सीरियाई कुर्दिस्तान से एक रिपोर्ट
छोटे शहरों में प्रशासनिक फेरबदल के अलावा राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य लगभग पहले जैसा ही है।
Sirwan Kajjo पत्रकार और शोधकर्ता हैं, जिनकी विशेषज्ञता कुर्द राजनीति, इस्लामी उग्रवाद और सीरियाई मामलों में है। उन्होंने सीरिया और कुर्दों पर दो पुस्तक-अध्याय लिखे हैं, जो Indiana University Press और Cambridge University Press से प्रकाशित हुए हैं। सीरियाई और कुर्द मुद्दों पर उनके लेख मिडिल ईस्ट फ़ोरम (Middle East Forum), वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फ़ॉर नियर ईस्ट पॉलिसी (Washington Institute for Near East Policy) तथा अन्य प्रमुख शोध संस्थाओं और प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं। Kajjo सीरिया पर आधारित उपन्यास Nothing But Soot के लेखक भी हैं। उन्होंने George Mason University से सरकार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में BA किया है।
क़ामिश्ली, सीरिया—दिसंबर 2024 में बशर अल-असद शासन के पतन के बाद मैं हाल ही में पहली बार उत्तरी सीरिया लौटा। मैंने जो देखा, वह कुर्द क्षेत्र की पिछली यात्राओं में देखी गई स्थितियों से काफ़ी अलग था—यह वही इलाक़ा है जिसे 2012 से जनवरी 2026 तक व्यावहारिक रूप से स्वायत्तता हासिल थी।
बदलाव उसी पल दिखने लगते हैं, जब आप इराक़ी कुर्दिस्तान से सीमा पार करते हैं। अगस्त 2026 तक सेमल्का सीमा चौकी कुर्द नेतृत्व वाले उत्तरी और पूर्वी सीरिया के स्वायत्त प्रशासन (Autonomous Administration of North and East Syria) के नियंत्रण में थी, इससे पहले कि उसकी सशस्त्र शाखा सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ (SDF) ने अपने विघटन का एलान कर दिया। सीरियाई संघर्ष के दौरान 2013 में मानवीय सहायता के लिए स्थापित सेमल्का पूरे मध्य पूर्व की एकमात्र ऐसी सीमा चौकी थी, जिसके दोनों ओर सीमा के पार कुर्द बलों का नियंत्रण था।
सीरिया की तरफ़ अब यह स्थिति नहीं है। अब आधिकारिक तौर पर इसे सेमल्का अंतरराष्ट्रीय चौकी कहा जाता है और यह दमिश्क की केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। स्वायत्त प्रशासन के झंडों की जगह अब सीरियाई झंडे हैं और कुर्द प्रतीक कहीं नज़र नहीं आते। कुर्द अधिकारियों के कभी इस्तेमाल होने वाले काग़ज़ात और मुहरों की जगह अब दमिश्क के काग़ज़ात और मुहरें इस्तेमाल हो रही हैं। हालांकि, ये बदलाव यह बताते हैं कि पूर्वोत्तर सीरिया की कमान अब किसके हाथ में है, लेकिन चौकी पर काम कर रहे अधिकांश सरकारी कर्मचारी वही लोग हैं, जो अब भंग हो चुके कुर्द प्रशासन की तनख़्वाह पर थे।
सीरिया-तुर्की सीमा के साथ-साथ पश्चिम की ओर बढ़ते हुए, कुर्द शहरों और क़स्बों से गुज़रते हुए क़ामिश्ली तक पहुँचने पर तस्वीर कहीं ज़्यादा पेचीदा दिखती है। क़ामिश्ली पूर्वोत्तर सीरिया का सबसे बड़ा शहर है और सीरियाई कुर्द इसे अपनी राजधानी मानते हैं। क़ामिश्ली एक थका हुआ शहर है। इसकी भीड़भाड़ वाली सड़कें गड्ढों से पटी हैं—निवासियों की इच्छा से कहीं ज़्यादा—और डीज़ल से चलने वाले बिजली जनरेटरों से होने वाला वायु प्रदूषण हवा को सांस लेने लायक़ नहीं छोड़ता। लेकिन ये पुरानी समस्याएँ उन राजनीतिक समीकरणों को नहीं ढंक पातीं, जो जनवरी 2026 में कुर्द बलों और सीरियाई सरकारी सैनिकों के बीच हुई झड़पों के बाद उभरे। इस हिंसा के बाद एक समझौता हुआ, जिसकी परिणति अंततः सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ और स्वायत्त प्रशासन के विघटन में हुई।
