सोमालिया से तुर्की की गहराती साझेदारी की सियासी हदें
सोमालिया तुर्की की सुरक्षा मदद पर निर्भर रह सकता है, लेकिन वह तुर्की की विदेश नीति पर आँख मूँदकर मुहर नहीं लगाएगा।
निकोलिटा कौरूशी साइप्रस में रहने वाली राजनीतिक वैज्ञानिक और पत्रकार हैं। उनका काम Phileleftheros अख़बार, Modern Diplomacy और Geostrategic Forecasting Corporation जैसे प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ पिरेयस (University of Piraeus) से अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय अध्ययन में MSc की डिग्री हासिल की है।

तुर्की ने अफ़्रीका में अपनी सबसे गहरी साझेदारियों में से एक सोमालिया के साथ बनाई है। वह सोमाली बलों को प्रशिक्षण देता है, मोगादिशू में अपना सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अड्डा चलाता है, समुद्री सुरक्षा में सहयोग करता है और अब अपतटीय ऊर्जा अन्वेषण तक विस्तार कर चुका है। अक्टूबर की शुरुआत में यह रिश्ता एक क़दम और आगे बढ़ा, जब राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने घोषणा की कि तुर्की ने देश में एक अंतरिक्ष केंद्र का निर्माण शुरू कर दिया है। फिर भी इस साझेदारी की गहराई का मतलब यह ज़रूरी नहीं कि राजनीतिक तालमेल भी उतना ही हो।
साइप्रस को लेकर हाल में हुआ विवाद इसकी मिसाल है। सोमालिया की संसद के नए अध्यक्ष अब्दुलकादिर मोहम्मद नूर (Abdulkadir Mohamed Nur) ने तुर्की साइप्रस के अधिकारी ज़िया ओज़तुर्कलर (Ziya Öztürkler) को अपने चुनाव पर बधाई देने के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें “उत्तरी साइप्रस का तुर्की गणराज्य” का अध्यक्ष कहा—यह उत्तरी साइप्रस में तुर्की समर्थित वह इकाई है, जिसे सिर्फ़ तुर्की मान्यता देता है। अब्दुलकादिर ने बाद में अपनी पोस्ट हटा दी। इसके बाद सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने औपचारिक स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि इस संवाद का मतलब न तो विदेश नीति में बदलाव है और न ही उत्तरी साइप्रस में किसी अलग इकाई को मान्यता देना। मोगादिशू ने साइप्रस गणराज्य की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने समर्थन को दोहराया।
अंकारा के साथ मोगादिशू के रिश्ते को देखते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट करने का यह फ़ैसला ध्यान देने योग्य है। अंकारा ने वर्षों से देश की सुरक्षा संस्थाओं को मज़बूत करने पर काम किया है, जबकि 10 साल के रक्षा और आर्थिक सहयोग समझौते ने इस साझेदारी को और गहरा किया है तथा अंकारा को सोमालिया की नौसेना के निर्माण और उसे सुसज्जित करने में मदद के लिए प्रतिबद्ध किया है।
फिर भी साइप्रस पर इस देश का रुख़ तुर्की के साथ उसकी साझेदारी की क़ीमत पर नहीं आया। 10 सितंबर 2026 को तुर्की और सोमाली अधिकारी अपने रणनीतिक रिश्ते पर एक फ़ोरम के लिए मोगादिशू में मिले। उसी महीने बाद में सोमालिया के रक्षा मंत्री ने तुर्की प्रशिक्षण अड्डे TURKSOM के कमांडर और एक तुर्की सैन्य प्रतिनिधिमंडल से आगे के सहयोग और प्रशिक्षण पर चर्चा की। अक्टूबर की शुरुआत तक यह रिश्ता एक और क्षेत्र में बढ़ रहा था। तुर्की के नए राजदूत और TURKSOM के कमांडर ने उस इलाक़े का दौरा किया, जहाँ अंकारा अपना अंतरिक्ष केंद्र विकसित कर रहा है, और इसके थोड़े ही समय बाद एर्दोआन ने घोषणा की कि निर्माण शुरू हो चुका है।
