क्या कुवैत युवाओं को सत्ता से दूर रख सकता है?
कुवैत को युवाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करने के साथ ऐसी संस्थाएँ भी बनानी होंगी जहाँ वे वास्तव में नेतृत्व कर सकें।
राधिका लक्ष्मीनारायणन शोधकर्ता और इतिहासकार हैं, जिन्होंने 3 दशकों से अधिक समय तक कुवैत और भारत की अग्रणी संस्थाओं के साथ काम किया है। वे Small States Security Dilemma—Kuwait after 1991 की लेखिका हैं।

कुवैत एक युवा देश है, जहां उसके ज़्यादातर नागरिकों की उम्र 35 साल से कम है। कुवैत युवाओं की शिक्षा पर अरबों डॉलर निवेश करता है। शिक्षित, डिजिटल रूप से जुड़े और उद्यमिता, पेशेवर नेटवर्क, स्वयंसेवा और सार्वजनिक बहस में सक्रिय युवा कुवैती अपने देश का भविष्य गढ़ने की क्षमता और महत्वाकांक्षा रखते हैं। हालांकि राजनीतिक संस्थानों, आर्थिक प्राथमिकताओं और वरिष्ठ नियुक्तियों पर उनका असर अब भी सीमित है। असली चुनौती सिर्फ़ युवाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करने की नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान बनाने की है जो उन्हें नेतृत्व करने की गुंजाइश दें।
कुवैत विश्वविद्यालय के छात्र चुनाव नियम शैक्षणिक पात्रता को नियंत्रित करते हैं और प्रचार के लिए स्थलों, कार्यक्रमों और सामग्री पर पहले से मंज़ूरी की शर्त रखते हैं। सितंबर 2024 में विश्वविद्यालय ने, सार्वजनिक विश्वविद्यालय परिषद (Council of Public Universities) के निर्देश पर, अनियमितताओं की शिकायतों के बाद सार्वजनिक उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र चुनाव स्थगित करने की घोषणा की। परिषद ने छात्रों को इसके बजाय वैज्ञानिक, खेल, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने को कहा। ये गतिविधियां कौशल तो विकसित करती हैं, लेकिन चुनाव, प्रचार, गठजोड़ बनाने और जवाबदेही के अनुभव की जगह नहीं ले सकतीं। ऐतिहासिक रूप से छात्र चुनाव युवा कुवैतियों को राजनीतिक धाराओं पर बहस करने, परस्पर विरोधी हितों के बीच समझौता करने और अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट करने का अवसर देते थे। चुनाव स्थगित होने से राजनीतिक भागीदारी का एक रास्ता संकरा हो गया है।
डिजिटल मंच युवा कुवैतियों को आवास, रोज़गार, सार्वजनिक सेवाओं और राजनीतिक सुधार पर चर्चा का मंच देते हैं, लेकिन जब यह आलोचना उन क़ानूनी सीमाओं से आगे निकल जाती है जिन्हें राज्य बहुत संवेदनशील मानता है, तब ऑनलाइन भागीदारी क़ानूनी जोखिम भी पैदा कर सकती है। इससे पैदा होने वाली अनिश्चितता आत्म-सेंसरशिप को बढ़ावा देती है और युवाओं को फ़ैसलों पर सवाल उठाने, सामूहिक रूप से संगठित होने या जवाबदेही मांगने से हतोत्साहित करती है, जिससे नागरिक सहभागिता और संस्थागत भरोसा कमजोर होता है।
राजनीतिक भागीदारी नेटवर्क, जानकारी, संसाधनों और निर्णयकर्ताओं तक पहुंच पर भी निर्भर करती है। स्थापित राजनीतिक परिवार, कारोबारी हित, सामाजिक रिश्ते और प्रशासनिक पदानुक्रम मार्गदर्शन और पेशेवर अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। औपचारिक राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति और एकल-अहस्तांतरणीय-मत (single-non-transferable-vote) प्रणाली व्यक्ति-केंद्रित प्रचार को बढ़ावा देती है। लेकिन ऐसे स्थापित नेटवर्क से वंचित युवा पेशेवरों को अक्सर संरचनात्मक नुकसान झेलना पड़ता है।
