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इथियोपिया को वे रूसी लड़ाकू विमान क्यों, जो वॉशिंगटन ने मिस्र को नहीं दिए

नील नदी के किनारे हथियारों की होड़ के बजाय बातचीत से तय परिचालन नियम दोनों देशों की अधिक प्रभावी ढंग से रक्षा करेंगे।

Siyad Madey नैरोबी स्थित वकील और नीति विश्लेषक हैं। उन्हें पूर्वी अफ़्रीका और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। इससे पहले उन्होंने केन्या के नेशनल बैंक में 15 वर्षों से अधिक समय तक काम किया।

A Russian Knights aerobatic team performs with a Sukhoi Su-35 over Dubai.
दुबई के आसमान में सुखोई Su-35 के साथ करतब दिखाती रूसी नाइट्स एरोबैटिक टीम। · Shutterstock

28 अक्टूबर 2026 को इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद (Abiy Ahmed) ने मॉस्को में घोषणा की कि इथियोपिया को 12 रूसी Su-35 लड़ाकू विमान मिल चुके हैं और इसके बाद चार S-400 वायु-रक्षा बैटरियाँ मिलेंगी, हालाँकि बाद की रिपोर्टिंग से संकेत मिला कि इथियोपिया को सिर्फ़ पहले दो विमान ही मिले हैं और बाकी आपूर्ति का कार्यक्रम अस्पष्ट है। दो लड़ाकू विमान भी वॉशिंगटन के सामने एक असहज सवाल खड़ा करते हैं।

2019 में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने मिस्र को चेतावनी दी थी कि रूस से Su-35 ख़रीदने पर “काउंटरिंग अमेरिका’ज़ एडवर्सरीज़ थ्रू सैंक्शंस एक्ट” (CAATSA) के तहत प्रतिबंध लग सकते हैं। क़ाहिरा ने आख़िरकार अपनी योजना छोड़ दी। सात साल बाद, उसका प्रमुख प्रतिद्वंद्वी वही रूसी लड़ाकू विमान हासिल कर रहा है। क्या वॉशिंगटन वही मानदंड लागू करेगा?

यह घोषणा ऐसे एक साल के बाद आई है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इथियोपिया के ग्रैंड इथियोपियन रेनेसाँ डैम को लेकर मिस्र की शिकायतों को बार-बार दोहराया। 16 जनवरी 2026 को ट्रंप ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तह अल-सीसी को पत्र लिखकर अमेरिकी मध्यस्थता फिर से शुरू करने की पेशकश की। 17 जून को फ़्रांस के एवियाँ में G7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से सीसी से कहा कि इथियोपिया ने मिस्र के साथ अन्याय किया है और नील नदी को जितना ख़ाली होना चाहिए, उससे ज़्यादा ख़ाली होता बताया।

क्या इसका मतलब यह है कि वॉशिंगटन ने इथियोपिया के बजाय मिस्र को चुन लिया है? ठीक ऐसा नहीं है। ट्रंप की सार्वजनिक बयानबाज़ी क़ाहिरा के पक्ष में रही है, लेकिन अमेरिकी संस्थाएँ अदीस अबाबा से संवाद जारी रखे हुए हैं। 21 अगस्त को इथियोपिया की सरकार ने पेंटागन के साथ परामर्श और रक्षा सहयोग बढ़ाने के समझौते की जानकारी दी। हालाँकि पेंटागन ने ऐसी कोई विज्ञप्ति जारी नहीं की, फिर भी इससे संकेत मिलता है कि इथियोपिया के ख़िलाफ़ कोई एकरूप अमेरिकी नीति नहीं है।

यह भेद अहम है। इथियोपिया इस बाँध को बिजली परियोजना और अपनी संप्रभुता के दावे के तौर पर देखता है। नील पर भारी निर्भरता रखने वाला मिस्र लंबे सूखे के दौरान पानी की कमी से आशंकित है। मध्यस्थता का मक़सद जलाशय के संचालन के नियमों, भरोसेमंद सूचना-साझाकरण और विवाद सुलझाने के तरीके पर सहमति बनाना है। जो राष्ट्रपति बार-बार एक पक्ष की शिकायतों का समर्थन करता है, वह इसे और कठिन बना देता है। अबी की यह ख़रीद अकेले ट्रंप के सिर नहीं मढ़ी जा सकती; ख़बरों के मुताबिक़ इथियोपिया ने 2022 में ही 6 Su-35 का ऑर्डर दे दिया था।

इथियोपिया का तात्कालिक सुरक्षा माहौल बिगड़ रहा है। उसके उत्तरी इलाक़ों में फिर से छिड़ी लड़ाई और इरिट्रिया के साथ बढ़ता तनाव किसी भी सैन्य ख़रीद के दाँव बढ़ा देता है। 3 अक्टूबर को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच एक और संघर्ष पूरे हॉर्न क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है और दोनों देशों के साथ अमेरिकी सहयोग को ख़तरे में डाल सकता है। यह चेतावनी, राष्ट्रपति की टिप्पणियों भर से कहीं ज़्यादा, अमेरिका की आधिकारिक प्राथमिकताओं की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है।

