जर्मन ख़ुफ़िया एजेंसी: इस्लामवादी क्वीरफ़ोबिया जिहाद और लोकतंत्र के क्षरण का संकेत
ख़तरे के चलते समलैंगिक पुरुष ‘धुर दक्षिणपंथी’ राजनीतिक दल का समर्थन कर रहे हैं।
जूल्स गोम्स रोम में रहने वाले बाइबिल विद्वान और पत्रकार हैं।

जर्मनी की घरेलू ख़ुफ़िया एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इस्लामवादी LGBTQ+ विरोधी भावना के बढ़ते स्तर जिहादी हिंसा को हवा देते हैं और पश्चिमी लोकतंत्रों के प्रति इस्लामवाद की शत्रुता के एक अहम संकेतक हैं।
2 अक्तूबर के एक प्रेस बयान में फ़ेडरल ऑफ़िस फ़ॉर द प्रोटेक्शन ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन (Bundesamt für Verfassungsschutz) ने अपने उस दस्तावेज़ की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें “इस्लामवादी आंदोलनों में व्यापक क्वीरफ़ोबिया” को लेकर ख़तरे की घंटी बजाई गई है।
BfV के बयान में कहा गया, “क्वीर लोगों के अधिकारों को मुस्लिम समुदायों पर एक ‘पश्चिमी’ हमले के रूप में पेश किया जाता है और ख़ासकर सोशल मीडिया पर इनका इस्तेमाल लामबंदी और सीमारेखा खींचने के लिए किया जाता है।” इसमें इस्लामवादी क्वीरफ़ोबिया के “बढ़ते महत्व” को रेखांकित किया गया, जो “उदार और बहुलतावादी पश्चिमी शैली के लोकतंत्र के इस्लामवाद-प्रेरित अस्वीकार, बल्कि विरोध की अभिव्यक्ति है।”
दस्तावेज़ ने स्वीकार किया कि 25 जुलाई को बर्लिन प्राइड परेड में LGBTQ+ जश्न मनाने वालों पर हुआ हमला “जिहादी-प्रेरित” था और यह “नाटकीय ढंग से दर्शाता है कि लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर, इंटरसेक्स और क्वीर लोग” “इस्लामवादियों के लिए शत्रु-छवि” और “जिहादियों के लिए निशाना” हैं।
जर्मन विशेष बलों ने 21 वर्षीय अब्दुल बल्लूत (Abdul Ballout) नाम के लेबनानी-जर्मन इस्लामिक स्टेट समर्थक को गोली मारकर ढेर कर दिया था। उसने बर्लिन प्राइड फ़ेस्टिवल—जिसे क्रिस्टोफ़र स्ट्रीट डे भी कहा जाता है और जो यूरोप के सबसे बड़े LGBTQ+ आयोजनों में से एक है—को एक मिनीवैन और चाक़ू से निशाना बनाया था। इस हमले में 29 लोग घायल हुए और एक महिला की मौत हो गई।
जर्मन टिप्पणीकार एलिज़ाबेथ डैम्पियर (Elisabeth Dampier) ने चेताया कि जर्मनी इस हमले के इस्लामवादी मक़सद को लेकर “इनकार” की स्थिति में है, और यह कि प्रमुख जर्मन राजनेताओं तथा मुख्यधारा के समाचार माध्यमों ने हमले के लिए “धुर दक्षिणपंथ” को दोषी ठहराया।
डैम्पियर ने कहा कि जर्मनी की “धुर दक्षिणपंथी” अल्टरनेटिव फ़्यूर डॉयचलांड (AfD) पार्टी, जिसके इस्लामी प्रवासन पर सबसे कट्टर विचार हैं, 2025 में समलैंगिक पुरुषों के बीच सबसे लोकप्रिय पार्टी पाई गई—ठीक इसलिए क्योंकि जर्मनी में क्वीर लोग “ऐसे हमलों से डरते हैं।”
दस्तावेज़ ने जिहादी प्रचार में क्वीर-विद्वेष को उजागर किया
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में जिहादियों ने LGBTQ+ लोगों और उनके प्रतीकों को “भारी क्रूरता” के साथ निशाना बनाया है और नियमित रूप से इस्लामवादी विचारधारा के संदर्भ में समलैंगिक आंदोलन को दुश्मन के रूप में पेश किया है। इसमें समलैंगिकों को छतों से फेंककर मारने संबंधी ISIS के प्रचार का हवाला दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ISIS की अफ़ग़ान शाखा, इस्लामिक स्टेट ख़ुरासान प्रांत (ISPK) की ओर से प्रकाशित “वॉयस ऑफ़ ख़ुरासान” के फ़रवरी 2023 अंक में “जिहाद मनमर्ज़ी के अनुयायियों के रास्ते में एक बाधा है” (जो LGBTQ+ आंदोलन की ओर इशारा करता है) शीर्षक से एक लेख शामिल है।
