क्या तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन समलैंगिक हैं?
समलैंगिकता को लेकर एर्दोआन का जुनून उन छिपे हुए समलैंगिकों जैसा दिखता है, जो ख़ुद से सबसे ज़्यादा नफ़रत करते हैं।
माइकल रुबिन ईरान, तुर्की और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका के विशेषज्ञ हैं। उनके करियर में पेंटागन में अधिकारी के तौर पर काम करने का अनुभव शामिल है। इसमें ईरान, यमन और इराक़ में ज़मीनी स्तर के अनुभव के साथ-साथ 9/11 से पहले तालिबान के साथ संपर्क भी रहा है। श्री रुबिन ने सैन्य शिक्षा में भी योगदान दिया है और अमेरिकी नौसेना तथा मरीन इकाइयों को क्षेत्रीय संघर्षों और आतंकवाद के बारे में पढ़ाया है। उनके विद्वतापूर्ण काम में कई अहम प्रकाशन शामिल हैं, जैसे “Dancing with the Devil” और “Eternal Iran।” रुबिन ने येल यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएच.डी. और एम.ए., तथा जीव विज्ञान में बी.एस. की डिग्री हासिल की।

22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन (Erdoğan) ने ग़ज़ा पर बात की और संयुक्त राष्ट्र सुधार को लेकर अपनी हमेशा वाली शिकायतें भी दोहराईं, लेकिन उन्होंने विश्व मंच पर अपना काफ़ी समय बढ़ते LGBTQ अधिकारों की निंदा करने में भी लगाया। उन्होंने घोषणा की, “वैश्विक लैंगिक-तटस्थीकरण की नीतियां … परिवार संस्था के साथ-साथ मासूम बच्चों को निशाना बनाने वाली घेराबंदी में बदल गई हैं।” उनका यह भाषण उस घटना के 9 दिन बाद आया, जब उनकी सरकार ने देश भर में LGBTQ अधिकार और HIV समूहों के दफ़्तरों पर आधी रात को छापे डलवाए थे।
तुर्की के LGBTQ लोगों का इस तरह लक्षित दमन एर्दोआन के शासन की पहचान बन चुका है, लेकिन इसके पीछे प्रेरणा क्या है? इतना साफ़ है कि एर्दोआन का रुख़ काफ़ी बदल चुका है। 2002 के एक प्रश्नोत्तर सत्र में एर्दोआन LGBTQ तुर्कों की दुर्दशा के प्रति सहानुभूति रखते दिखे थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्य को समलैंगिक तुर्कों के अधिकारों को मान्यता देनी चाहिए, तो भावी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि क़ानूनों को LGBTQ तुर्कों को मान्यता देनी होगी, और कहा कि टेलीविज़न पर उनके साथ जैसा व्यवहार वे देखते हैं, वह उन्हें मानवीय नहीं लगता।
प्रधानमंत्री के रूप में एर्दोआन ने शुरू में इस मुद्दे को नज़रअंदाज़ किया। लेकिन 2014 में इस्तांबुल की सालाना प्राइड परेड में 100,000 लोगों के शामिल होने के बाद एर्दोआन ने 2015 में इस आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया और तब से हर साल यह प्रतिबंध जारी है। जहां तुर्की पुलिस ने इस्लामिक स्टेट (ISIS) के समर्थकों को तुर्की में खुलेआम जुटने और इस्तांबुल के हवाई अड्डे को अपने पारगमन केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने दिया, वहीं तुर्की पुलिस ने तुर्की के समलैंगिक समुदाय और उनके समर्थकों पर रबर की गोलियां चलाईं। प्राइड आयोजनों की जगह एर्दोआन की सरकार ने “Büyük Aile Buluşması” [“बड़ा पारिवारिक जमावड़ा”] रैलियों को साफ़ तौर पर समलैंगिकता-विरोधी कार्यक्रमों के रूप में प्रायोजित करना शुरू किया और सरकारी मीडिया से कहा कि वह इनका मुफ़्त विज्ञापन और प्रचार करे। उनकी सरकार ने सभी LGBTQ संगठनों को बंद करने के लिए संविधान संशोधन का प्रस्ताव भी उछाला है।
20 मार्च 2021 को एर्दोआन ने राष्ट्रपति आदेश के ज़रिये तुर्की को महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा और घरेलू हिंसा की रोकथाम तथा उनसे मुक़ाबले पर यूरोप परिषद की संधि—जिसे विडंबनावश इस्तांबुल संधि के नाम से जाना जाता है—से बाहर कर लिया, क्योंकि उन्हें इसमें निहित लैंगिक समानता की अवधारणा और समलैंगिकता के स्पष्ट सामान्यीकरण पर आपत्ति थी।
