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ईरानी प्रॉक्सी पर चोट: ट्रंप इराक़ी दूरसंचार में उनकी घुसपैठ को निशाना बनाएं

अल-ज़ैदी ने व्हाइट हाउस से ईरानी प्रभाव ख़त्म करने का वादा किया था, लेकिन उसके बाद से वे दोनों तरफ़ दांव लगा रहे हैं।

माइकल रुबिन ईरान, तुर्की और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका के विशेषज्ञ हैं। उनके करियर में पेंटागन में अधिकारी के तौर पर काम करने का अनुभव शामिल है। इसमें ईरान, यमन और इराक़ में ज़मीनी स्तर के अनुभव के साथ-साथ 9/11 से पहले तालिबान के साथ संपर्क भी रहा है। श्री रुबिन ने सैन्य शिक्षा में भी योगदान दिया है और अमेरिकी नौसेना तथा मरीन इकाइयों को क्षेत्रीय संघर्षों और आतंकवाद के बारे में पढ़ाया है। उनके विद्वतापूर्ण काम में कई अहम प्रकाशन शामिल हैं, जैसे “Dancing with the Devil” और “Eternal Iran।” रुबिन ने येल यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएच.डी. और एम.ए., तथा जीव विज्ञान में बी.एस. की डिग्री हासिल की।

A telecommunications tower.
एक दूरसंचार टावर। · Shutterstock

इराक़ में ईरान समर्थक मिलिशिया ने अपने हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ़ अमेरिकियों के ख़िलाफ़ आतंकवाद में ही नहीं किया, बल्कि उन इराक़ियों के विरुद्ध भी किया है जो पड़ोसी ईरान के हितों से ऊपर इराक़ के हितों को रखना चाहते हैं। व्हाइट हाउस, अमेरिकी विदेश मंत्रालय और अमेरिकी ख़ुफ़िया समुदाय बद्र कोर, असाइब अहल-ए अल-हक़ और कताइब हिज़्बुल्लाह जैसे उग्रवादी गुटों पर ध्यान देते हैं और प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी से इराक़ी संप्रभुता के ख़िलाफ़ उनकी गतिविधियों पर नकेल कसने को कहते हैं, लेकिन अक्सर उनका फ़ोकस सिर्फ़ उनकी सैन्य कार्रवाइयों तक सिमट जाता है और वे उन तरीक़ों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं जिनसे ये पैसे कमाते हैं या इराक़ी अर्थव्यवस्था में पैठ बनाते हैं।

इन पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फ़ोर्सेज़ (हश्द अल-शाबी) के पास जिस भी धार्मिक वैधता का दावा है, वह असल में चुराई हुई है। ग्रैंड आयतुल्लाह अली सिस्तानी का वह फ़तवा, जिसमें इराक़ियों से इस्लामिक स्टेट को हराने का आह्वान किया गया था, 2014 में आया था, लेकिन ईरान समर्थित मिलिशिया में से कुछ 1982 तक में बन चुकी थीं।

हालांकि, जैसे ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) है, वैसे ही ईरान समर्थित मिलिशिया भी जितनी सैन्य ताक़त हैं, उतनी ही कारोबारी समूह भी हैं। 1930 के दशक के शिकागो की तरह वे एक माफ़िया हैं, जो हथियारों के बल पर कुछ क्षेत्रों में एकाधिकार जमाना और इराक़ी अर्थव्यवस्था का गला घोंटना चाहते हैं।

विश्लेषक अक्सर इराक़ को तेल के चश्मे से देखते हैं, लेकिन ईरान समर्थित समूह और पार्टियां अक्सर दूसरे क्षेत्रों की ओर भी खिंची हैं—एक तो इसलिए कि ज़्यादा जनशक्ति की ज़रूरत वाले इन क्षेत्रों में संरक्षण बांटने की गुंजाइश बढ़ती है, और दूसरे इसलिए कि इनमें कमाई ज़्यादा है। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक़, 2023 से अब तक नाममात्र डॉलर के हिसाब से इराक़ का सकल घरेलू उत्पाद लगभग बीस गुना बढ़ चुका है, जो क़रीब 14 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है।

