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इतालवी स्कूलों में बुर्क़ा और नक़ाब पर पाबंदी, इस्लामवादी भड़के

एक इतालवी इस्लामवादी ने इस नीति को “श्वेत वर्चस्ववादी” क़रार दिया है।

जूल्स गोम्स रोम में रहने वाले बाइबिल विद्वान और पत्रकार हैं।

Italy has approved a decree-law banning face coverings in schools, which has incited an angry response from Islamist leaders in Italy and the United States.
इटली ने स्कूलों में चेहरा ढकने पर पाबंदी को मंज़ूरी दे दी है, जिस पर इटली और अमेरिका के इस्लामवादी नेताओं ने नाराज़ प्रतिक्रिया दी है। हालाँकि एक इतालवी इमाम ने इस पाबंदी का समर्थन करते हुए कहा कि पूरा नक़ाब इस्लाम के असली मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि महिलाओं की गरिमा घटाता है और उनके सामाजिक तथा शैक्षिक एकीकरण में बाधा बनता है। · (Shutterstock)

इटली ने एक अध्यादेश-क़ानून को मंज़ूरी दी है, जिसके तहत स्कूलों में चेहरा ढकने पर पाबंदी लगेगी और प्राथमिक, मिडिल व हाई स्कूल के पहले साल में गैर-इतालवी छात्रों या इतालवी भाषा में कमज़ोर दक्षता वाले विद्यार्थियों का अनुपात अधिकतम 30 प्रतिशत तय किया जाएगा।

यह अध्यादेश-क़ानून प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के मंत्रियों के मंत्रिमंडल ने 24 सितंबर को पारित किया। यह तुरंत लागू हो गया है, लेकिन संसद को 60 दिनों के भीतर इसकी पुष्टि करनी होगी। चेहरा ढकने वाला नक़ाब पहनकर स्कूल आने वालों पर €200 से €1,000 तक का जुर्माना लगेगा।

मेलोनी ने अपनी पार्टी फ़्रातेल्ली द'इतालिया (Fratelli D'Italia) की सालाना युवा सभा में कहा, “आपको स्कूल चेहरा खुला रखकर जाना होगा, और इटली में कोई भी किसी वास्तविक या कथित परंपरा के नाम पर यह तय नहीं कर सकता कि किसी युवती को ख़ुद को छिपाना होगा।”

मेलोनी ने कहा, नया क़ानून “यह भी अनिवार्य करता है कि स्कूली व्यवस्था में घुलने-मिलने में गंभीर दिक़्क़तों का सामना कर रहे विदेशी छात्रों के अभिभावक इतालवी भाषा सीखें, और यह स्कूलों में बुर्क़ा तथा नक़ाब पर पाबंदी लगाता है।” अपने भाषण में उन्होंने इन इस्लामी चेहरा-ढकने वाले परिधानों की पहचान साफ़ तौर पर की।

प्रधानमंत्री ने Rai 1 टीवी से कहा, “ये सामान्य समझ के नियम हैं—ऐसे नियम जो स्पष्ट रूप से सुरक्षा के उद्देश्य को पूरा करते हैं।” “स्कूल, विश्वविद्यालय या सार्वजनिक दफ़्तरों में चेहरा ढककर आने पर रोक लगाने वाले इसी तरह के उपाय पूरे यूरोप में और कई मुस्लिम-बहुल देशों में भी पहले से मौजूद हैं, ठीक सुरक्षा कारणों से ही।”

मेलोनी ने कहा कि उन्हें महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने पर गर्व है। उन्होंने टिप्पणी की: “मुझे यह काफ़ी अजीब लगता है कि जो लोग हम पर महिलाओं के अधिकारों के लिए पर्याप्त न करने का आरोप लगाते हैं … वही यह नहीं देख पाते कि यह क़दम दरअसल महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे को ही संबोधित करता है।”

