मिस्र को लेकर ग्रीस की दुविधा
समुद्री सीमाओं से लेकर ऊर्जा और प्रवासन तक काहिरा के साथ अहम सहयोग ने एथेंस के लिए मतभेदों को संभालना मुश्किल बना दिया है।
निकोलिटा कौरूशी साइप्रस में रहने वाली राजनीतिक वैज्ञानिक और पत्रकार हैं। उनका काम Phileleftheros अख़बार, Modern Diplomacy और Geostrategic Forecasting Corporation जैसे प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ पिरेयस (University of Piraeus) से अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय अध्ययन में MSc की डिग्री हासिल की है।

मिस्र पूर्वी भूमध्यसागर में ग्रीस के सबसे अहम साझेदारों में से एक बन चुका है। एथेंस समुद्री सीमाओं, ऊर्जा, लीबिया, प्रवासन, और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काहिरा के साथ सहयोग पर निर्भर है। लेकिन यही निर्भरता मिस्र के साथ मतभेदों का प्रबंधन कठिन बना देती है। सिनाई में सेंट कैथरीन मठ की हैसियत को लेकर जारी विवाद बताता है कि ऐसा क्यों है।
ग्रीस मठ की संपत्ति और संस्थागत अधिकारों की रक्षा करना चाहता है, लेकिन वह यह भी नहीं चाहता कि यह मुद्दा उस रिश्ते को नुकसान पहुँचाए, जो कहीं व्यापक रणनीतिक हितों की पूर्ति करता है। 8 सितंबर 2026 को एल-अलामीन में जब प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस (Kyriakos Mitsotakis) ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तेह अल-सीसी से मुलाक़ात की, तब भी यह मुद्दा अनसुलझा ही था। इस मुलाक़ात के बाद साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिडिस (Nikos Christodoulides) के साथ हुई त्रिपक्षीय शिखर बैठक में उन कई क्षेत्रों में सहयोग की फिर पुष्टि की गई, जो मिस्र को एथेंस के लिए अहम बनाते हैं।
सेंट कैथरीन मठ अब इस बात की कसौटी बन गया है कि ग्रीस इस रिश्ते का प्रबंधन कैसे करता है। 28 मई 2025 को मिस्र की एक अदालत के फ़ैसले ने मठ के संपत्ति अधिकारों और क़ानूनी दर्जे को लेकर ग्रीस में चिंताएँ पैदा कर दीं। तब से एथेंस और काहिरा किसी समझौते तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं, और गर्मियों भर बातचीत जारी रही। मित्सोताकिस ने एल-अलामीन में सीसी के सामने यह मुद्दा फिर उठाया।
उसी दिन, यूरोपीय संघ में मिस्र के राजदूत अहमद अबू ज़ैद (Ahmed Abu Zeid) ने अपने अनुरोध पर ब्रसेल्स में यूरोपीय संसद के ग्रीक सदस्य निकोलस फ़ारांतूरिस (Nikolas Farantouris) से मुलाक़ात की। फ़ारांतूरिस ने मठ की हैसियत और संस्थागत अधिकारों की सुरक्षा पर ज़ोर दिया, साथ ही यह भी रेखांकित किया कि इस मुद्दे का समाधान ग्रीस और मिस्र के रणनीतिक रिश्ते को कमज़ोर किए बिना होना चाहिए।
इस विवाद को एथेंस जिस तरह संभाल रहा है, वह एक व्यापक बाध्यता को दिखाता है। ग्रीस का हित मठ के अधिकार सुरक्षित कराने में है, लेकिन काहिरा से टकराव उन मुद्दों पर सहयोग को प्रभावित कर सकता है, जिनका रणनीतिक वज़न कहीं ज़्यादा है।
