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ईरान के नाकाम अर्थशास्त्र प्रमुख की नियुक्ति के पीछे कौन

एहसान ख़ानदोज़ी में ऐसे गुण हैं जो तेहरान में अर्थशास्त्र की समझ से ज़्यादा मायने रख सकते हैं।

पॉटकिन अज़ारमेहर मूल रूप से ईरान से ताल्लुक़ रखने वाले ब्रिटिश खोजी पत्रकार और वृत्तचित्र निर्माता हैं। उन्होंने विभिन्न मीडिया संस्थानों और नीति अनुसंधान संस्थाओं के लिए योगदान दिया है, जहां उन्होंने मध्य-पूर्व के मामलों और पश्चिम में इस्लामी चरमपंथ का गहन विश्लेषण पेश किया है।

Ehsan Khandouzi, Iran's minister of economics.
एहसान ख़ानदोज़ी, ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री। · Photo: Meghdad Madadi, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons

इस्लामी गणराज्य ईरान पिछले 47 वर्षों से पाठ्यपुस्तक जैसा धर्मतंत्र रहा है। यह पूरी तरह काकिस्टोक्रेसी (kakistocracy) भी रहा है, यानी सबसे कम योग्य, सबसे कम सक्षम और अक्सर सबसे बेईमान लोगों का शासन। ताज़ा नियुक्ति—जिसका श्रेय ‘ग़ैर-मौजूद’ सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई को दिया जा रहा है—इसी का उदाहरण है।

ख़बरों के मुताबिक़ मोजतबा ने सर्वोच्च नेता के दफ़्तर के समीक्षा उप-प्रमुख कार्यालय के आर्थिक मामलों के कार्य समूह के प्रमुख—और सर्वोच्च नेता के दफ़्तर में सबसे लंबे समय तक रहे लोगों में से एक—अली आग़ा-मोहम्मदी (Ali Agha-Mohammadi) की जगह एहसान ख़ानदोज़ी (Ehsan Khandouzi) को नियुक्त किया है। इस पद का बोझिल-सा नाम दरअसल ईरान की आर्थिक मशीनरी के ‘दिल’ को बताता है, जो सर्वोच्च नेता की निगरानी में काम करने वाले आर्थिक कार्टेलों की निवेश नीति पर नज़र रखता है।

आग़ा-मोहम्मदी अली ख़ामेनेई के आर्थिक सलाहकार थे और उन्होंने एक के बाद एक कई असरदार पदों पर काम किया। उनके करियर में एक फ़ुटबॉल क्लब चलाना और ईरान के सरकारी टेलीविज़न में उप-प्रमुख बनना भी शामिल रहा। लेकिन सबसे बढ़कर, आग़ा-मोहम्मदी अली ख़ामेनेई के आर्थिक साम्राज्य के “दरबारी कोषाध्यक्ष” थे।

सर्वोच्च नेता की निगरानी में चलने वाले इन कार्टेलों ने ईरान की अर्थव्यवस्था के बहुत बड़े हिस्सों को निगल लिया है। अकेले ख़ामेनेई के आर्थिक कार्टेल शायद देश की 60 प्रतिशत संपत्ति पर क़ब्ज़ा रखते हैं, जबकि उनके दफ़्तर से जुड़ी कंपनियों के बारे में कहा जाता है कि वे ईरान के सकल घरेलू उत्पाद का 50 प्रतिशत हिस्सा हैं।

इस जवाबदेही-रहित आर्थिक साम्राज्य को चलाने में आग़ा-मोहम्मदी की भूमिका अहम रही, जिसकी सत्ता और पूंजी तक विशेषाधिकार प्राप्त पहुँच ने प्रतिस्पर्धा को बाहर धकेल दिया और ईरान की व्यापक अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता को कमज़ोर कर दिया। उनका उभार योग्यता से कम और राजनीतिक आज्ञाकारिता से ज़्यादा जुड़ा था।

तो फिर उनकी जगह एहसान ख़ानदोज़ी को क्यों लाया गया?