स्कूल क्षेत्र के अनुमानों के अनुसार, विदेशी छात्रों में लगभग एक-तिहाई मुसलमान हैं, यानी देश भर में क़रीब 350,000 छात्र। 1,000 से अधिक इतालवी स्कूलों में (750 समग्र स्कूलों में और 250 माध्यमिक स्कूलों में) मुस्लिम विद्यार्थियों की संख्या कक्षा क्षमता के 30% से अधिक है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल क़ानून के ख़िलाफ़, शीर्ष इमाम पाबंदी के समर्थन में

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस नए क़दम की निंदा करते हुए इसे “भेदभावपूर्ण” बताया और कहा कि यह “इतालवी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की अभिव्यक्ति और धर्म की स्वतंत्रता के लिए सीधा ख़तरा” है, और “संविधान के अनुच्छेद 34 में निहित शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन” है।

इतालवी बिशप सम्मेलन के वामपंथी अध्यक्ष कार्डिनल माटेओ जुप्पी (Matteo Zuppi) ने मेलोनी की स्कूल सीमा पर हमला करते हुए इसे “अकल्पनीय” कहा। उन्होंने चेतावनी दी, “इस सबको एकीकरण कहना एक और झूठ है, उन लोगों के लिए सुविधाजनक झूठ जो विचारधारा के सहारे जीते हैं, जो ड्राइंग रूम से हमें उपदेश देते हैं और फिर अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में भेजते हैं जहाँ यह समस्या है ही नहीं।”

हालांकि कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ यूरोपियन इमाम्स के अध्यक्ष इमाम हसन शलग़ूमी (Hassen Chalghoumi) ने क़ानून का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि नक़ाब “मुस्लिम महिलाओं की भूमिका और गरिमा को कमज़ोर करता है” और ज़ोर देकर कहा कि पूरा पर्दा इस्लाम के असली मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि महिलाओं की गरिमा घटाता है और उनके सामाजिक तथा शैक्षिक एकीकरण में बाधा बनता है।

रोम की ग्रेट मस्जिद के धार्मिक मामलों के सलाहकार इमाम नादिर अक्काद (Nader Akkad) ने दोहराया कि बुर्क़ा और नक़ाब क़ुरआनी आदेश नहीं हैं, और पर्दे का अनुशंसित स्वरूप “मरियम वाला नमूना” है, जिसमें चेहरा खुला रहता है। अक्काद ने बताया कि बुर्क़ा और नक़ाब विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों से जुड़े सांस्कृतिक रिवाजों की अभिव्यक्ति हैं।

ट्रांसअटलांटिक इंस्टिट्यूट फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ कंटेम्पररी आइडियोलॉजीज़ (Transatlantic Institute for the Study of Contemporary Ideologies) की संस्थापक-अध्यक्ष फ़्लोरेंस बर्जो-ब्लाक्लर (Florence Bergeaud-Blackler) ने Focus on Western Islamism (FWI) से कहा, “ये दोनों क़दम, जिनका मक़सद इतालवी भाषा सीखने और साझा नियमों के पालन के ज़रिये स्कूलों में एकीकरण को बढ़ावा देना है, अलग-अलग विचार के हक़दार हैं। मेरी राय में दोनों वास्तव में प्रभावी होने से ज़्यादा प्रतीकात्मक हैं।”

उन्होंने कहा, “बुर्क़ा और नक़ाब पर पाबंदी हिजाब पहनने से नहीं रोकेगी, जो बाल और गर्दन ढकता है, जबकि चेहरा दिखता रहता है। बहस को सिर्फ़ इस पर केंद्रित करना कि चेहरा दिख रहा है या नहीं, उन व्यापक मुद्दों को संबोधित करने में नाकाम रहता है जो मिसाल के तौर पर फ़्रांस में उठे: लड़कियों और लड़कों के बीच बराबरी, और लड़कियों पर शालीनता के धार्मिक मानदंड थोपे जाने पर होने वाला आरंभिक वैचारिक अनुकूलन।”