मॉस्को के लिए इस सौदे का वादा निर्यात से होने वाली आमदनी से कहीं आगे तक जाता है। रूस को एक विवादित क्षेत्र में एक और रक्षा-संबंध मिल जाता है। इथियोपिया को ऐसे साज़ो-सामान तक पहुँच मिलती है, जिसके वॉशिंगटन से नज़दीकी चाहने वाले देशों के लिए राजनीतिक नतीजे होते हैं। सवाल यह है कि क्या वे नतीजे लगातार एक ही तरह से लागू किए जाएँगे।

CAATSA की धारा 231 रूस के रक्षा या ख़ुफ़िया क्षेत्र के निर्दिष्ट तत्वों के साथ महत्वपूर्ण लेनदेन पर प्रतिबंधों का प्रावधान करती है, जो क़ानूनी शर्तों, अपवादों और छूट देने के अधिकारों के अधीन है। पोम्पियो ने मिस्र की प्रस्तावित ख़रीद के ख़िलाफ़ इसी ढाँचे का हवाला दिया था। इथियोपिया के लेनदेन का आकलन भी उसी क़ानून के तहत होना चाहिए। इसका यह मतलब नहीं कि प्रतिबंध अपने-आप लग जाएँगे, या यह कि तथ्यों की जाँच किए बिना वैसा ही नतीजा क़ानूनन अनिवार्य है।

वॉशिंगटन के सामने दो जोखिम हैं। बिना किसी स्पष्टीकरण के चुप्पी, क़ाहिरा को दी गई उसकी पिछली चेतावनी को चुनिंदा दिखाएगी। अदीस अबाबा के ख़िलाफ़ हड़बड़ी में दी गई धमकी मॉस्को की स्थिति मज़बूत कर सकती है और मध्यस्थ के रूप में अमेरिका की विश्वसनीयता को और क्षति पहुँचा सकती है। जवाब एक पारदर्शी क़ानूनी समीक्षा है, न कि तदर्थ कूटनीतिक सज़ा।

अमेरिका के पास अब भी प्रभाव के रास्ते हैं। इथियोपिया अब भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के 3.4 अरब डॉलर के कार्यक्रम के तहत है। यह कार्यक्रम व्यापक आर्थिक स्थिरीकरण के लिए है; इसे रूसी हथियार सौदों को नियंत्रित करने वाली वैधानिक प्रक्रिया का विकल्प नहीं बनना चाहिए। अमेरिकी सुरक्षा और कूटनीतिक जुड़ाव भी इसी तरह खुला रहना चाहिए, ख़ासकर तब जब इरिट्रिया के साथ तनाव बढ़ रहा हो।

एक सुसंगत अमेरिकी रुख़ ख़रीद और आपूर्ति के बीच भी फर्क़ करेगा। मॉस्को में प्रदर्शित दो विमान यह साबित नहीं करते कि इथियोपिया में कोई परिचालन स्क्वाड्रन पहुँच चुका है। न ही वादा की गई S-400 बैटरियाँ यह साबित करती हैं कि बाँध की सुरक्षा करने में सक्षम कोई वायु-रक्षा तंत्र पहले से मौजूद है। रूस ने वास्तव में क्या आपूर्ति की है, इस बारे में वॉशिंगटन जितना सटीक होगा, प्रतिबंधों पर कोई भी फ़ैसला उतना ही विश्वसनीय होगा। यह अनुशासन तब मायने रखता है, जब क्षेत्रीय सरकारें दोहरे मानदंडों के संकेत तलाश रही हों और जब कांग्रेस को यह तय करना हो कि कार्यपालिका क़ानून को एकरूपता से लागू कर रही है या नहीं।

ट्रंप को जनवरी में दी गई अपनी मध्यस्थता की पेशकश के सार पर लौटना चाहिए। मिस्र को सूखे के दौरान भरोसेमंद सुरक्षा उपाय चाहिए। इथियोपिया को बिजली पैदा करने और विकास का पीछा करने के अपने अधिकार की मान्यता चाहिए। बातचीत से तय परिचालन नियम नील के किनारे हथियारों की होड़ के मुक़ाबले दोनों के हितों की कहीं ज़्यादा प्रभावी ढंग से रक्षा करेंगे।

Su-35 यह साबित नहीं करते कि इथियोपिया ने वॉशिंगटन को छोड़ दिया है, लेकिन वे अस्पष्टता की क़ीमत ज़रूर दिखाते हैं। अमेरिका मिस्र के ख़िलाफ़ रूसी हथियारों पर प्रतिबंधों का हवाला देकर फिर इथियोपिया के मामले में अपने रुख़ की व्याख्या करने से इनकार नहीं कर सकता। न ही ट्रंप यह उम्मीद कर सकते हैं कि अदीस अबाबा उनकी मध्यस्थता पर भरोसा करेगा, जबकि वे क़ाहिरा के दावों को तय तथ्य मानकर बोलते रहें। अगर वॉशिंगटन अपने रुख़ में एकरूपता और पारदर्शिता नहीं अपनाता, तो मॉस्को पर्दे के पीछे तैयार खड़ा है।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Why Does Ethiopia Get the Russian Jets Washington Denied Egypt?

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