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इसराइल में क़तर पर चुनावी हस्तक्षेप के आरोप: पाँच अहम बातें

एक नेसेट सदस्य ने अगस्त में कहा था कि इसराइली अरब पार्टियाँ ‘इसराइली लोकतंत्र की परीक्षा लेंगी’।

रिचर्ड पोलॉक 45 वर्षों से राष्ट्रीय रिपोर्टर रहे हैं। इसमें ABC के “Good Morning America” में उनका एक दशक भी शामिल है, जहाँ उन्होंने व्हाइट हाउस और पेंटागन प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया और एमी पुरस्कार विजेता प्रोड्यूसर रहे। फ़िलहाल वे Substack पर “A World in Crisis” शीर्षक से एक स्तंभ लिखते हैं।

this national election is also the first legislative vote conducted in the aftermath of the October 7, 2023 assault and the prolonged multi-front conflict that subsequently expanded across Gaza, the West Bank, Lebanon, and Iran
शिन बेत विदेशी फ़ंडिंग के ज़रिए चुनाव में अनुचित प्रभाव डालने के आरोपों की जाँच कर रही है। · Shutterstock

ऐसा लगता है कि क़तर और दो अन्य अनाम देशों ने इसराइली अरब पार्टियों को कथित तौर पर अवैध तरीके से धन मुहैया कराया हो सकता है—यह “वॉक अराउंड” पैसा था, यानी मतदाताओं को घुमा-फिराकर बूथ तक लाने के लिए मौक़े पर बाँटी जाने वाली नक़दी, ताकि 27 अक्टूबर 2026 को इसराइली अरबों को मतदान केंद्रों तक जाने के लिए लुभाया जा सके। इसराइल की केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जस्टिस नोअम सोहलबर्ग (Noam Sohlberg) ने “विदेशी फ़ंडिंग के ज़रिए अनुचित प्रभाव के गंभीर संदेह” की अभूतपूर्व जाँच का आदेश इसराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेत को दिया है।

इसराइल के चैनल 12 के मुताबिक़, शिन बेत की उँगली क़तर की ओर उठ रही है। यह धन इसराइली अरब मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए था और इसे उन्हीं चैनलों से भेजा गया, जिनका इस्तेमाल पहले आतंक के लिए धन की आवाजाही में होता रहा है। चैनल 12 यह भी रिपोर्ट करता है कि “इसराइल सुरक्षा एजेंसी (शिन बेत) यह जाँच कर रही है कि क्या क़तर के अलावा कम से कम दो अन्य देशों ने भी अनुचित प्रभाव के ज़रिए नेसेट चुनावों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने की कोशिश की।”

यह ख़बर ऐसे समय आई है, जब इसराइली अरबों का मतदान बढ़कर 80 प्रतिशत भागीदारी तक पहुँच गया। इतना टर्नआउट संभवतः मौजूदा 10 अरब नेसेट सदस्यों की संख्या को बढ़ाकर 19 सीटों तक ले गया—जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। क्या यह क़तर और अन्य मुस्लिम पक्षों की ऐसी योजना थी, जिसके तहत इसराइल के भीतर आंतरिक राजनीतिक अव्यवस्था पैदा करने के लिए इसराइली अरबों को ‘पाँचवें स्तंभ’ के रूप में इस्तेमाल किया जाए?

हिमशैल का सिरा तब सामने आया, जब इसराइल के दक्षिणी ज़िले के जासूसों ने चुनावी रिश्वत के संदेह में राम (Ra’am) अरब पार्टी के 4 कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया। जासूसों को उनके घरों में मतपत्रों के साथ हज़ारों-हज़ार शेकेल मिले और लिफ़ाफ़ों पर लिखा था, “इस्लामी आंदोलन की ओर से उपहार।” क्या ये “उपहार” क़तर से आए थे?

ऐसी मिसाल अन्य जगह भी मिलती है। क़तर ने फ़हद यासीन (Fahad Yasin) के ज़रिए काम किया—जो अल-जज़ीरा के पूर्व प्रोड्यूसर हैं और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में प्रतिबंधित आतंकी समूहों के क़रीबी रहे हैं—ताकि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद फ़रमाजो (Mohamed Farmaajo) के समर्थन में कई राजनेताओं को धन दिया जा सके। वह अक्सर दूसरे सोमालियों के सामने क़तर के ‘बैगमैन’ के रूप में अपनी भूमिका पर डींग हाँकते थे। यह योजना कामयाब रही और फ़रमाजो ने यासीन को ख़ुफ़िया प्रमुख नियुक्त कर दिया।

