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इराक़ी कुर्दिस्तान में एकीकृत पेशमर्गा का भ्रम

नया नाम पाने के बावजूद कुर्द सशस्त्र बलों और उनके भीतर के विभाजनों पर दोनों राजनीतिक दलों का नियंत्रण बरक़रार है।

Sirwan Kajjo पत्रकार और शोधकर्ता हैं, जिनकी विशेषज्ञता कुर्द राजनीति, इस्लामी उग्रवाद और सीरियाई मामलों में है। उन्होंने सीरिया और कुर्दों पर दो पुस्तक-अध्याय लिखे हैं, जो Indiana University Press और Cambridge University Press से प्रकाशित हुए हैं। सीरियाई और कुर्द मुद्दों पर उनके लेख मिडिल ईस्ट फ़ोरम (Middle East Forum), वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फ़ॉर नियर ईस्ट पॉलिसी (Washington Institute for Near East Policy) तथा अन्य प्रमुख शोध संस्थाओं और प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं। Kajjo सीरिया पर आधारित उपन्यास Nothing But Soot के लेखक भी हैं। उन्होंने George Mason University से सरकार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में BA किया है।

Letters spelling out "Peshmerga" on a mountainside above Akre in Iraq's Kurdistan Region.
इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र में अकरे के ऊपर पहाड़ी ढलान पर “पेशमर्गा” लिखे अक्षर। · Shutterstock

10 सितंबर 2026 को इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र में पेशमर्गा मामलों के मंत्रालय ने घोषणा की कि क्षेत्र के दो सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों—कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी और पैट्रियॉटिक यूनियन ऑफ़ कुर्दिस्तान—से संबद्ध सशस्त्र बलों के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। सामान्य हालात में यह जश्न का मौक़ा होता। आख़िरकार, पहली बार शासन के ज़िम्मेदार अधिकारियों ने औपचारिक रूप से कुर्दिस्तान के सशस्त्र बलों को एक संयुक्त रक्षा कमान के अधीन रखा है। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इस कथित एकीकरण से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है।

पेशमर्गा के नाम से जाने जाने वाले कुर्द बल 1991 में कुर्दिस्तान क्षेत्र को स्वायत्तता मिलने के बाद से ही बंटे हुए हैं और क्षेत्र के दोनों सत्तारूढ़ दलों के नियंत्रण में रहे हैं, जबकि अगले ही साल पहली क्षेत्रीय सरकार के गठन के दौरान पेशमर्गा मामलों के मंत्रालय की स्थापना कर दी गई थी। शुरुआती वर्षों में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ अपने-अपने पेशमर्गा बलों का इस्तेमाल एक गृहयुद्ध में किया, जिसमें हज़ारों लोगों की जान गई। हालाँकि सद्दाम हुसैन के शासन के पतन के बाद इराक़ के 2005 के संविधान ने कुर्दिस्तान क्षेत्र की स्थिति को औपचारिक मान्यता दी, लेकिन इससे कुर्द सशस्त्र बलों का एकीकरण ज़्यादा आगे नहीं बढ़ पाया।

कई वर्षों से अमेरिका दोनों कुर्द बलों को पेशमर्गा मामलों के मंत्रालय की कमान के तहत लाने की कोशिश करता रहा है। इस्लामिक स्टेट (ISIS) के ख़िलाफ़ युद्ध के दौरान कुर्द बलों ने इस आतंकवादी संगठन को हराने के अमेरिकी नेतृत्व वाले अभियान में मदद की। फिर भी, हर साल कई मिलियन डॉलर की सहायता के बावजूद अमेरिकी सरकार दोनों कुर्द दलों को अपने सशस्त्र बलों का पूरी तरह एकीकरण करने के लिए राज़ी नहीं कर सकी।