लेख में चेतावनी दी गई है कि समलैंगिकता के प्रति सहिष्णुता एक “नव-विकसित वायरस” है, जिसे “मुस्लिम युवाओं को लकवाग्रस्त करने” के लिए बनाया गया है। इसमें बर्लिन की LGBTQ+ के प्रति सहिष्णु इब्न रुश्द-गोएथे मस्जिद को “शैतानों का इबादतगाह” कहते हुए उसकी भर्त्सना की गई है।
दस्तावेज़ में अल-क़ायदा की पत्रिका “उम्मा वाहिदा” के फ़रवरी 2023 अंक का हवाला दिया गया है, जो 2022 का विश्व कप आयोजित करने और इस्लाम के विरुद्ध कृत्यों को बर्दाश्त करने के लिए क़तर की कड़ी आलोचना करता है। उदाहरण के तौर पर इसमें समलैंगिकों को जगह देने और विश्व कप के एक मैच में जर्मन गृह मंत्री नैंसी फ़ेज़र के “वन लव” आर्मबैंड पहनकर मौजूद रहने का ज़िक्र है।
दस्तावेज़ के मुताबिक जिहादी प्रचार, आस्था के मामलों में पश्चिम पर इस्लाम की श्रेष्ठता जताने के लिए LGBTQ+ अनैतिकता को भी उभारता है। इसके लिए अल-क़ायदा से जुड़े टेलीग्राम चैनल “हिदायत अल-सारी” का उदाहरण दिया गया है, जो पश्चिम को शराबख़ोरी, जुआ, व्यभिचार, सूदख़ोरी और “(यौन) असामान्यता” (समलैंगिकता) से भरा दिखाता है।
सलफ़ी और हिज़्ब उत-तहरीर की समलैंगिकता-विरोधी भावना का उभार
दस्तावेज़ में कहा गया है कि ख़ुतबों में और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर इस्लामवाद-प्रेरित, समलैंगिकता-विरोधी बयान कई सलफ़ी प्रचारक और इन्फ़्लुएंसर दे रहे हैं, जिनमें पियरे फ़ोगेल (Pierre Vogel) और इब्राहीम अल-अज़्ज़ाज़ी (Ibrahim El-Azzazi) भी शामिल हैं।
फ़ोगेल उदार मुसलमानों पर हमला करते हैं, जिनके बारे में उनका मानना है कि वे इस्लाम को भ्रष्ट कर रहे हैं, और उन्हें “ठग” कहते हैं, जो ईश्वर के वचन के ख़िलाफ़ बग़ावत करते हैं। वे समलैंगिकता पर ईसाइयत और यहूदी धर्म के पारंपरिक विचारों का भी हवाला देते हैं (जो आमतौर पर उनकी आलोचना के केंद्र में होते हैं) और बार-बार घोषणा करते हैं: “हम अपने धर्म को बदलने नहीं देंगे।”
नवंबर 2025 में संघीय गृह मंत्री ने हिज़्ब उत-तहरीर से जुड़े समूहों “रियालिटेट इस्लाम”, “जेनरेशन इस्लाम” और “मुस्लिम इंटराक्टिव” (MI) के सोशल मीडिया चैनलों पर इस्लामवादी LGBTQ+ विरोधी प्रचार के लिए प्रतिबंध लगा दिया। इन चैनलों ने ऐसे वीडियो, पाठ और मीम प्रकाशित किए, जो ग़ैर-द्विआधारी लैंगिक पहचानों और ग़ैर-विषमलैंगिक रुझानों को इस्लाम के ख़िलाफ़ बताकर ख़ारिज करते थे।
फ़ोगेल ने बर्लिन की इब्न रुश्द-गोएथे मस्जिद की ओर से 2021 में शुरू किए गए “लव इज़ हलाल” अभियान का हवाला देते हुए इसकी भर्त्सना की है। इस अभियान को संघीय परिवार मामले, वरिष्ठ नागरिक, महिला एवं युवा मंत्रालय का समर्थन हासिल है। फ़ोगेल इसे हलाल प्रमाणन के दुरुपयोग के रूप में देखते हैं, जिसे वे मुसलमानों के लिए अपरिहार्य बताते हैं।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है, “सलफ़ी और जिहादी, दोनों दायरों से आने वाली प्रतिक्रियाएँ सभी LGBTQ+ लोगों की कड़ी अस्वीकृति दर्शाती हैं।” इससे “क्वीर लोगों के ख़िलाफ़ बदनामी का बढ़ता हुआ चक्र, और साथ ही पश्चिमी दुनिया तथा ‘काफ़िरों’ के प्रति आम शत्रुता भी पैदा हो सकती है।”