आर्थिक असमानताएं इन नुकसानों को और गहरा करती हैं। प्रचार के लिए संसाधनों की ज़रूरत होती है—समर्थक आधार बनाने, मतदाताओं को संगठित करने और स्थापित नेटवर्कों से मुकाबला करने के लिए। संपन्न परिवार, क़बीलाई नेटवर्क और एकजुट राजनीतिक गुट, गरीब पृष्ठभूमि वाले स्वतंत्र उम्मीदवारों की तुलना में संसाधन और समर्थन जुटाने में कहीं अधिक प्रभावी होते हैं। 2024 में मौजूदा सांसदों के दोबारा चुने जाने की ऊंची दर भी दिखाती है कि मौजूदा राजनीतिक और वित्तीय बढ़त किस तरह खुद को दोहराती रहती है। मुद्दा राजनीतिक संसाधनों तक असमान पहुंच का है, जो भागीदारी को नए विचारों, योग्यता और जन समर्थन की प्रतिस्पर्धा के बजाय धन और संपर्कों का विशेषाधिकार बना देती है। कुवैत पर हालिया शोध सामाजिक वर्ग को राजनीतिक भागीदारी का बड़ा निर्धारक बताते हैं और खर्च की सीमा, पारदर्शी चुनावी वित्त और मज़बूत चुनावी निगरानी की ज़रूरत की ओर संकेत करते हैं।
कुवैत में युवा विकास के लिए कई संगठन हैं, जिनमें लोयाक (Loyac), इंजाज़ कुवैत (INJAZ Kuwait) और कुवैत यूथ काउंसिल (Kuwait Youth Council) शामिल हैं, जो उद्यमिता, नेतृत्व और रोज़गार-योग्यता को बढ़ावा देते हैं। हालांकि ऐसे प्रयास एक मूल्यवान आधार तैयार करते हैं, लेकिन युवाओं को नीति-निर्माण पर सार्थक प्रभाव डालने के मौके चाहिए। 10 मई 2024 को कुवैत ने अपनी राष्ट्रीय असेंबली भंग कर दी और संविधान के कई प्रावधान स्थगित कर दिए। सरकार ने इन उपायों को संस्थागत गतिरोध दूर करने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए उचित ठहराया। यह तर्क जायज़ हो सकता है, लेकिन युवाओं के लिए इसने चुनावी प्रतिनिधित्व के ज़रिए क़ानून-निर्माण को प्रभावित करने के औपचारिक अवसर घटा दिए। युवा कुवैती महिलाओं के मामले में चुनौतियां पुरुष-प्रधान राजनीतिक नेटवर्क, सांस्कृतिक अपेक्षाओं और संस्थागत बाधाओं के बीच रास्ता निकालने तक फैली हैं। युवा भागीदारी में ऐसी बाधाएं समावेशी शासन और टिकाऊ विकास को कमजोर करने का जोखिम पैदा करती हैं।
1991 में अमेरिका के नेतृत्व में हुई कुवैत की मुक्ति ने साझा सुरक्षा हितों पर आधारित साझेदारी को मज़बूत किया। हालांकि कुवैत के उन युवाओं में यह भावनात्मक जुड़ाव कम हो सकता है, जो अब कुवैती तेल, जल और हवाई अड्डा ढांचे के साथ-साथ कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी जवाबी हमले देख रहे हैं। इससे वॉशिंगटन के लिए ज़रूरी हो जाता है कि वह कुवैत के अभिजात, वरिष्ठ राजनीतिक और सुरक्षा वार्ताकारों से आगे बढ़कर अपना जुड़ाव बढ़ाए। उसे अधिक विश्वविद्यालयी आदान-प्रदान कार्यक्रमों, तकनीकी सहयोग, साइबर सुरक्षा साझेदारियों, उद्यमिता कार्यक्रमों और पेशेवर नेटवर्कों के ज़रिए युवाओं से जुड़ने के अवसर बढ़ाने होंगे।
कुवैत के लिए मौजूदा संघर्ष उसकी भू-रणनीतिक और भू-आर्थिक कमज़ोरियों, और सीमित तटस्थता की हदों को रेखांकित करता है। आगे का रास्ता एक अधिक टिकाऊ दृष्टिकोण की ओर संकेत करता है, जिसमें मापे जा सकने वाले सुधार, स्कूल से रोज़गार तक मज़बूत रास्ते, और ऐसे औपचारिक तंत्र शामिल हों जिनके ज़रिए युवा पेशेवर सार्वजनिक नीति को आकार दे सकें और उसका मूल्यांकन कर सकें—राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं और पीढ़ीगत आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाते हुए। कुवैत के युवाओं को “मेज़ पर एक कुर्सी” चाहिए। सवाल यह नहीं है कि युवा कुवैती नेतृत्व कर सकते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि संरक्षणवाद और जड़ जमा चुके नेटवर्कों से गढ़ी गई राजनीतिक व्यवस्था उन्हें सत्ता में हिस्सेदारी के लिए जगह देगी या नहीं।
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