जिन बलों की बात हो रही है, वे तथाकथित 80 फ़ोर्सेज़ हैं, जो कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ी हैं, और 70 फ़ोर्सेज़, जो पैट्रियॉटिक यूनियन ऑफ़ कुर्दिस्तान से जुड़ी हैं। लेकिन एकीकरण की हालिया घोषणा से लगता है कि पुराने नामों की जगह सिर्फ़ नए नाम रख दिए गए हैं। 80 फ़ोर्सेज़ को अब एरिया वन कहा जाएगा और 70 फ़ोर्सेज़ का नाम बदलकर एरिया टू कर दिया गया है। इन दोनों एरिया के भीतर 11 डिवीज़न होंगे, जो पेशमर्गा मामलों के मंत्रालय की कमान में काम करेंगे। कुर्द अधिकारी भले ही इस पुनर्गठन को सुधार बताएं, हक़ीक़त अलग है: दोनों राजनीतिक दल नवगठित एरिया और उनके भीतर के डिवीज़नों पर अपना नियंत्रण बनाए हुए हैं। कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी छह डिवीज़नों को नियंत्रित करती है—जिनकी संख्या विषम है—जबकि शेष पाँच पर पैट्रियॉटिक यूनियन ऑफ़ कुर्दिस्तान का नियंत्रण है।

इस संदर्भ में इस घोषणा का समय अहम है, क्योंकि यह इराक़ से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के लिए तय 30 सितंबर की समयसीमा से महज़ कुछ हफ़्ते पहले आई है। रिपोर्टों के मुताबिक़, उस तारीख़ के बाद अमेरिकी सेना पेशमर्गा की मदद नहीं करेगी। इस पृष्ठभूमि में एकीकरण की घोषणा वॉशिंगटन को यह संकेत देती दिखती है कि पिछले कई वर्षों में किए गए उसके प्रयास व्यर्थ नहीं गए और 30 सितंबर की समयसीमा के बाद भी पेशमर्गा को अमेरिकी समर्थन जारी रखना उचित है।

इराक़ी कुर्दिस्तान में मौजूदा राजनीतिक गतिरोध भी पेशमर्गा के एकीकरण की वास्तविकता पर सवाल खड़े करता है। अक्तूबर 2024 के संसदीय चुनावों के बाद से दोनों सत्तारूढ़ दल नई सरकार नहीं बना पाए हैं, जिससे क्षेत्र की राजनीतिक संस्थाएँ काफी हद तक ठप पड़ी हैं। अगर दोनों दल सरकार गठन पर सहमति नहीं बना पा रहे हैं, तो यह समझना मुश्किल है कि उन्होंने सैन्य क्षेत्र में वास्तविक एकता कैसे हासिल कर ली होगी।

इराक़ी कुर्दिस्तान दशकों से हासिल अपनी स्वायत्तता धीरे-धीरे खो रहा है। बग़दाद, अंकारा और तेहरान क्षेत्र की स्वायत्त हैसियत को कमज़ोर करने के लिए अब पहले से ज़्यादा मिलकर काम कर रहे हैं। फिर भी, कुर्द स्वशासन के सामने मौजूद अस्तित्वगत ख़तरों का सामना करने के लिए सचमुच एकजुट होने के बजाय कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी और पैट्रियॉटिक यूनियन ऑफ़ कुर्दिस्तान राजनीतिक सत्ता की लड़ाई में उलझे हुए हैं। कोई भी दल पेशमर्गा बलों पर नियंत्रण छोड़ने की संभावना नहीं रखता, क्योंकि यही नियंत्रण उन्हें क्षेत्र की राजनीतिक शक्ति पर बड़ा दबदबा देता है। दशकों से यही हक़ीक़त रही है और जब तक इराक़ी कुर्दिस्तान अपनी स्वायत्तता बनाए रखता है, यह आगे भी जारी रहने वाली है।

इराक़ी कुर्दिस्तान के व्यापक घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि दोनों दल क्षेत्र की स्वायत्तता की रक्षा करने से ज़्यादा अपने-अपने प्रभाव क्षेत्रों को बचाए रखने पर केंद्रित रहे हैं। इसलिए, पेशमर्गा से जुड़ी हालिया घोषणा को वॉशिंगटन से लगातार वित्तीय समर्थन हासिल करने की एक और कोशिश से ज़्यादा कुछ मानना मुश्किल है।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: The Illusion of a Unified Peshmerga in Iraqi Kurdistan

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