समुद्री सीमाएँ इन्हीं में से एक हैं। ग्रीस और मिस्र ने 2020 में अपने विशेष आर्थिक क्षेत्रों का आंशिक सीमांकन किया था। इस समझौते ने ग्रीस की स्थिति मज़बूत की, जब एथेंस तुर्की और लीबिया के बीच 2019 के समझौते से पैदा हुए समुद्री दावों को चुनौती दे रहा था। एल-अलामीन में ग्रीस, मिस्र और साइप्रस ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री क़ानून संधि के अनुरूप समुद्री सीमांकन का समर्थन किया।
ऊर्जा ने इस रिश्ते को और भी अहम बना दिया है। प्रस्तावित GREGY इंटरकनेक्टर मिस्र में पैदा होने वाली बिजली को ग्रीस और यूरोपीय बाज़ारों तक पहुँचाएगा। मिस्र साइप्रस की प्राकृतिक गैस को भी यूरोप निर्यात के लिए प्रसंस्कृत कर सकता है। ये परियोजनाएँ एथेंस, काहिरा और निकोसिया को सहयोग बनाए रखने की व्यावहारिक वजहें देती हैं, और यूरोप के ऊर्जा नेटवर्क में मिस्र की भूमिका मज़बूत कर सकती हैं।
लीबिया एथेंस के लिए काहिरा को क़रीब रखने की एक और वजह है। तुर्की की वहाँ सैन्य और राजनीतिक मौजूदगी बनी हुई है, और वह त्रिपोली के साथ अपने 2019 के समुद्री समझौते का बचाव करता रहा है। लीबिया में मिस्र के अपने सुरक्षा हित हैं और उसका ख़ासा प्रभाव भी है। इसलिए ग्रीस को अपने समुद्री हितों की रक्षा करने और लीबिया के साथ अपनी बातचीत आगे बढ़ाने के लिए काहिरा से नियमित तालमेल की ज़रूरत है।
मिस्र के साथ तुर्की के बेहतर होते रिश्ते इस गणित में एक और पहलू जोड़ते हैं। वर्षों की प्रतिद्वंद्विता के बाद काहिरा और अंकारा ने राजनयिक संबंध बहाल किए हैं और सहयोग बढ़ाया है। मिस्र ने ग्रीस के साथ अपनी साझेदारी नहीं छोड़ी है, और एल-अलामीन शिखर बैठक ने दिखाया कि सहमति के अहम क्षेत्र अब भी मौजूद हैं। लेकिन एथेंस अब यह नहीं मान सकता कि मिस्र और तुर्की के बीच तनाव अपने आप ग्रीस के पक्ष में काम करेगा।
प्रवासन और यूरोपीय संघ के साथ संबंध इस साझेदारी में एक और आयाम जोड़ते हैं। ग्रीस और साइप्रस ने मिस्र के साथ यूरोप की नज़दीकी भागीदारी का समर्थन किया है, जबकि यूरोप की ओर जाने वाले प्रवासन मार्गों के प्रबंधन में काहिरा की भूमिका अहम है। नतीजतन, एथेंस मिस्र से द्विपक्षीय साझेदार के रूप में भी निपटता है और अपनी व्यापक यूरोपीय नीति के हिस्से के रूप में भी।
वॉशिंगटन के लिए अहम यह है कि यह विवाद पूर्वी भूमध्यसागर के रिश्तों में व्यवधान डाल सकता है। ग्रीस, मिस्र और साइप्रस ऐसे क्षेत्र में ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, और क्षेत्रीय स्थिरता पर सहयोग करते हैं, जो यूरोप, उत्तरी अफ़्रीका और मध्य पूर्व को जोड़ता है।
एल-अलामीन शिखर बैठक ने दिखाया कि न ग्रीस और न ही मिस्र चाहता है कि मठ का विवाद उनके रिश्ते को परिभाषित करे। लेकिन एथेंस के लिए सेंट कैथरीन मठ एक अपरिहार्य साझेदारी का कठिन पहलू उजागर करता है। मिस्र की अहमियत ग्रीस को यह रिश्ता बनाए रखने की मज़बूत वजहें देती है, लेकिन यही अहमियत यह भी सीमित करती है कि हितों के टकराने पर एथेंस कितनी स्वतंत्रता से प्रतिक्रिया दे सकता है। ग्रीक हितों की रक्षा करते हुए इस तनाव का प्रबंधन करना ही काहिरा को क़रीब रखने की क़ीमत है।
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