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तुर्की की युद्ध तैयारी के बीच कालिन के यूनान दौरे के मायने

तुर्की के ख़ुफ़िया प्रमुख ने यूनानी द्वीपों, इसराइल और पूर्वी भूमध्यसागर को लेकर एर्दोआन की माँगें पहुँचाईं।

क्रिस्टोस कोन्स्टैन्टिनिडिस एक पत्रकार हैं, Geopolitico.gr के प्रधान संपादक हैं, PontosVoice.com के सह-स्वामी हैं और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्ट्रैटेजी (International Institute of Strategy) के सदस्य हैं।

İbrahim Kalın, head of Turkey’s National Intelligence Organization.
तुर्की के राष्ट्रीय ख़ुफ़िया संगठन के प्रमुख इब्राहिम कालिन (İbrahim Kalın)। · Shutterstock

28 अगस्त 2026 को तुर्की के राष्ट्रीय ख़ुफ़िया संगठन (MİT) के प्रमुख इब्राहिम कालिन (İbrahim Kalın) बिना किसी पूर्व घोषणा के एथेंस पहुँचे, जहाँ उनकी मुलाक़ात अपने यूनानी समकक्ष—राष्ट्रीय ख़ुफ़िया सेवा (EYP) के निदेशक एमेरिटस थेमिस्तोक्लिस देमिरिस (Themistoklis Demiris)—से होनी थी। हालांकि, कालिन की मौजूदगी का महत्व तब और बढ़ गया, जब इसके बाद उन्होंने यूनानी प्रधानमंत्री क्यारियाकोस मित्सोताकिस (Kyriakos Mitsotakis) से मैक्सिमोस मैंशन में बंद कमरे में मुलाक़ात की, जो यूनानी प्रधानमंत्री कार्यालय का आधिकारिक निवास है।

इसके बाद तुर्की मीडिया ने कालिन के मिशन का मक़सद उजागर किया। सरकार समर्थक अख़बार येनी शफ़क (Yeni Şafak) ने बताया कि MİT प्रमुख ने एथेंस में “खुलकर और साफ़ तौर पर” बात की और चार संदेश दिए: तुर्की अपने रुख़ से पीछे नहीं हटेगा; वह यूनान को ईजियन और पूर्वी भूमध्यसागर में “तयशुदा हालात (faits accompli)” बनाने नहीं देगा; वह यूनानी द्वीपों की रक्षा-क्षमता मज़बूत किए जाने को स्वीकार नहीं करेगा; और वह इसराइल के साथ यूनान की रणनीतिक साझेदारी को “ग़लत रास्ता” मानता है। वस्तुतः यह तुर्की का अल्टीमेटम था।

दौरे का समय भी अहम था। यह ऐसे वक्त में हुआ जब यूनान और इसराइल “अकिलीज़ शील्ड” (Achilles Shield) नाम की बहुस्तरीय वायु और मिसाइल रक्षा प्रणाली पर एक समझौते को आगे बढ़ा रहे थे। इसी दौरान साइप्रस गणराज्य इसराइली निर्मित बराक MX प्रणालियों से अपनी रक्षा-क्षमता मज़बूत कर रहा है, जबकि यूनान, साइप्रस और इसराइल की रक्षा-ढालों के एकीकरण की संभावना एक बार फिर केंद्र में आ गई है।

तुर्की को ऐसी प्रतिरोधक संरचना का डर है, जो एथेंस, निकोसिया और यरुशलम को अलग-अलग धमकाने की उसकी क्षमता को सीमित कर दे। राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने यूनान से आग्रह किया कि वह द्वीपों पर नई हथियार प्रणालियाँ तैनात न करे, और जोड़ा कि इतिहास “उनके लिए बहुत अच्छा मार्गदर्शक है जो उससे सबक़ लेते हैं।” मित्सोताकिस ने जवाब दिया कि यूनान इस बारे में निर्देश स्वीकार नहीं करता कि उसे अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा कैसे करनी है।

