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लेबनानी कुलों की मदद से बर्लिन विधायिका में अति-वामपंथ को सीटें

कथित अपराध सरगनाओं और फ़लस्तीनी आतंक समर्थकों ने जीत के जश्न में हिस्सा लिया।

Berlin’s House of Representatives where Die Linke seeks greater political influence with the help of Lebanese clans.
बर्लिन की प्रतिनिधि सभा, जहाँ डी लिंके लेबनानी कुलों की मदद से अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना चाहती है। · (Shutterstock)

20 सितंबर को जर्मनी की अति-वामपंथी पार्टी डी लिंके (Die Linke) ने बर्लिन राज्य संसद चुनावों में 25.7 प्रतिशत वोट हासिल कर पहला स्थान पाया। सत्तारूढ़ क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स (CDU) को 18.8 प्रतिशत और उभरती दक्षिणपंथी अल्टरनेटिव फ़ॉर जर्मनी (AfD) को 16.3 प्रतिशत वोट मिले। बर्लिन की दीवार पर सैनिकों के लोगों पर गोली चलाना बंद किए जाने के 37 साल बाद, पूर्वी जर्मनी की पूर्व कम्युनिस्ट पार्टी की क़ानूनी उत्तराधिकारी पार्टी के लिए यह चौंकाने वाली सफलता है।

जीत के उत्साह में डी लिंके के नेताओं ने शुरुआत में अरब आपराधिक कुलों के सदस्यों और फ़लस्तीनी आतंक समर्थक कार्यकर्ताओं का अपने चुनावी जश्न में स्वागत किया। जर्मन समाचार साइट t-online.de के अनुसार, एक व्यक्ति, बर्लिन के कुल सरगना ईसा रेम्मो (Issa Remmo) को वहाँ से जाने के लिए कहा गया। इसके बावजूद, इसके बाद खड़े हुए विवाद ने डी लिंके की उस कोशिश पर रोशनी डाली, जिसमें घर-घर जाकर प्रचार के ज़रिए प्रवासी और इस्लामवादी वोटों को लामबंद करने का प्रयास किया गया था। यह अभियान मॉरिस कैट्ज़ (Morris Katz) की सलाह पर चल रहा था, जो न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी के चुनाव रणनीतिकार रहे हैं।

डी लिंके के बुंडेसटाग सदस्य फ़ेरात कोचाक (Ferat Koçak), जो जर्मनी में सबसे कट्टर इसराइल-विरोधी आवाज़ों में से एक हैं और बर्लिन में फ़लस्तीन समर्थक रैलियों में हिस्सा लेते रहे हैं—जिनमें फ़रवरी 2025 में जेरेमी कॉर्बिन के साथ हुई एक रैली भी शामिल है—चुनावी पार्टी की एक तस्वीर में यूनाइटेड फ़लस्तीनी नेशनल कमेटी (United Palestinian National Committee) के प्रतिनिधि इब्राहिम इब्राहिम के साथ दिखाई दिए।

Jüdische Allgemeine ने ख़बर दी कि बर्लिन के संविधान संरक्षण कार्यालय ने यूनाइटेड फ़लस्तीनी नेशनल कमेटी को हमास और पॉपुलर फ़्रंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ फ़लस्तीन (PFLP) के बीच सहयोग का मंच बताया है—ये दोनों संगठन 7 अक्टूबर, 2023 के नरसंहारों में शामिल थे। जर्मन समाचार माध्यम Der Tagesspiegel के अनुसार, इब्राहिम ने 7 अक्टूबर के मास्टरमाइंड याह्या सिनवार को “अडिग नेता” और “शहीद नायक” बताते हुए उनका महिमामंडन किया।

वामपंथ और गिरोह

शक्तिशाली लेबनानी रेम्मो कुल के मुखिया ईसा रेम्मो भी वहाँ मौजूद थे। इस कुल पर कई आपराधिक मामलों में संलिप्तता के आरोप हैं, जिनमें 2017 में बर्लिन के बोडे म्यूज़ियम से 220 पाउंड वज़नी “बिग मेपल लीफ़” सोने का सिक्का चुराने और 2019 में ड्रेसडेन की ग्रीन वॉल्ट में हुई आभूषण डकैती शामिल है। जब पार्टी में रेम्मो की मौजूदगी की तस्वीरें सार्वजनिक हुईं, तो कोचाक ने पहले दावा किया कि वे नहीं जानते कि रेम्मो कौन हैं। इस अपराध सरगना के बेटे फ़िरास रेम्मो ने कोचाक के साथ हुई चैट प्रकाशित कर इस भटकाव का पर्दाफ़ाश कर दिया, जिससे साबित हुआ कि वामपंथी दल की चुनावी पार्टी में इन गिरोहबाज़ों की मौजूदगी कोई संयोग नहीं थी: “आपके पिता को नमस्कार और सलाम। आप अपने दफ़्तर में कब रहते हैं, ताकि मैं आ सकूँ?”

