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गर्भवती मंगेतर को वाहक बनाकर एल अल विमान में बम रखने की कोशिश करने वाले को ब्रिटेन ने कैसे रिहा किया

पैरोल बोर्ड ने नज़र हिंदावी की रिहाई मंज़ूर की और 2013 में वह बिना किसी लाइसेंस शर्त के जेल से बाहर आ गया।

An El Al Boeing 737-800 jetliner prepares to land at Tel Aviv Ben Gurion Airport.
एल अल का एक बोइंग 737-800 विमान तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उतरने की तैयारी में। · Shutterstock

इस हफ़्ते उस घटना को 40 साल पूरे हो रहे हैं, जब एक ब्रिटिश अदालत ने जॉर्डन के नागरिक नेज़ार हिंदावी (Nezar Hindawi) को क़रीब 370 लोगों को ले जा रहे एल अल विमान को उड़ाने की कोशिश का दोषी ठहराया था। उसे 45 साल की सज़ा सुनाई गई, जो उस समय किसी ब्रिटिश अदालत द्वारा दी गई अब तक की सबसे लंबी निश्चित अवधि की सज़ा थी। यह वर्षगांठ यूं ही बीत जाती, अगर ब्रिटिश सरकार यह स्वीकार न करती कि हिंदावी को 2013 में, पूरी सज़ा से 18 साल पहले, बिना किसी लाइसेंस शर्तों के, बिना निगरानी और बिना किसी औपचारिक घोषणा के रिहा कर दिया गया था। पैरोल के समय इसका एक मामूली ज़िक्र ज़रूर हुआ था, लेकिन यह मामला दिखाता है कि सुर्ख़ियां ठंडी पड़ने के बाद ब्रिटेन आतंकवादियों से कैसे निपटता है: मंत्री के फ़ैसले से नहीं, बल्कि अंधेरे में लिपटी एक प्रक्रिया के ज़रिए।

17 अप्रैल 1986 को हीथ्रो पर एल अल के सुरक्षा कर्मचारियों ने ऐन-मैरी मर्फ़ी (Ann-Marie Murphy) को रोका, जो आयरलैंड की एक चैंबरमेड थीं और छह महीने की गर्भवती थीं। उन्हें यक़ीन था कि वह हिंदावी से शादी करने के लिए तेल अवीव जा रही हैं। उनका बैग हवाई अड्डे की एक्स-रे जांच से गुज़र चुका था। एल अल के एक अधिकारी को उसका वज़न खटका और उसने बैग दोबारा खोला, जहां एक नक़ली पैनल के पीछे क़रीब तीन पाउंड सेमटेक्स मिला, जिसे एक कैलकुलेटर-डेटोनेटर से जोड़ा गया था और जो उड़ान के क़रीब पांच घंटे बाद फटने के लिए सेट था। मुक़दमे में मर्फ़ी ने बताया कि बैग हिंदावी ने ख़ुद पैक किया था और हवाई अड्डे जाने वाली टैक्सी में बैटरी लगाई थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि हिंदावी सीरियाई सरकार के एजेंट के रूप में काम कर रहा था, और 24 अक्तूबर 1986 को, जिस दिन उसे सज़ा सुनाई गई, ब्रिटेन ने सीरिया से राजनयिक संबंध तोड़ लिए। उस पर मुक़दमा चलाने वाले अभियोजक रॉय ऐमलॉट केसी (Roy Amlot KC) ने मुझसे कहा, “मैंने कई शैतान हत्यारों, या हत्या करने की कोशिश करने वालों पर मुक़दमा चलाया है, लेकिन मेरे ख़याल से वह सबसे बुरा था।” उन्होंने 45 साल की सज़ा को “सही सज़ा” बताया, जो “आज भी वैसी ही होती या पूरी ज़िंदगी की सज़ा हो सकती थी।”

इस कहानी में मेरा भी एक दांव जुड़ा है। बम मिलने से कुछ दिन पहले मैंने अर्ल्स कोर्ट में हिंदावी परिवार के फ़्लैट में रविवार का भोजन किया था, जहां मेरी गर्लफ़्रेंड औ पेयर (au pair) के तौर पर काम कर रही थी। नेज़ार शिष्ट, धीमी आवाज़ में बोलने वाला, लगभग संकोची था, और उसने मुझसे पूछा कि पत्रकार कैसे बना जाता है। यह कहानी तब से मेरा पीछा करती रही है।

दोनों दलों के मंत्रियों ने उसे जेल में बनाए रखने के लिए संघर्ष किया। कोर्ट ऑफ़ अपील ने सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की अनुमति देने से इनकार कर दिया था; लॉर्ड चीफ़ जस्टिस, लॉर्ड लेन ने इस अपराध को “इतना घिनौना और इतना भयावह अपराध जितना कल्पना में आ सकता है” बताया। हिंदावी अप्रैल 2001 में पैरोल के योग्य हो गया, लेकिन चूंकि नवंबर 2000 में जारी एक निर्वासन आदेश उस पर लागू था, जिसके ख़िलाफ़ कभी अपील नहीं की गई, इसलिए पैरोल बोर्ड के बजाय सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट ने उसके मामले की समीक्षा की और हर बार रिहाई से इनकार किया। 2009 में, पैरोल बोर्ड ने रिहाई और जॉर्डन निर्वासन की सिफ़ारिश की। न्याय मंत्री (जस्टिस सेक्रेटरी) जैक स्ट्रॉ ने इस सिफ़ारिश को ख़ारिज कर दिया, और उनके उत्तराधिकारी केन क्लार्क ने भी इस इनकार को बरक़रार रखा।