तुर्की की संसद अब ऐसे क़ानूनों पर विचार कर रही है जो समलैंगिक यौन संबंधों को साफ़ तौर पर ग़ैरक़ानूनी बना देंगे और संभवतः तुर्की के LGBTQ समुदाय पर रिपोर्टिंग को भी अपराध घोषित कर सकते हैं। तुर्की की रेडियो और टेलीविज़न सर्वोच्च परिषद नेटफ़्लिक्स, अमेज़न और डिज़्नी जैसी कंपनियों पर ऐसी सामग्री स्ट्रीम करने के लिए जुर्माना लगाती है जिसे एर्दोआन शासन “सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों तथा तुर्की पारिवारिक ढांचे के विपरीत” मानता है। विडंबना यह है कि जहां एर्दोआन सरकार LGBTQ कार्यकर्ताओं के, या उनके मुद्दों पर चर्चा करने वाले, सैकड़ों सोशल मीडिया खाते बंद करा देती है, वहीं एर्दोआन की ट्रोल सेनाएं समलैंगिकता को लेकर जुनूनी दिखती हैं और अक्सर शासन-आलोचकों को समलैंगिक कृत्यों की धमकी देती हैं।
इस बीच एर्दोआन ख़ुद समलैंगिकता को लेकर लगातार जुनूनी दिखते हैं। 5 साल पहले अपनी सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (AKP) के एक सम्मेलन में उन्होंने घोषणा की, “LGBT—ऐसी कोई चीज़ है ही नहीं,” और यह कोलंबिया विश्वविद्यालय में ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की इसी तरह की घोषणा के समानांतर थी। एर्दोआन बार-बार समलैंगिकता को तुर्की के ख़िलाफ़ पश्चिमी या वैश्विकतावादी साज़िश बता चुके हैं। 23 मई 2025 को इस्तांबुल में इंटरनेशनल फैमिली फ़ोरम में उन्होंने LGBTQ आंदोलन को फ़ासीवाद का एक रूप बताया।
कई देश समलैंगिकता पर सख़्ती बरतते हैं, लेकिन एर्दोआन का जुनून अजीब है। विश्लेषकों को यह सवाल पूछना चाहिए कि तुर्की के नेता की इस कड़ी लाइन के पीछे प्रेरणा क्या है। एर्दोआन के दिमाग़ में कोई नहीं घुस सकता, और न ही कोई उनके शयनकक्ष में घुसना चाहता है। तुर्की के नेता और उनकी पत्नी एमिने के 4 बच्चे हैं। फिर भी, समलैंगिकता को लेकर एर्दोआन का यह प्रतीत होता जुनून और समाज पर समलैंगिकता के असर को लेकर उनकी अतिशयोक्तियां और झूठ एक व्यापक पैटर्न में फिट बैठते हैं, जिसमें छिपे हुए समलैंगिक उन समाजों के प्रति सबसे दमनकारी हो सकते हैं जिन्हें वे नकारना चाहते हैं।
इस परिघटना पर पर्याप्त साहित्य मौजूद है। मिसाल के तौर पर, 2012 में Journal of Personality and Social Psychology में छपे एक लेख में पाया गया, “समलैंगिकता-भीति उन व्यक्तियों में अधिक प्रबल होती है जिनमें समलिंगी आकर्षण अस्वीकृत रूप में मौजूद है और जो ऐसी इच्छाओं पर रोक लगाने वाले अधिनायकवादी माता-पिता के बीच पले-बढ़े हैं।” तुर्की के नेता की अपनी जीवनी में वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट के विद्वान सोनर चागापते (Soner Cagaptay) ने एर्दोआन के अधिनायकवादी पालन-पोषण का ज़िक्र किया है। सह-लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ़ रोचेस्टर के प्रोफ़ेसर रिचर्ड रायन (Richard Ryan) ने Scientific American को बताया, “कभी-कभी लोग समलैंगिक पुरुषों और महिलाओं से इसलिए ख़तरा महसूस करते हैं क्योंकि वे अपने ही आवेगों से डर रहे होते हैं; एक मायने में वे ‘ज़रूरत से ज़्यादा विरोध करते हैं’।”