बर्जो-ब्लाक्लर ने जोड़ा, “विदेशी विद्यार्थियों की संख्या पर सीमा लगाना एक अलग सवाल खड़ा करता है। भाषा सीखने को बढ़ावा देना और स्कूलों में पृथक्करण रोकना वैध उद्देश्य हैं, लेकिन राष्ट्रीयता एक सीमित कसौटी ही रहती है। पृथक्करण जातीय, सांस्कृतिक और धार्मिक आधार पर भी हो सकता है, जिसे यह कसौटी पकड़ नहीं पाती।”

2021 में इटली में लोग यह जानकर स्तब्ध रह गए थे कि मूलतः बांग्लादेश की रहने वाली और रोम के तटीय इलाक़े ओस्तिया में रह रही 14 साल की एक मुस्लिम लड़की को बुर्क़ा पहनने से इनकार करने पर उसकी मां और 17 वर्षीय भाई नियमित रूप से पीटते थे।

उस किशोरी ने पुलिस को बताया, “वे चाहते थे कि मैं बुर्क़ा पहनूँ, पर मैंने मना कर दिया।” “मेरे भाई ने मुझे थप्पड़ मारा, मुझे पकड़ा और दीवार से दे मारा। फिर उसने मुझे दोबारा धक्का दिया और मेरा सिर एक फ़र्नीचर से टकरा गया।” उसने यह शिकायत भी की कि उसे ज़बरन शादी के लिए मजबूर किया जा रहा था।

इस्लामवादियों ने बुर्क़ा पाबंदी ख़ारिज की

विवादास्पद अमेरिकी इस्लामवादी संगठन काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) ने इस पाबंदी की निंदा करते हुए इसे “मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने और हाशिये पर धकेलने की स्पष्ट कोशिश” बताया।

इतालवी इस्लामी धार्मिक समुदाय (COREIS) के उपाध्यक्ष इमाम याह्या पल्लाविचिनी (Yahya Pallavicini) ने इस पाबंदी को एक छोटे अल्पसंख्यक वर्ग पर लक्षित “झूठी समस्या” और “बौद्धिक बेईमानी” बताया। उन्होंने कहा कि यह “समाज का एक इकहरा नमूना पेश करती है” जो “श्वेत वर्चस्ववादी” है।

लोम्बार्डी की सबसे बड़ी मस्जिद के प्रमुख इमाम अली अबू शुवैमा (Ali Abu Shwaima) ने पाबंदी को “महज़ हेरफेर” बताकर ख़ारिज किया और कहा कि उन्होंने “स्कूल में कभी कोई लड़की बुर्क़े में नहीं देखी।” राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला की टिप्पणियों के बाद उन्होंने मेलोनी सरकार से “संविधान का सम्मान” करने का आग्रह किया।

हालांकि मत्तारेला ने समावेशी और खुले स्कूलों के संवैधानिक मूल्य पर ज़ोर दिया है और ऐसी अड़चनों व बाधाओं से बचने का आह्वान किया है, जो पहुंच या शैक्षिक प्रगति को सीमित कर सकती हैं। यह मेलोनी के लिए एक कूटनीतिक फटकार थी, लेकिन उन्होंने बुर्क़ा पाबंदी की आलोचना नहीं की है।

यूरोप भर में फैलती बुर्क़ा पाबंदियाँ

स्कूलों में इटली की बुर्क़ा पाबंदी, 23 सितंबर 2026 को पुर्तगाल द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने पर लगाई गई रोक के बाद आई है। इस पाबंदी के उल्लंघन पर €150 से €3,000 तक का जुर्माना है। किसी दूसरे व्यक्ति को चेहरा ढकने के लिए मजबूर करने वाले को अधिकतम दो साल तक की जेल हो सकती है, और पीड़ित के नाबालिग़ होने पर यह सज़ा बढ़ जाती है।