फिर क़ानून बदल गया। 2 अगस्त 2010 से, कोरोनर्स ऐंड जस्टिस ऐक्ट 2009 ने पैरोल बोर्ड के फ़ैसलों को न्याय मंत्री (जस्टिस सेक्रेटरी) पर बाध्यकारी बना दिया। उसके बाद के वर्षों में बोर्ड की समितियों ने रिहाई से इनकार किया, और दिसंबर 2012 में एक और चुनौती हाई कोर्ट पहुंची, जिसने पाया कि बोर्ड यह विचार करने में नाकाम रहा था कि अगर उसे वापस भेजा गया तो जॉर्डन के अधिकारी क्या प्रतिक्रिया देंगे। बोर्ड ने रिहाई मंज़ूर कर दी और 2013 में हिंदावी बिना किसी लाइसेंस शर्तों के जेल से बाहर आ गया, जिसकी पुष्टि होम ऑफ़िस करता है।

तारीख़ों से ज़्यादा अहम पैटर्न है। मंत्रियों ने हिंदावी को जेल में बनाए रखने की कोशिश में वर्षों बिताए और हार गए, पहले अदालत में और फिर क़ानून के ज़रिए। जैसे ही यह अधिकार पैरोल बोर्ड के पास गया, हालात बदल गए। क़ानून उसी तरह काम कर रहा था, जैसा संसद ने उसे गढ़ा था। जो उसमें ज़रूरी नहीं था, वह थी जनता को कोई सफ़ाई देने की बाध्यता।

यहीं से ख़ामोशी शुरू होती है। मैंने मिनिस्ट्री ऑफ़ जस्टिस से पूछा कि हिंदावी को कब रिहा किया गया; उसने कहा कि यह होम ऑफ़िस का मामला है। होम ऑफ़िस ने कहा कि वह व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं करता। नेशनल आर्काइव्स ने, क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस से परामर्श करके, अभियोजन फ़ाइल (रिकॉर्ड DPP 2/9898) के लिए मेरे फ्रीडम ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशन (Freedom of Information) अनुरोध को ठुकरा दिया, और धारा 38(1)(b) की सुरक्षा छूट तथा धारा 40(2) की व्यक्तिगत-डेटा छूट का हवाला दिया, साथ ही गवाहों के ख़िलाफ़ प्रतिशोध के ख़तरे की चेतावनी दी। अभियोजन फ़ाइलें 2069 और 2071 तक बंद हैं।

होम ऑफ़िस ने तभी जवाब दिया, जब मैंने उसे बताया कि मैंने क़ानूनी सलाह ली है—कि अभियोजन फ़ाइल रोक रखने से उसे रिहाई का वर्ष या लाइसेंस शर्तें बताने से कोई रुकावट नहीं है। तब उसने पुष्टि की कि हिंदावी को 2013 में, बिना शर्तों के रिहा किया गया था। उसने यह बताने से इनकार कर दिया कि निर्वासन आदेश के तहत उसे जॉर्डन भेजा गया या नहीं, और कब। ज़ाहिर है, विभाग फ़ाइल और तथ्य के बीच का फ़र्क़ अच्छी तरह समझता है।

कैंपेन फ़ॉर फ़्रीडम ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशन (Campaign for Freedom of Information) के निदेशक मॉरिस फ़्रैंकेल (Maurice Frankel) खुलकर बोले। उन्होंने मुझसे कहा कि किसी व्यक्ति के ठिकाने के बारे में अनुरोध व्यक्तिगत-डेटा छूट के तहत लगभग तय है कि नाकाम होगा, और साज़िश की प्रकृति को देखते हुए, “यह मुमकिन है कि ख़ुद उसकी जान को ख़तरा हो,” जिससे सुरक्षा छूट लागू हो जाएगी। उन्होंने जोड़ा कि सुरक्षा और ख़ुफ़िया सेवाएं फ्रीडम ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशन अनुरोधों के दायरे से बाहर हैं और उनसे प्राप्त सामग्री छूट प्राप्त है: “इन क्षेत्रों में, गोपनीयता व्यवस्था में ही गूंथी हुई है।”

गवाहों को लेकर आर्काइव्स की आशंका वास्तविक हो सकती है, लेकिन यह उन दो एल अल अधिकारियों के संदर्भ में अटपटा लगता है जिन्होंने बम खोजा था और जिन्होंने 2021 में इसराइली चैनल 13 के एक इंटरव्यू में ख़ुद अपनी पहचान ज़ाहिर की थी।

तीन सवाल अब भी अनुत्तरित हैं: हिंदावी की रिहाई का समय किसने तय किया, राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के दोषी व्यक्ति ने बिना किसी लाइसेंस शर्तों के जेल क्यों छोड़ी, और क्या तथा कब उसने ब्रिटेन छोड़ा। ये सवाल इस बात के केंद्र में हैं कि कोई राज्य उन आतंकवादियों से कैसे निपटता है जिन्हें वह अब क़ैद में नहीं रख सकता। जब सरकार जवाब ही नहीं देगी, तो जनता उन जवाबों को परख कैसे सकती है।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: How Britain Freed the Man Who Tried to Bomb an El Al Jet Using His Pregnant Fiancée as a Courier

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