कालिन एथेंस में “सद्भावनापूर्ण रवैये” की बात कर रहे थे, लेकिन तुर्की एक बड़े संघर्ष की आशंका के लिए तैयारियाँ जारी रखे हुए था। 40 कमांडो ब्रिगेड बनाने की उसकी योजना एक सैन्य चाप का रूप ले रही है, जो पूर्वी थ्रेस और अनातोलिया के तट से लेकर क़ब्ज़े वाले साइप्रस तक फैली है। इस बीच तुर्की के सभी 81 प्रांतों में शरणस्थलों और नागरिक सुरक्षा ढाँचे का निर्माण यह दिखाता है कि अंकारा युद्ध को कोई अमूर्त संभावना नहीं मानता।

हवाई मोर्चे पर तुर्की के एक अकिंजी (Akıncı) मानवरहित विमान ने उत्तरी ईजियन में तुर्की के ग़ैर-क़ानूनी समुद्री पार्क वाले इलाक़े के ऊपर—यूनानी द्वीपों समोथ्रेस और लेम्नोस के बीच—एक मिशन अंजाम दिया। और दक्षिण में, शोध पोत TÜBİTAK मारमारा कास्तेलोरिज़ो के पास तुर्की के दूसरे ग़ैर-क़ानूनी समुद्री पार्क के इलाक़े में दिखाई दिया, जिसका उद्देश्य इस यूनानी द्वीप को घेरना और उसके समुद्री अधिकारों को कमज़ोर करना है।

ग्रेट सी इंटरकनेक्टर (Great Sea Interconnector) अगला टकराव-बिंदु बन सकता है। फ़्रांस की कंपनी मेरिडियम (Meridiam) के साथ समझौते के बाद यूनान को ज़मीन पर यह साबित करना होगा कि मिस्र के साथ उसका सीमांकित विशेष आर्थिक क्षेत्र सिर्फ़ नक़्शों पर ही मौजूद नहीं है।

2024 की कासोस घटना ने दिखा दिया कि जब दृढ़ता की जगह तनाव बढ़ने का डर ले लेता है, तो क्या होता है। लगता है कि यूनानी सरकार को—देर से और चुनावी दबाव में—यह समझ आया है कि तुष्टिकरण ने तुर्की को नहीं बदला। इसने तो बस अंकारा को समय, जगह और यह भरोसा दिया है कि उसकी दबाव की रणनीति काम करती है।

क्रीट के दक्षिण में यूनान के प्रादेशिक समुद्र का विस्तार करने संबंधी प्रधानमंत्री के हालिया संदर्भ, और विदेश मंत्री जॉर्ज येरापेत्रित्सिस (George Gerapetritis) का यह रुख़ कि इसे 12 नॉटिकल मील तक बढ़ाना यूनान का अहस्तांतरणीय अधिकार है, सार्वजनिक बयानबाज़ी में बदलाव का संकेत देते हैं। हालांकि सवाल यह है कि क्या कार्रवाई, बयानबाज़ी के साथ चल पाएगी।

इस पृष्ठभूमि में अमेरिका को तय करना होगा कि वह किस तरह की क्षेत्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है: एक, जिसे यूनान, साइप्रस और इसराइल अंतरराष्ट्रीय क़ानून और परस्पर सुरक्षा की बुनियाद पर गढ़ रहे हैं; या दूसरी, जिसे तुर्की धमकियों, ग़ैर-क़ानूनी नक़्शों और सैन्य तयशुदा हालात (faits accompli) के ज़रिए थोपने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिकी राजदूत और कारोबारी टॉम बैरक (Tom Barrack) की यह कोशिश कि गोल्डन ग्लोबल यातिरिम बैंकासी (Golden Global Yatırım Bankası)—वह बैंक जिसने ईरान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़े लेन-देन में मदद की—पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को ऐसी कार्रवाई के रूप में पेश किया जाए, जिसे तुर्की को निशाना बनाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, वॉशिंगटन के वास्तविक सहयोगियों को ग़लत संदेश देती है।

यूनान अपने पीछे हटने की क़ीमत चुका चुका है: 1974 में साइप्रस, 1996 में इमिया, और ड्यूटी के दौरान कई पायलटों की जान। यह सिलसिला अब ख़त्म होना चाहिए। शांति द्वीपों को रक्षाविहीन छोड़कर या यूनानी अधिकारों के इस्तेमाल के लिए तुर्की से इजाज़त माँगकर हासिल नहीं होती; वह ताक़त, गठबंधनों और संकल्प से हासिल होती है।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: What Kalın’s Visit to Greece Means as Turkey Prepares for War

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