इस चैट से यह भी सामने आया कि कोचाक ने गिरोह सरगना के बेटे से अपना एक राजनीतिक भाषण साझा करने को कहा था, जिसमें उन्होंने आपराधिक अरब कुलों को लेकर चल रही “उन्मादी बहस” की आलोचना की थी। कोचाक ने लिखा, “कृपया अपने सभी लोगों से इसे साझा करने को कहें।” फ़िरास रेम्मो ने जवाब दिया, “ज़रूर, भाई।” अगर कोचाक को संगठित अपराध कुलों से जुड़ी सोशल मीडिया फ़ौज का समर्थन हासिल है, तो इससे काफ़ी हद तक यह समझ आता है कि उनकी सोशल मीडिया पोस्ट अक्सर वायरल क्यों हो जाती हैं।

बाद की रिपोर्टों से पता चला कि प्रवासी बहुल इलाक़े नोएकॉल्न में हुई वामपंथी दल की चुनावी पार्टी में रेम्मो अकेला अरब आपराधिक कुल नहीं था। फ़लस्तीनी बरबाख़ कुल से जुड़े दो सोशल मीडिया प्रभावशाली व्यक्ति भी वहाँ देखे गए, जो अक्सर फ़लस्तीन समर्थक प्रदर्शनों में ताक़त का इंतज़ाम करते हैं। बर्लिन पुलिस संघ के प्रवक्ता बेंजामिन येंड्रो (Benjamin Jendro) ने बरबाख़ कुल को “कट्टर हमास प्रचारक” बताया।

इस्तीफ़ा

इसके बाद खड़े हुए विवाद के बीच फ़ेरात कोचाक ने बुंडेसटाग की गृह मामलों की समिति से इस्तीफ़ा दे दिया, जिसमें संवेदनशील सुरक्षा जानकारी तक पहुँच मिलती है। आलोचकों ने ध्यान दिलाया कि कोचाक ने 2022 और 2023 में बर्लिन विधान परिषद के सदस्य रहते हुए स्थानीय अपराध कुलों के ख़िलाफ़ बर्लिन पुलिस की कार्रवाइयों को लेकर कई संसदीय प्रश्न दाख़िल किए थे। हाल ही में यह भी सामने आया कि कोचाक की चाची और कई चचेरे भाई-बहन रेम्मो परिवार की इमारतों में रहते हैं और कोचाक को इसकी जानकारी थी।

जीत के जश्न की तस्वीरें इस संदेह को बल देती हैं कि लेबनानी गिरोह (जो 1970 और 1980 के दशक में जर्मनी भागकर आने के बाद बर्लिन के बड़े हिस्सों पर क़ाबिज़ हो गया) और PFLP, हमास तथा हिज़्बुल्लाह से जुड़े इस्लामवादी आतंकवादी संगठनों के बीच घनिष्ठ सहयोग है।

जब इस लेखक ने जर्मनी में लेबनानी कुलों के एक प्रमुख स्थानीय विशेषज्ञ से संगठित अपराध, ईरानी-वेनेज़ुएलाई हथियार और मादक पदार्थ तस्करी तथा इस्लामी आतंकवाद के बीच संबंधों के बारे में पूछा, तो उन्होंने अपनी जान के डर से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

यह सब इन नार्को-आतंकवादियों के उभरते राजनीतिक प्रभाव और डी लिंके जैसी पार्टियों के साथ उनके संबंधों को लेकर चिंता पैदा करता है, जिसकी प्रमुख उम्मीदवार कथित तौर पर बर्लिन की अगली मेयर बनने के लिए अन्य वामपंथी दलों से बातचीत कर रही हैं।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Lebanese Clans Help Far Left Gain Seats in Berlin Legislature

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