अगर कसौटी योग्यता होती, तो जवाब ख़ानदोज़ी के रिकॉर्ड में ढूंढना मुश्किल होता। ख़ानदोज़ी पूर्व राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी (Ebrahim Raisi) के कार्यकाल में अर्थमंत्री रहे। ख़ानदोज़ी के दौर में ईरानी मुद्रा तेज़ी से गिरी और ज़रूरी वस्तुओं व रोज़मर्रा की ज़रूरतों की क़ीमतें बढ़ीं।

ईरानी अर्थशास्त्री मसूद नीली (Masoud Nili) ने ख़ानदोज़ी के कार्यकाल के दौरान गंभीर विदेशी मुद्रा असंतुलन, आयात मात्रा में अभूतपूर्व रिकॉर्ड, और भुगतान संतुलन में अरबों डॉलर की “त्रुटियों और लापता सांख्यिकीय मदों”—11.3 अरब डॉलर—की ओर इशारा किया।

ख़ानदोज़ी ईरान के फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (Financial Action Task Force) में शामिल होने और सदस्यता की मांग के मुताबिक़ अधिक पारदर्शिता के भी कट्टर विरोधी हैं। इसके बजाय, उन्होंने अलग-अलग बहानों से सार्वजनिक बजट में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) का हिस्सा बढ़ाया और जनता से ज़्यादा कर वसूलने की नीति अपनाई।

अली ख़ामेनेई तक पहुँचने वाली ख़ानदोज़ी की आर्थिक रिपोर्टों की गुणवत्ता भी शायद ही बेहतर थी। ख़ामेनेई ने इन रिपोर्टों को “खोखली और बेतुकी” कहकर ख़ारिज कर दिया। फिर भी, ख़ानदोज़ी में ऐसे गुण हैं जो तेहरान में अर्थशास्त्र और बुनियादी गणित समझने की क्षमता से कहीं ज़्यादा अहम माने जा सकते हैं। वे चीन के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक रिश्तों के समर्पित पैरोकार हैं और उन्होंने पेज़ेशकियान सरकार से आग्रह किया है कि वह ईरान की अर्थव्यवस्था को और मज़बूती से बीजिंग के हवाले कर दे। 40 दिन के युद्ध की शुरुआत के बाद उन्होंने दो रुख़ अपनाए: चीन की प्रशंसा और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद रखने का समर्थन।

ख़ानदोज़ी की नियुक्ति का मक़सद किसी सक्षम अर्थशास्त्री को कमान सौंपना कम, और सर्वोच्च नेता की आर्थिक मशीनरी के केंद्र में एक भरोसेमंद राजनीतिक ऑपरेटिव को बैठाना ज़्यादा लगता है। उनका काम इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के हितों की हिफ़ाज़त करना और ख़ामेनेई के कार्टेलों में उनका हिस्सा बढ़ाना है। हालांकि, इस नियुक्ति पर एक बड़ा सवाल भी टिका है।

37 वर्षों से ख़ामेनेई के आर्थिक साम्राज्य की वास्तविक गतिविधियाँ और आँकड़े इस्लामी गणराज्य के सबसे कड़े पहरे वाले रहस्यों में रहे हैं, जिन्हें सिर्फ़ सर्वोच्च नेता के दफ़्तर के समीक्षा उप-प्रमुख कार्यालय का आर्थिक मामलों का कार्य समूह ही जानता है। ख़ानदोज़ी की नियुक्ति का श्रेय मोजतबा को दिया गया है, लेकिन यह अभी साफ़ नहीं है कि बदलाव का आदेश किसने दिया। जवाब साफ़ नहीं है, लेकिन यह ज़रूर बताता है कि देश किस दिशा में जा रहा है।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Who’s Behind the Appointment of Iran’s Incompetent Economics Chief?

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