परमाणु अप्रसार संधि छोड़ने पर विचार कर रहा ईरान
संधि पर ईरान का आधिकारिक रुख़ अब तक नहीं बदला है, लेकिन कई ईरानी अधिकारी अब इससे हटने की पैरवी कर रहे हैं।
Shay Khatiri यॉर्कटाउन इंस्टिट्यूट (Yorktown Institute) में वरिष्ठ फ़ेलो और रेनी सेंटर (Rainey Center) में फ़ेलो हैं।

ईरानी नीति-निर्माताओं और पत्रकारों ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में ईरान की हैसियत और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर फिर से चर्चा शुरू कर दी है। 18 अक्टूबर 2026 को संसदीय नेतृत्व के मध्यमार्गी सदस्य अहमद नादेरी (Ahmad Naderi) ने सुझाव दिया कि सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई अपने दिवंगत पिता के परमाणु हथियारों के ख़िलाफ़ फ़तवे में संशोधन कर सकते हैं। इसके बाद 24 अक्टूबर को पूर्व परमाणु वार्ताकार सईद जलीली (Saeed Jalili) के नेतृत्व वाले कट्टरपंथी पायदारी फ़्रंट ने एक बयान जारी कर ईरान के संधि से हटने की माँग की। बयान में संधि की ‘दो-स्तरीय’ व्यवस्था पर आपत्ति जताई गई—जिसमें कुछ के पास हथियार हैं और कुछ के पास नहीं—और कहा गया कि हाल के युद्ध साबित करते हैं कि ईरान को प्रतिरोध के लिए परमाणु हथियारों की ज़रूरत है।
31 अक्टूबर को सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई (Mohsen Rezaei)—जो व्यावहारिक रूप से ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी हैं—ने राष्ट्रीय टेलीविज़न से कहा कि संधि के पक्षकार के रूप में ईरान का भविष्य अनिश्चित है। संदर्भ से यह बिना सोचे-समझे दिया गया बयान लगता है, जिसे लेकर रेज़ाई ने बाद में पीछे हटने की कोशिश भी की। शुरुआती साक्षात्कार में रेज़ाई ने शेख़ी बघारी कि उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस के साथ बातचीत में ईरान कैसे अडिग रहा। रेज़ाई ने परमाणु मुद्दे पर चर्चा को लेकर ईरान का रुख़ समझाया: “हम पहले अपने अधिकारों पर चर्चा करते हैं, बजाय इसके कि ख़ुद पर पाबंदियाँ थोपें।” उन्होंने कहा कि “NPT का पक्षकार हर देश के पास 22 अधिकार होते हैं। … वे शायद फिर से युद्ध शुरू करना चाहें, और यह स्पष्ट नहीं है कि युद्ध के बाद हम NPT में बने रहेंगे—लेकिन जब तक हम इसमें हैं, हमारे पास 22 अधिकार हैं और हम उनकी माँग करेंगे।”
रेज़ाई ने जोड़ा कि अब तक ईरान का परमाणु सिद्धांत नहीं बदला है। 1 नवंबर को विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची (Abbas Araghchi) ने दोहराया, “ईरान परमाणु अप्रसार संधि का सदस्य है, और वह इस संधि के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं पर क़ायम है,” साथ ही यह भी कहा कि एजेंसी के साथ ईरान के रिश्ते असहज बने हुए हैं। लेकिन नुक़सान हो चुका था।
हालांकि अब ईरानी अधिकारियों का एक बड़ा दायरा संधि से हटने की वकालत कर रहा है। पूर्व विदेश मंत्री मनूचेहर मोत्तकी (Manuchehr Mottaki), एक्सपीडिएंसी काउंसिल के सचिव मोहसेन अराकी (Mohsen Araki), और संसद के कई सदस्य माँग कर रहे हैं कि संधि से हटने का विधेयक कार्यसूची में रखा जाए। मोत्तकी, जो संसद में हैं, ने तो यहाँ तक दावा किया कि अगर ख़ामेनेई सहमत हो जाएँ तो संसद के सभी 290 सदस्य संधि छोड़ने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर देंगे।
सुधारवादी वेबसाइट रूयदाद24 (Rouydad24) ने टिप्पणी की, “NPT छोड़ने की माँग अब संसद के कुछ सदस्यों तक सीमित नहीं रह गई है,” और जोड़ा, “जुमे की नमाज़ के मंच और राष्ट्रीय टेलीविज़न और रेडियो से लेकर [एक्सपीडिएंसी] काउंसिल तक, सब इसे बेकार मानते हैं।” अतीत में रूयदाद24 संभवतः संधि से हटने का विरोध करती, लेकिन अब उसका सुर अलग है। इसके बजाय वह जल्दबाज़ी में फ़ैसला लेने के ख़िलाफ़ चेतावनी देती है और सलाह देती है कि “अगर ईरान का परमाणु सिद्धांत बदलना ही है,” तो वह फ़ैसला गंभीर विचार-विमर्श का नतीजा होना चाहिए।
इस रास्ते के ख़िलाफ़ आवाज़ें अब भी हैं। संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अहमद बख़्शायेश अर्देस्तानी (Ahmad Bakhshayesh Ardestani) ने चेताया कि इस क़दम से यह संकेत जा सकता है कि ईरान परमाणु हथियारों की ओर बढ़ रहा है। नतीजतन, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के ख़िलाफ़ पैंतरेबाज़ी कर सकता है।” रूहानी प्रशासन में मंत्री रहे और सभी पक्षों के क़रीबी, ताक़तवर धर्मगुरु अहमद जन्नती के बेटे अली जन्नती (Ali Jannati) ने राय दी, “जो लोग कहते हैं कि ईरान को NPT से बाहर निकल जाना चाहिए, वे नहीं जानते कि यह बयान राष्ट्रीय हितों के कितना ख़िलाफ़ है।” उन्होंने आगाह किया, “इस पर बात करना भी ग़लत है, और यह अपने आप में देश पर एक और युद्ध थोप देगा।”
सुरक्षा प्रतिष्ठान के क़रीबी ख़बर ऑनलाइन (Khabar Online) चेतावनी देता है कि संधि से हटना ईरान के लिए महँगा पड़ेगा, हालांकि वह यह भी जोड़ता है कि यह क़ीमत उस लाभ के लायक़ हो सकती है। लेकिन अहम बात यह है कि वह रेखांकित करता है कि ईरान की नीति नहीं बदली है—हालांकि क्षेत्रीय राजनीति में बदलाव परमाणु हथियारों को लेकर ईरान की नीति बदल सकते हैं।
विचार के लिए तीन नए कारक हैं। पहला, ख़ामेनेई में अपने पिता जैसी सावधानी नहीं है; दूसरा, हाल के दो युद्धों के कारण ईरान ख़ुद को असुरक्षित मानता है, लेकिन साथ ही मानता है कि निर्णायक जीत हासिल करने में नाकामी के बाद अमेरिकी प्रतिरोध क्षमता आज कमज़ोर है; तीसरा, शासन के शीर्ष वर्ग के नीचे राय प्रसार की ओर बढ़ रही है। फ़िलहाल कमान संभाल रहे पुराने लोग, जैसे रेज़ाई और अराक़ची, ने अभी इस विचार का समर्थन नहीं किया है, लेकिन बाक़ी शासन के दबाव में उन्हें ऐसा करना पड़ सकता है।
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