अगर एर्दोआन के साथ भी यही बात है, तो वे अकेले नहीं होंगे। हंगरी के 2011 के संविधान के प्रमुख प्रारूपकार योज़ेफ़ सायेर (József Szájer) का मामला देखिए—इस संविधान ने समलैंगिक अधिकारों को पीछे धकेला और विवाह को सख़्ती से एक पुरुष और एक महिला के बीच परिभाषित किया—जिन्होंने बाद में यूरोपीय संसद से इस्तीफ़ा दे दिया, जब पुलिस ने उन्हें सिर्फ़ पुरुषों वाली एक पार्टी से भागते हुए पकड़ा। 2013 में, ब्रिटेन के सबसे वरिष्ठ कैथोलिक पादरी और समलिंगी विवाह के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले कीथ ओ’ब्रायन (Keith O’Brien) ने भी आर्कबिशप पद से इस्तीफ़ा दे दिया, जब यह खुलासा हुआ कि उन्होंने पादरियों से यौन संपर्क बनाया था, या कम से कम बनाने की कोशिश की थी। ऑस्ट्रिया के धुर-दक्षिणपंथी नेता योर्ग हाइडर (Jörg Haider) की मौत के बाद उनके संरक्षण में आगे बढ़े श्टेफ़ान पेत्ज़नर (Stefan Petzner) ने स्वीकार किया कि वे दोनों एक युगल थे।
अमेरिका में FBI के पूर्व निदेशक जे. एडगर हूवर ने विरोधियों की ज़िंदगियां तबाह कीं, जिनमें से कई पर उन्होंने समलैंगिक होने का आरोप लगाया, जबकि कथित तौर पर वे ख़ुद समलैंगिक थे।
लेकिन एक इस्लामवादी के तौर पर क्या एर्दोआन अलग हैं? तुर्की नेता की मुस्लिम ब्रदरहुड से प्रेरित विचारधारा के महत्व को देखते हुए शायद सबसे बड़ी समानता इस्लामी गणराज्य ईरान से बनती है। जब अहमदीनेजाद ने ईरान में समलैंगिकता के अस्तित्व से इनकार किया, तो वे न सिर्फ़ ईरानी इतिहास पर पर्दा डालना चाहते थे, बल्कि कई शिया धार्मिक मदरसों के उस खुले रहस्य पर भी, और अगर केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी (CIA) के प्रोफ़ाइलों पर भरोसा किया जाए, तो सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई ख़ुद भी।
हालांकि यह तय है कि आधुनिकता-पूर्व ईरान में समलैंगिकता असामान्य नहीं थी और यह फ़ारसी कविता व चित्रकला में अच्छी तरह प्रतिबिंबित है। विडंबना यह है कि सीरूस शमीसा (Sirus Shamisa) की किताब Shahedbazi dar Adabiyat-e Farsi संकेत देती है कि ईरान में समलैंगिकता की जड़ें उन तुर्की सैन्य अधिकारियों तक जाती हैं जिन्होंने देश पर हमला किया था। ईरानी ब्लॉगर इस प्रथा पर चर्चा करते हुए इसे ख़ासकर ईरान के धार्मिक शहरों में बेहद व्यापक बताते हैं। एक पूर्व मदरसा छात्र ने भी क़ोम के एक मदरसे में अपने समलैंगिक अनुभवों को बहुत आम बताया। और वह अकेला नहीं था। दरअसल, ईरानी चुटकी लेते हैं, “ईरान में गुदामैथुन पर मौत की सज़ा मिलती है। मदरसे में इस पर डिग्री मिलती है।”
इराक़ी राजनीतिक विश्लेषक बशीर अल-हुजैमी (Bashir al-Hujaimi) ने तब विवाद खड़ा कर दिया जब उन्होंने इराक़ी टेलीविज़न पर कहा कि इराक़ में समलैंगिकता की सबसे ऊंची दर नजफ़ में है, और इशारा किया कि इसकी वजह वहां के मदरसे हैं। दूसरों ने मदरसों में इस प्रथा के बारे में और भी साफ़-साफ़ कहा।
जहां ईरानी मदरसा छात्रों के बीच समलैंगिकता पर चुटकुले सुनाते हैं और ख़ुद ईरान के सर्वोच्च नेता की कथित समलैंगिकता के बारे में फुसफुसाते हैं, वहां अति-क्षतिपूर्ति का सवाल बड़ा होकर सामने आता है।
यही सवाल तुर्की के भीतर भी उठना चाहिए। कोई नहीं जानता कि एर्दोआन के दिमाग़, दिल या ऑफ़शोर बैंक खातों में क्या है। और अगर एर्दोआन समलैंगिक हैं, तो इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है। लेकिन समलैंगिकता पर एर्दोआन का विचित्र फोकस और तुर्की टिप्पणीकारों का समलैंगिकता संबंधी गालियों को लेकर प्रतीत होता जुनून—इन दोनों का मेल यह सवाल खड़ा करता है कि एर्दोआन ने जो व्यवहार-पैटर्न शुरू किया है, वह उन्हें एक सच्चे सामाजिक योद्धा की बजाय तुर्की का योज़ेफ़ सायेर अधिक बनाता है या नहीं।
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