कई इसराइली अरब बस्तियों में चुनाव पर्यवेक्षकों और मतदान केंद्र अधिकारियों ने मतदाताओं को ईंधन वाउचर और गिफ़्ट कार्ड ले जाते देखने की बात कही—जो कथित तौर पर उन्हें मतदान के लिए जाते समय बाँटे गए थे। रिपोर्टों में कहा गया कि कुछ मतदाताओं ने माना कि उन्हें राम को वोट देने के बदले ये कार्ड मिले। लिकुड पार्टी के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि इस्लामी आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से चलाए गए समन्वित राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत व्यापक चुनावी धाँधली, रिश्वतख़ोरी और मतपत्रों में हेरफेर हुआ।

राम, इसराइल में इस्लामी आंदोलन की दक्षिणी शाखा की राजनीतिक इकाई है—एक ऐसा आंदोलन, जो ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम ब्रदरहुड से प्रेरित रहा है। राम के प्रमुख और नेसेट सदस्य मंसूर अब्बास ने अरब मतदाताओं के उभार का संकेत देते हुए अगस्त में कहा था कि इसराइली अरब पार्टियाँ “इसराइली लोकतंत्र की परीक्षा लेंगी”। अब्बास ने हमास को आतंकी समूह नहीं, बल्कि एक धर्मार्थ संस्था भी बताया है।

अगर धुएँ के पीछे वाक़ई आग है, तो इससे क्या नतीजे निकलते हैं?

लिकुड गठबंधन और विपक्षी “चेंज ब्लॉक”—दोनों ने तर्कों, जज़्बे और मुद्दों के आधार पर अपील की। और इसराइली अरबों के मतदान की प्रेरणा? नक़द, ईंधन कार्ड और गिफ़्ट कार्ड। इससे लोकतांत्रिक व्यवहार कमज़ोर होता है और उसके प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठते हैं।

इसराइली अरब पार्टियों और इसराइली अरब नेसेट सदस्यों का अस्तित्व लगभग सभी मुस्लिम देशों के उलट है, जहाँ कोई वैध यहूदी राजनीतिक दल मौजूद नहीं है। इसराइल मध्य पूर्व का इकलौता वास्तविक लोकतंत्र है, जो अपने मुस्लिम नागरिकों को—साथ ही अन्य अल्पसंख्यकों को भी—पूर्ण मताधिकार देता है।

इसराइल के भीतर चले चुनावी अभियान, पिछले महीने फ़लस्तीनी प्राधिकरण के चुनाव रद्द किए जाने के उलट हैं—वे चुनाव, जो अगले महीने होने थे और जिन्हें फ़लस्तीनी अध्यक्ष महमूद अब्बास ने रद्द कर दिया, जो अब अपने 4 साल के निर्वाचित कार्यकाल के 22वें वर्ष में हैं। 2005 में फ़लस्तीनी प्राधिकरण के प्रमुख बनने के बाद से अब्बास ने सभी चुनाव रद्द कर दिए हैं, जबकि ओस्लो समझौते—जिन पर फ़लस्तीनी प्राधिकरण की वैधता और अस्तित्व टिका है—हर 4 साल पर चुनाव की माँग करते हैं। इसी दौरान इसराइल में विभिन्न राजनीतिक दलों से 5 प्रधानमंत्री हुए: एरियल शेरोन, एहुद ओलमर्ट, बेंजामिन नेतन्याहू, नफ़्ताली बेनेट और यायर लापिद।

क़तर इसराइली अरबों के हाथों में पैसा पहुँचाने से इनकार करता है। लेकिन क़तर—जो हमास का बड़ा वित्तपोषक रहा है—एक आर्थिक महाशक्ति है। वह बार-बार इनकार करता है कि वह राय को प्रभावित करने के लिए नक़द का इस्तेमाल करता है, फिर भी पिछले दशक में हुए कई लीक दिखाते हैं कि उसके ये इनकार खोखले हैं और यह भी कि वह, मसलन, विश्वविद्यालयों में पढ़ाई को प्रभावित करने तथा अपने नियंत्रण वाले मीडिया संस्थानों में कवरेज को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिशें करता रहा है। यह एक शत्रु राष्ट्र है, जो इसराइल के ख़ात्मे पर आमादा है।

विदेशी प्रभाव के आरोप चुनाव नतीजों को रद्द नहीं करेंगे, जिनमें नेतन्याहू को सबसे ज़्यादा चुनावी वोट मिले हैं। हालांकि, यह इसराइली-अरब वोट के कुछ हिस्से या पूरे हिस्से को अमान्य कर सकता है—ख़ासकर राम के वोट को—जो चुनावी रिश्वत अभियान के पीछे की मुख्य पार्टियों में से एक प्रतीत होती है। नेतन्याहू की पार्टी इस कांड को “राअमगेट कांड” और एक “भूकंप” बता रही है।

निस्संदेह, आगे और भी खुलासे होने हैं। शिन बेत को 1 सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी है।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Five Takeaways of Qatar’s Alleged Election Interference Inside Israel

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