इससे साइप्रस पर सोमालिया की प्रतिक्रिया और अहम हो जाती है। अफ़्रीका में अंकारा के सबसे क़रीबी साझेदारों में से एक ने साफ़ कर दिया कि तुर्की की सुरक्षा मदद पर निर्भरता का मतलब तुर्की की विदेश नीति पर आँख मूंदकर मुहर लगाना नहीं है।
सोमालिया के पास तेज़ी से क़दम उठाने के ठोस कारण थे। तुर्की-नियंत्रित उत्तरी हिस्से को मान्यता देने से उसकी अपनी क्षेत्रीय अखंडता के लिए दिक़्क़तें पैदा होतीं। मोगादिशू सोमालीलैंड की स्वतंत्रता को ख़ारिज करता है और सोमालिया की मौजूदा सीमाओं को बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन चाहता है। साइप्रस में किसी अलग इकाई का समर्थन करने से इस रुख़ को एकरूपता के साथ निभाना मुश्किल हो जाता।
यह चिंता आज भी बनी हुई है। अक्टूबर की शुरुआत में सोमालिया ने मिस्र, इरिट्रिया और सूडान के साथ मिलकर सोमालीलैंड को मान्यता देने या उसका समर्थन करने को ख़ारिज किया। मोगादिशू के लिए क्षेत्रीय अखंडता महज़ वह क़ानूनी दलील नहीं है, जो उसने साइप्रस प्रकरण पर जवाब देने के लिए इस्तेमाल की थी, बल्कि यह विदेश नीति की तात्कालिक चिंता बनी हुई है।
सोमालीलैंड पहले ही इस विरोधाभास का फ़ायदा उठा चुका था। अब्दुलकादिर की पोस्ट के बाद सोमालीलैंड के अधिकारियों ने ग्रीस और साइप्रस से सोमालीलैंड को मान्यता देने पर विचार करने की अपील की और सोमालिया पर आरोप लगाया कि वह साइप्रस और अपने ख़ुद के क्षेत्रीय विवाद पर अलग-अलग मानदंड लागू करता है। निकोसिया सोमालिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन जारी रखे हुए है और उसने सोमालीलैंड को मान्यता नहीं दी है।
यही सवाल सोमालिया से आगे भी जाता है, क्योंकि तुर्की अफ़्रीका में अन्य जगहों पर भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। रक्षा समझौतों, सैन्य प्रशिक्षण, व्यावसायिक निवेश और बुनियादी ढांचे ने अंकारा को पूरे महाद्वीप में बड़ी भूमिका दी है, लेकिन सोमालिया इस तरीक़े की सीमाओं को दर्शाता है।
यह स्थिति वॉशिंगटन के लिए उन सरकारों से जुड़ने के अवसर पैदा करती है, जिन्होंने तुर्की के साथ क़रीबी साझेदारियाँ बनाई हैं। अफ़्रीका में तुर्की का प्रभाव—ख़ासकर उसका ड्रोन निर्यात—अस्थिरता फैलाने वाला है और अक्सर अमेरिकी हितों को नुक़सान पहुँचाता है। लेकिन अगर महाद्वीप पर तुर्की का सबसे बड़ा सहयोगी तुर्की को ना कह सकता है, तो अमेरिकी विदेश मंत्रालय को चाहिए कि वह तुर्की की पहुँच को और आक्रामक ढंग से कुंद करे और दिखाए कि तुर्की के रुख़ अक्सर उन्हीं देशों के राष्ट्रीय हितों को कैसे नुक़सान पहुँचाते हैं, जिन्हें तुर्की व्यावहारिक रूप से उपनिवेश की तरह बरतना पसंद करता है।
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