क़ामिश्ली अब सीरियाई सरकार के नियंत्रण में है। उम्मीद है कि इसका अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 2026 के अंत से पहले फिर खुल जाएगा, और तुर्की के नुसैबिन के साथ इसकी सीमा चौकी भी। सरकारी इमारतों पर सीरियाई अरब गणराज्य के प्रतीकों वाले बोर्ड दिखाई देते हैं, जो बाथ-काल के परिदृश्य की याद दिलाते हैं। मुख्य अंतर यह है कि अब अधिकांश बोर्ड द्विभाषी हैं—अरबी और कुर्दी में।
ऐसी ही स्थिति हसाका में उभर रही है, जो हसाका प्रांत की राजधानी है। बड़ी अरब आबादी वाले हसाका में कुर्द और अरब निवासियों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। ये जातीय तनाव इस बात की कसौटी होंगे कि क्या जनवरी 2026 का समझौता पूर्वोत्तर सीरिया में दीर्घकालिक स्थिरता दे सकता है। हसाका में दमिश्क द्वारा नियुक्त कुर्द गवर्नर के पास बहुत कम ताक़त दिखती है; उसका इस्लामवादी, दमिश्क-समर्थक उप-गवर्नर ही पर्दे के पीछे असली ताक़त नज़र आता है। ऐसे ही लोग, जिनमें कुछ जातीय कुर्द भी शामिल हैं, पूर्वोत्तर सीरिया में एकीकरण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से प्रमुखता हासिल कर रहे हैं।
अमूदा और दिरबासिये जैसे छोटे शहरों में प्रशासनिक बदलावों को छोड़ दें, तो राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य मोटे तौर पर पहले जैसा ही बना हुआ है। स्थानीय सुरक्षा बल और यातायात पुलिसकर्मी वही वर्दी पहनते हैं, जो वे स्वायत्त प्रशासन के दौर में पहनते थे। अधिकांश सरकारी संस्थानों और सरकारी स्कूलों पर पुराने बोर्ड ही लगे हैं। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कुर्द झंडे और संघर्ष में मारे गए लड़ाकों की तस्वीरें प्रदर्शित हैं।
पूर्वोत्तर सीरिया के बड़े और छोटे शहरों के बीच यह अंतर क्षेत्र में बदलते सत्ता समीकरणों की जटिलता दिखाता है। दमिश्क भले ही सत्ता के पुनः केंद्रीकरण में सफल रहा हो, लेकिन पूर्वोत्तर सीरिया में स्थानीय शासन की असंगतियाँ उस चुनौती को रेखांकित करती हैं, जो एक दशक से अधिक समय तक अर्ध-स्वायत्त रूप से शासित रहे क्षेत्र में केंद्र सरकार के अधिकार को एकसमान ढंग से लागू करने में आती है।
यह उलझन अपनी जगह है कि किस पर किसका शासन है और अहम फ़ैसले दमिश्क में होते हैं या क़ामिश्ली में, लेकिन सीरियाई कुर्द यह भी मानते हैं कि कुर्द नेताओं और दमिश्क के बीच बनी कोई भी समझ एक अस्थायी व्यवस्था है, जो उनकी पुरानी मांगों को शायद ही संबोधित करती है। यहां आप जिससे भी बात करें, वह इस बात पर ज़ोर देता है कि इस्लामवादियों द्वारा शासित देश में संवैधानिक गारंटियाँ ही दीर्घकाल में कुर्द अधिकारों की रक्षा का एकमात्र रास्ता हो सकती हैं।
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