इराक़ के भीतर सबसे मुनाफ़ेदार क्षेत्रों में संचार भी शामिल है। इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने इराक़ को अलग-थलग रखा था। इराक़ की मुक्ति के बाद गठबंधन अंतरिम प्राधिकरण (Coalition Provisional Authority) और उसके चुने हुए संचार मंत्रालय ने जलाल तालाबानी के नियंत्रण वाली एशियासेल, इराक़ना नेटवर्क (जिसे मिस्र की ओरास्कॉम ने खड़ा किया था) और कुवैती स्वामित्व वाली ज़ैन को अस्थायी लाइसेंस जारी किए। क़तर टेलीकॉम, जिसे बाद में ऊरिडू नाम दिया गया, ने आख़िरकार एशियासेल में बहुसंख्यक हिस्सेदारी ख़रीद ली।

इराक़ के दोबारा संप्रभु बनने के बाद, संचार एवं मीडिया आयोग (Communications and Media Commission), जो तब एक स्वतंत्र निकाय था, लाइसेंस जारी करने लगा। 2007 से इराक़ी सरकार ने प्रक्रिया में बदलाव किया ताकि लाइसेंस संचार मंत्रालय जारी करे—सैद्धांतिक रूप से संचार एवं मीडिया आयोग की सिफ़ारिश के आधार पर। लेकिन व्यवहार में इसका मतलब यह निकला कि राजनीतिक संरक्षण को प्राथमिकता मिलने लगी, ख़ासकर तब, जब क़ानूनी पुनर्गठन के ज़रिए संचार एवं मीडिया आयोग को संसद के अधीन कर दिया गया। एशियासेल ने अपना लाइसेंस बनाए रखा, लेकिन भ्रष्टाचार से भरी प्रक्रिया में इराक़ी सरकार ने 2007 में ओरास्कॉम के लाइसेंस की जगह बरज़ानी परिवार के नियंत्रण वाली कंपनी कोरेक को नया लाइसेंस दे दिया। मसूद बरज़ानी के भतीजे सिरवान ने कोरेक के लाइसेंस के लिए अग्रिम राशि सार्वजनिक धन से दी और फिर कंपनी को निजी कंपनी की तरह चलाने लगे। 2022 में कोरेक का लाइसेंस समाप्त हो गया, लेकिन उसके भ्रष्टाचार वाले तरीक़ों के चलते आख़िरकार उसे 1.65 अरब डॉलर का मध्यस्थता मुक़दमा हारना पड़ा। भुगतान बक़ाया रहने पर अगस्त 2026 में इराक़ी सरकार ने कोरेक की संपत्तियां ज़ब्त करने का आदेश दिया।

कोरेक को लेकर इराक़ का अनुभव यह बताता है कि दुर्भावनापूर्ण ऑपरेटरों और संचार एवं मीडिया आयोग तथा संचार मंत्रालय की अपारदर्शी, और अक्सर भ्रष्ट, प्रक्रिया से कितना बड़ा ख़तरा पैदा हो सकता है।

ईरानी नेता इसी भ्रष्टाचार का इस्तेमाल इराक़ की सुरक्षा से समझौता करने और तेहरान के हितों को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं। 2014 से प्रधानमंत्रियों ने ऐसे संचार मंत्री नियुक्त किए जो ईरान के प्रति ज़्यादा झुकाव रखते थे। मिसाल के तौर पर, प्रधानमंत्री नूरी अल-मालिकी के उत्तराधिकारी हैदर अल-अबादी ने बद्र कोर के क़रीबी सहयोगी काज़ेम हसन राशिद को नियुक्त किया। काज़ेम के उत्तराधिकारी नईम अल-रुबैई की निष्ठा असाइब अहल-ए अल-हक़ के प्रति थी; हालांकि रुबैई ख़ुद को निर्दलीय बताते थे, असाइब उन्हें अपना बताता था। अगली मंत्री हयाम अल-यासिरी मालिकी के ईरान समर्थक स्टेट ऑफ़ लॉ समूह के प्रति जवाबदेह थीं। अल-ज़ैदी ने व्हाइट हाउस से वादा किया था कि वह ईरानी प्रभाव को उखाड़ फेंकेंगे, लेकिन उसके बाद से वह दोनों तरफ़ दांव लगाते रहे हैं। उनके संचार मंत्री मुस्तफ़ा जबर सनद हैं, जो निर्दलीय होने के बावजूद असाइब अहल-ए अल-हक़ और अन्य ईरान समर्थक शिया उग्रवादी समूहों के साथ खड़े दिखते हैं।

