। बार-बार दोहराया जाने वाला उद्घोष, “ Ana Kuwaiti!” (“I am Kuwaiti”), पहचान, अपनेपन और अधिकार-बोध की गहरी जड़ें जमाए भावना को दर्शाता है। नागरिक और राज्य के बीच इस अंतर्निहित सामाजिक-आर्थिक बंधन को समझने से यह स्पष्ट होता है कि कुवैत नागरिकता पर इतना असाधारण ध्यान क्यों देता है।
अप्रैल 2026 में प्रकाशित नागरिकता संशोधनों के बाद से कुवैत ने अपनी राष्ट्रीयता फ़ाइलों की आधिकारिक समीक्षा शुरू कर दी है। कुवैत के सरकारी राजपत्र Al-Kuwait Al-Youm में प्रकाशित रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि सरकार ने हज़ारों लोगों की नागरिकता रद्द कर दी। रद्द किए जाने के कुछ आधार ये रहे: दोहरे पासपोर्ट रखना, नागरिकता का दावा करने के लिए जाली या अवैध दस्तावेज़ों का इस्तेमाल, राष्ट्रीय सुरक्षा हितों या राज्य के प्रति निष्ठा के विरुद्ध कार्रवाई के प्रमाण, और धार्मिक पवित्रता के विरुद्ध अपराध।
सरकार के नज़रिए से यह अभियान फ़र्ज़ी तरीक़े से हासिल की गई नागरिकता को दुरुस्त करने और कुवैती राष्ट्रीयता की अखंडता की रक्षा करने की ज़रूरत से उपजा है। कोई भी राज्य जालसाज़ी, धोखाधड़ी या गढ़े गए वंश के ज़रिए हासिल की गई नागरिकता को अनदेखा नहीं कर सकता। हालांकि, इन क़दमों के व्यापक निहितार्थों की पड़ताल ज़रूरी है। नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया बढ़ते वित्तीय दबावों और कुवैत की आर्थिक कमज़ोरी को लेकर बढ़ती चिंताओं के साथ-साथ चली है। नीतिगत सवाल यह है कि क्या नागरिकता की सीमाएँ कसने से कल्याणकारी राज्य को बचाने में मदद मिलेगी, या इससे बस उन लोगों की संख्या घटेगी जो इसके लाभों के हक़दार हैं, बिना इस मॉडल की ढाँचागत कमज़ोरियों को दूर किए?
ऐतिहासिक रूप से, कुवैत का कल्याणकारी मॉडल 1962 के संविधान के ढाँचे के भीतर उभरा, जिसे मुख्य रूप से उसकी छोटी नागरिक आबादी के लिए बनाया गया था। इस आबादी को देश की विशाल संसाधन-संपदा से निकले राजस्व के आधार पर पर्याप्त राजकीय समर्थन मिलता है। संविधान का अनुच्छेद 11 राज्य से अपेक्षा करता है कि वह नागरिकों को बुढ़ापे, बीमारी और काम करने में असमर्थता की स्थिति में सहायता दे, साथ ही सामाजिक सुरक्षा, सामाजिक सहायता और चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराए। अनुच्छेद 13, 15 और 40 शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा के लिए राज्य की ज़िम्मेदारियाँ तय करते हैं, जबकि अनुच्छेद 20 राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सामाजिक न्याय, बेहतर जीवन स्तर और नागरिकों की समृद्धि से जोड़ता है।
लेकिन आज, बढ़ते सरकारी ख़र्च, बजट घाटे, ऊँची रक्षा लागत और क्षेत्रीय संघर्ष से तेल निर्यात व समुद्री व्यापार में आई बाधाओं के चलते राज्य पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। इस नज़रिए से, नागरिकता से जुड़े लाभों के हक़दार लोगों की संख्या घटाना राज्य की मौजूदा और भावी वित्तीय ज़िम्मेदारियों को कम करने में मददगार हो सकता है। फिर भी, इससे वह अंतर्निहित ढाँचागत समस्या हल नहीं होती जो इस कमज़ोरी की जड़ है—यानी तेल राजस्व पर निर्भरता, सार्वजनिक क्षेत्र में व्यापक रोज़गार, सीमित आर्थिक विविधीकरण, भारी सरकारी सब्सिडी, व्यापक कराधान का अभाव, और नियोक्ता तथा प्रदाता—दोनों के रूप में राज्य की प्रभुत्वशाली भूमिका। अगर बुनियादी समस्या यह है कि ज़्यादातर नागरिक राज्य पर निर्भर हैं, तो अधिक टिकाऊ रास्ता यह होगा कि लाभ पाने वालों को सीमित करने के बजाय कल्याणकारी राज्य के मॉडल में ही सुधार किया जाए।