जहाँ सोशलिस्ट पार्टी ने विधेयक के “इस्लामोफ़ोबिक मक़सद” की निंदा की, वहीं पुर्तगाली कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा कि इस क़ानून का “न महिलाओं के अधिकारों से कोई लेना-देना है, न सुरक्षा के मुद्दों से,” बल्कि यह “सिर्फ़ उन लोगों के ख़िलाफ़ नफ़रती भाषण और हिंसा को हवा देने के बारे में है जो अलग हैं, और यह नस्लवादी तथा विदेशी-द्वेषी विमर्श को भड़काता है।”

यूरोप में बुर्क़ा पाबंदियों के क़ानूनी औचित्य का आधार सुरक्षा संबंधी चिंताओं से—जो इस्लामी पहनावे को चुनौती देने से बचती थीं—सरककर अब क़ानून में इस्लामी रिवाजों के स्पष्ट उल्लेख तक पहुंच गया है।

अप्रैल 2011 में फ़्रांस चेहरा ढकने पर पाबंदी लगाने वाला पहला यूरोपीय देश बना। एक मुस्लिम महिला की चुनौती के बाद यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) ने जुलाई 2014 में पाबंदी को बरक़रार रखा। इस नज़ीर ने दूसरे यूरोपीय देशों को इस्लामोफ़ोबिया के आरोप का डर छोड़े बिना, बुर्क़ा-विरोधी क़ानून पर विचार करने का हौसला दिया।

ECHR ने फ़ैसला दिया कि यह पाबंदी “स्पष्ट रूप से उस पहनावे के धार्मिक अर्थ पर आधारित नहीं थी।” उसने “राज्य के इस तर्क पर विचार किया कि सामाजिक मेलजोल में चेहरा एक अहम भूमिका निभाता है।” अदालत ने “ living together ,” की अवधारणा के आधार पर अपना फ़ैसला सुनाया और कहा कि यह नई समझ धर्म की स्वतंत्रता जैसे कुछ अधिकारों पर सीमाएं लगाने की अनुमति देती है।

बेल्जियम ने जुलाई 2011 में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने पर पाबंदी लगाई, जिसके उल्लंघन पर जुर्माना और जेल की सज़ा है। दिसंबर 2012 में बेल्जियम के संवैधानिक न्यायालय ने यह कहते हुए पाबंदी को बरक़रार रखा कि यह मौलिक अधिकारों या धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करती।

पूरा नक़ाब पहनने की इच्छुक दो मुस्लिम महिलाओं ने इस फ़ैसले को ECHR में चुनौती दी। 2017 में ECHR ने फ़ैसला दिया कि चेहरा ढकने वाले नक़ाब पर पाबंदी यूरोपीय मानवाधिकार अभिसमय का उल्लंघन नहीं करती। अदालत ने 2014 की नज़ीर का सहारा लेते हुए कहा कि पाबंदी का मक़सद “living together” की अवधारणा और “दूसरों के अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं की रक्षा” सुनिश्चित करना था।

बुल्गारिया ने सितंबर 2016 से सरकारी, प्रशासनिक और शैक्षिक संस्थानों में पूरे चेहरे का घूंघट करने वाले नक़ाब पर पाबंदी लागू की। ऑस्ट्रिया के अक्टूबर 2017 के एंटी-मास्क क़ानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे के नैन-नक़्श पूरी तरह दिखने चाहिए। सितंबर 2026 में ऑस्ट्रिया ने 14 साल से कम उम्र की लड़कियों के स्कूल में ऐसा सिर ढकने वाला स्कार्फ़ पहनने पर रोक लगा दी, जो “इस्लामी परंपरा के अनुसार सिर ढकता है।”

डेनमार्क ने अगस्त 2018 में देशव्यापी बुर्क़ा पाबंदी लागू की, जबकि नीदरलैंड्स ने अगस्त 2019 में आंशिक पाबंदी का विकल्प चुना और स्विट्ज़रलैंड ने राष्ट्रीय जनमत संग्रह तथा 2023 में लागू हुए क़ानून के बाद सार्वजनिक स्थानों पर संघीय बुर्क़ा पाबंदी की पुष्टि कर दी।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Meloni Government’s Sweeping Ban on Burqas and Niqabs from Schools Provokes Islamists

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