इराक़ी संचार में ईरान और मिलिशिया की यह घुसपैठ सिर्फ़ मोबाइल फ़ोन नेटवर्क तक सीमित नहीं, बल्कि इंटरनेट तक फैली हुई है। वेस्ट प्वाइंट के Combating Terrorism Center ने कारोबारी सलाहकार और वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट के फ़ेलो माइकल नाइट्स (Michael Knights) का एक लेख छापा, जिसमें कहा गया कि स्कोपस्काई (ScopeSky) इराक़ के उन गिने-चुने संचार नेटवर्कों में से है जो मिलिशिया के नियंत्रण में नहीं हैं, लेकिन लगता है कि उन्होंने बात उलटी समझ ली। एनकिडु (Enkidu) और सुपरसेल (Supercell) को मिलिशिया से जुड़ा बताना भी उनकी ग़लती थी। उनके फ़ुटनोट देखने पर समस्या यह दिखती है कि वे गुमनाम स्रोतों पर निर्भर हैं—कुछ के अपने एजेंडे हो सकते हैं और कुछ के पास उस बारे में सीधी जानकारी शायद हो ही नहीं, जिसका वे दावा करते हैं। जब एनकिडु और सुपरसेल ने—मुझे दिखाए गए पत्राचार के मुताबिक़—लेख वापस लेने का अनुरोध किया, तो Combating Terrorism Center और वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट ने उसे नज़रअंदाज़ कर दिया। अमीराती और अमेरिकी धन एनकिडु और सुपरसेल में निवेश करता है और उन्हें समर्थन देता है, जिससे वेस्ट प्वाइंट के Sentinel के आरोप अजीब लगते हैं।

हक़ीक़त यह है कि स्कोपस्काई और उसका साझेदार अर्थलिंक टेलीकम्युनिकेशंस—जिसका इराक़ी संस्करण अमेरिकी कंपनी अर्थलिंक से किसी तरह जुड़ा नहीं है—आज इराक़ के संचार नेटवर्क में मिलिशिया की घुसपैठ के बड़े ज़रिए नज़र आते हैं; कम से कम इस क्षेत्र के इराक़ियों का कहना यही है। मसलन, अर्थलिंक, संयुक्त अरब अमीरात में पंजीकृत होने के बावजूद, नियमित रूप से हिज़्बुल्लाह का प्रचार करती दिखती है।

स्कोपस्काई का संचालन नागरिकों के हाथ में है। प्रधानमंत्री अयाद अल्लावी के शासनकाल में जब इसकी स्थापना हुई, तब इससे कोई सुरक्षा ख़तरा नहीं था। लेकिन नूरी अल-मालिकी के दौर में कंपनी को तेज़ी से विस्तार के लिए सरकारी ठेके मिले और वह इराक़ की प्रमुख इंटरनेट सेवा प्रदाताओं में शामिल हो गई। इसका केंद्रीय चेहरा मुनाफ़ सुबैह अल-शेख़ली है। अल-शेख़ली और स्कोपस्काई—दोनों—पनामा पेपर्स में सामने आए थे, जो 2015 में 11.5 मिलियन वित्तीय और क़ानूनी दस्तावेज़ों का लीक था और जिसने उन लोगों को बेनक़ाब किया था जो दौलत छिपाने के लिए ऑफ़शोर शेल कंपनियों का इस्तेमाल करते थे।

मालिकी के पतन के बाद स्कोपस्काई बद्र कोर के और क़रीब चली गई और उसने हादी अल-आमिरी, पूर्व गृह मंत्री मोहम्मद अल-ग़बान और बद्र कार्यालय प्रमुख सैयद वहाब से रिश्ते बनाए। इराक़ में ईरान के राजदूत काज़ेम अल-सादेक़ ने और मदद दी, और अक़ील मेफ़तन ख़फ़ीफ़ अल-बैधानी ने भी, जिन पर अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 9 अक्टूबर 2025 को क़ुद्स फ़ोर्स की मदद के लिए वित्तीय और बैंकिंग नेटवर्क खड़े करने के आरोप में प्रतिबंध लगाए थे। जिनके नियंत्रण में इंटरनेट सेवा प्रदाता और मोबाइल फ़ोन सिस्टम होते हैं, वे इन नेटवर्कों को टैप कर सकते हैं और उनसे ख़ुफ़िया जानकारी निकाल सकते हैं।