रिपोर्ट में कहा गया, “राजनेता और मीडिया समलैंगिक तथा ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों पर जितनी गहनता से बात करते हैं, इस्लामवादी उतनी ही ज़ोरदार ढंग से क्वीरफ़ोबिया का प्रचार करते हैं।”
इस्लामवादी कंटेंट क्रिएटर ने समलैंगिकों को मृत्युदंड देने की माँग की
जहाँ ब्रिटेन में भी समलैंगिकों के ख़िलाफ़ इस्लामवादी बयानबाज़ी में उछाल देखा जा रहा है, वहीं घृणा-भाषण पर सख़्त क़ानूनों के बावजूद ब्रिटिश अधिकारी इस्लामवादी प्रचारकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से हिचकते रहे हैं।
4 अक्तूबर को ब्रिटिश मुस्लिम कंटेंट क्रिएटर मुहम्मद सैफ़ुल्लाह (Muhammad Saifullah) ने लियम टफ़्स पॉडकास्ट से कहा कि अगर वे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री होते, तो समलैंगिकों को गिरफ़्तार करते, उन पर मुक़दमा चलाते और उन्हें मृत्युदंड देते। इस इन्फ़्लुएंसर ने यह भी कहा कि वे व्यभिचारियों को पत्थर मारते और धर्मत्यागियों को यातना देकर मार डालते।
क्रिश्चियन कंसर्न में इस्लाम विशेषज्ञ और सार्वजनिक नीति प्रमुख टिम डिएप (Tim Dieppe) ने Focus on Western Islamism (FWI) से कहा, “प्रगतिशील अभिजन हमेशा इस्लाम की ख़ुशामद करने की कोशिश करते रहे हैं, इस ग़लत धारणा के आधार पर कि सभी धर्म बराबर हैं। इस रिपोर्ट को उन्हें वहीं रोक देना चाहिए।”
The Challenge of Islam: Understanding and Responding to Islam’s Increasing Influence in the UK के लेखक डिएप ने ज़ोर देकर कहा, “इस्लाम LGBTQ+ अधिकारों के प्रति बेहद असहिष्णु है, यहाँ तक कि इस्लामवादी LGBTQ+ लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा का सहारा लेंगे। क्या यह इस्लाम के साथ वामपंथ के सहयोग को चुनौती देगा? देना तो चाहिए।”
विशेषज्ञों ने जिहादवाद और क्वीर-विरोधी हिंसा के बीच बढ़ते संबंध रेखांकित किए
हालाँकि BfV का दस्तावेज़ किसी यूरोपीय ख़ुफ़िया एजेंसी की पहली ऐसी रिपोर्ट है, जो इस्लामवाद को LGBTQ+ विरोधी हिंसा से जोड़ती है, लेकिन जिहादवाद पर काम करने वाले शोधकर्ता क्वीर समुदायों के लिए इस्लामवादी ख़तरे की ओर इशारा करते रहे हैं।
क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन पार्टी के सदस्य और बर्लिन के “लेस्बियन्स एंड गेज़ इन द यूनियन” का नेतृत्व करने वाले रेने पोविलाइट (Rene Powilleit) ने कहा, “बर्लिन में क्वीर जीवन लंबे समय से चरमपंथियों और इस्लामवादियों के दबाव में रहा है, लेकिन यह हमला एक नया और भयावह आयाम दर्शाता है।”
पोविलाइट ने लिखा, “चेतावनी के संकेत लंबे समय से मौजूद थे। 2021 में ही ड्रेसडेन में एक समलैंगिक जोड़े पर एक इस्लामवादी ने हमला किया था और एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।” “यहाँ हमारा सामना अकेले-दुकेले हमलावरों से नहीं, बल्कि एक ऐसे माहौल से है, जिसमें कट्टरपंथी विचारधाराएँ पनपती हैं और जानबूझकर खुले समाजों को निशाना बनाती हैं।”
उन्होंने चेताया, “हमें हक़ीक़त से आँख मिलाकर देखना होगा: राजनीतिक इस्लाम हमारे पश्चिमी, उदार और स्वतंत्र सहजीवन के तरीक़े के लिए सबसे बड़े ख़तरों में से एक है।” “हमें इस विचारधारा पर एक ईमानदार और मज़बूत बहस चाहिए और जर्मनी में इस्लामवादी ढाँचों के प्रति हर तरह की भोलेपन और समर्थन का अंत चाहिए।”
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