कुवैत ने तेल पर निर्भरता के दीर्घकालिक जोखिमों को दशकों पहले पहचान लिया था। 1976 में उसने Future Generations Fund की स्थापना की, ताकि तेल के बाद के भविष्य के लिए देश की तेल-संपदा का एक हिस्सा अपने नागरिकों के वास्ते सुरक्षित रखा जा सके। Kuwait Investment Authority इस कोष का प्रबंधन अंतर-पीढ़ीगत बचत तंत्र के रूप में करती है, जिसमें निवेश से होने वाली आय दोबारा निवेश की जाती है और निकासी के लिए ऐतिहासिक रूप से क़ानूनी अनुमति ज़रूरी रही है। 1 सितंबर 2026 को 2026 के डिक्री-क़ानून नंबर 81 ने सरकार को अपने General Reserve Fund को सहारा देने के लिए Future Generation Fund से उधार लेने की इजाज़त दी, जिसकी परिसंपत्तियाँ अब 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की हैं। इससे पहले सरकार ने इराक़ युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के प्रयासों के लिए इस कोष का सहारा लिया था।
मौजूदा फ़ैसला क्षेत्रीय संघर्ष से पैदा हुए वित्तीय दबावों को दर्शाता है, जिनमें रक्षा, सुरक्षा, बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरीकरण पर बढ़ा हुआ ख़र्च शामिल है, साथ ही तेल उत्पादन, निर्यात, परिवहन और सरकारी राजस्व पर मंडराते ख़तरे भी। हालांकि यह डिक्री उधारी पर सीमाएँ तय करती है और कोष की मूल राशि की रक्षा करना चाहती है, लेकिन इसका समय महत्वपूर्ण है। कुवैत प्रभावी रूप से नागरिकता की सीमाएँ कस रहा है, और साथ ही एक ऐसा तंत्र भी बना रहा है जिसके ज़रिए राज्य अपनी अंतर-पीढ़ीगत बचत से जुड़े वित्तीय प्रतिफल तक पहुँच सके।
कुवैत क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रति कमज़ोर बना हुआ है। राज्य के पास राष्ट्रीयता की जाँच-परख के जायज़ कारण हैं, ख़ासकर जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा, आपराधिकता, धोखाधड़ी या निष्ठा के सवाल जुड़े हों। लेकिन अगर नागरिकता को रद्द किए जाने योग्य या शर्तों पर आधारित समझा जाने लगे, तो वह असुरक्षा का स्रोत बन सकती है और व्यक्ति तथा राज्य के बीच रिश्ते की मज़बूती को ख़तरे में डाल सकती है। ऐसे समय में जब कुवैत क्षेत्र से बाहर के गठबंधनों पर हद से ज़्यादा निर्भरता के ख़तरों को समझ रहा है, वह सामाजिक एकजुटता और राष्ट्रीय भरोसे के ज़रिए लचीलापन बनाने के महत्व को कम करके नहीं आँक सकता।
किसी भी संप्रभु राज्य की तरह कुवैत को भी नागरिकता देने और वापस लेने की प्रक्रियाएँ तय करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, इस अधिकार के इस्तेमाल के नतीजे व्यक्तियों और परिवारों पर पड़ते हैं, ख़ासकर जीवनसाथियों और बच्चों पर। एक विश्वसनीय राष्ट्रीयता व्यवस्था के लिए पारदर्शी मानदंड, स्पष्ट साक्ष्य-संबंधी अपेक्षाएँ, प्रक्रियागत सुरक्षा-उपाय, प्रभावी न्यायिक समीक्षा और राज्यविहीनता के ख़िलाफ़ मज़बूत संरक्षण ज़रूरी हैं। नागरिकता रद्द करने के जटिल आर्थिक परिणाम भी हो सकते हैं। उन लोगों का क्या होगा जो नागरिकता गँवा देते हैं, जबकि उनके पास संपत्ति या कारोबार है, बैंक खाते हैं, क़र्ज़ चल रहे हैं, पेंशन मिल रही है, या रोज़गार अनुबंध हैं? सरकार ने इनमें से कुछ परिणामों से पूर्वव्यापी रूप से निपटना शुरू कर दिया है। 2026 के Ministerial Decision No. 1410 के तहत सरकार नागरिकता गँवाने वाले कुछ श्रेणियों के लोगों को दस साल की निवास अनुमति दे रही है। Capital Markets Authority ने निर्देश जारी किए हैं जिनके तहत नागरिकता गँवाने वाले कुछ लोग तय शर्तों पर प्रतिभूतियों का कारोबार जारी रख सकते हैं। इसी तरह अंतरिम व्यवस्थाओं ने कुछ श्रेणियों के लिए बैंकों, कारोबार और सरकार से किराए पर लिए गए आवास तक पहुँच को सुरक्षित रखा है।
लेकिन वक़्त की माँग अल्पकालिक उपाय नहीं, बल्कि अधिक टिकाऊपन के लिए सामाजिक अनुबंध का पुनर्गठन है। ऐसा सुधार एक छोटे राज्य के लिए बेहद क़ीमती है, ख़ासकर तब जब उसका सुरक्षा परिवेश बिगड़ रहा हो और वित्तीय विकल्प सिकुड़ रहे हों।
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