यहां इराक़ अकेला नहीं है। यमन के प्रमुख मोबाइल फ़ोन नेटवर्क पर हूतियों का नियंत्रण सुरक्षा को लगातार कमज़ोर कर रहा है, यहां तक कि उन इलाक़ों में भी जो Internationally Recognized Government के नियंत्रण में हैं।

2018 में इराक़ी गृह मंत्री क़ासिम अल-अराजी ने, जो बद्र कोर के सदस्य थे, एक यूरोपीय कंपनी को ठेका दिया ताकि एक सुविधा केंद्र बनाया जा सके और राष्ट्रीय रजिस्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक ID प्रणाली के लिए उपकरण जुटाए जा सकें। इराक़ के भीतर अल-शेख़ली और असाइब अहल-ए अल-हक़ के क़ैस अल-ख़ज़ाली ने बार-बार स्कोपस्काई और अर्थलिंक को कामकाज के इराक़ी हिस्से में आगे बढ़ाने में मदद की और उनकी “तबादुल” भुगतान प्रणाली को ई-वीज़ा और इलेक्ट्रॉनिक ID प्रणाली का मंच बनाकर सुरक्षा से समझौता कराया।

ब्योरे मायने रखते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट जब ईरानी प्रभाव को काबू में करने और पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे हैं, तो ज़रूरी है कि वे ऐसी रणनीति का समर्थन करें जो उन दूरसंचार समूहों को मज़बूत करे और सहारा दे, जो किसी समझौते से इनकार करते हैं। इराक़ बदलती वफ़ादारियों और वित्तीय अपारदर्शिता का दलदल हो सकता है। कम से कम, अमेरिकी सरकार और अमेरिकी दूतावास को किसी ऐसे संचार नेटवर्क या कंपनी का समर्थन नहीं करना चाहिए, जिसके स्वामित्व, स्रोत और वास्तविक नियंत्रण को लेकर तस्वीर साफ़ और पारदर्शी न हो।

सबसे सुरक्षित रणनीति शायद उन कंपनियों का समर्थन करना हो—जैसे सुपरसेल, एनकिडु और टेली कोर आईटी सॉल्यूशंस (Tele Core IT Solutions)—जो मिलिशिया-घुसपैठ वाली कंपनियों के साथ साझेदारी को खुलकर नकारती हैं, अपने नेटवर्क में किसी भी चीनी घटक को शामिल करने से इनकार करती हैं और स्वेच्छा से ख़ुद को अमेरिकी क़ानून के अधीन रखती हैं। सुपरसेल और एनकिडु संयुक्त अरब अमीरात में पंजीकृत हैं और टेली कोर आईटी एक अमेरिकी कंपनी है।

कम से कम, अमेरिकी दूतावास और वॉशिंगटन के नीति-निर्माताओं को उनकी पारदर्शिता और संचालन को ऐसा मानक बनाना चाहिए, जिसका पालन स्कोपस्काई और अर्थलिंक से लेकर नुख़्बा FTTH तक—किसी भी प्रतिस्पर्धी नेटवर्क को—करना ही होगा। किसी भी अमेरिकी परियोजना को ऐसे किसी इराक़ी नेटवर्क को छूना या इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जो अपनी किताबें न खोले और अमेरिकी नियामकों से ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ मंज़ूरी न ले। अमेरिकी वित्त मंत्रालय इससे आगे बढ़ते हुए किसी भी ऐसे संचार मंत्री पर प्रतिबंध लगा सकता है, जो इराक़ी दूरसंचार में ईरानी घुसपैठ से लड़ने में पक्षपाती दिखे या फिर उससे निपटने में महज़ लापरवाह ही नज़र आए।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: To Combat Iranian Proxies, Trump Should Target Their Penetration of Iraqi Telecom

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