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अफ़्रीकी साझेदारों की विदाई के बाद क्या सोमालिया में और उतरेगा तुर्की

अल-शबाब के हमलों में कमी सुरक्षा योजना की सफलता जितनी ही आसानी से समझौते का संकेत भी हो सकती है।

Siyad Madey नैरोबी स्थित वकील और नीति विश्लेषक हैं। उन्हें पूर्वी अफ़्रीका और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। इससे पहले उन्होंने केन्या के नेशनल बैंक में 15 वर्षों से अधिक समय तक काम किया।

A Somali police officer oversees traffic in Mogadishu, Somalia.
सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में यातायात की निगरानी करता एक सोमाली पुलिसकर्मी। · Shutterstock

26 सितंबर 2026 को सोमालिया के रक्षा मंत्री अहमद मोअल्लिम फ़िकी (Ahmed Moallim Fiqi) ने घोषणा की कि मोगादिशु में अल-शबाब के हमले 2023 के बाद से लगभग 87 प्रतिशत घट गए हैं। उनकी सरकार इस रिकॉर्ड के ज़रिए यह दिखाना चाहती है कि तुर्की के साथ सोमालिया की साझेदारी के लाभ मिल रहे हैं। लेकिन अगर सोमालिया की सुरक्षा स्थिति को क़रीब से देखा जाए, तो संकेत मिलते हैं कि तुर्की की दिलचस्पी राष्ट्रपति हसन शेख़ मोहमूद (Hassan Sheikh Mohamud) के शासन का इस्तेमाल हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में अपनी पैठ और मोहमूद के साथ अपनी मुनाफ़े वाली साझेदारी को और मज़बूत करने में ज़्यादा है, और देश में वास्तविक सुरक्षा लाने में कम। नतीजतन, सोमालिया की स्थिरता लगातार अधिक नाज़ुक दिखती जा रही है। तुर्की ने सोमालिया में अरबों डॉलर का निवेश किया है। हालात जल्द ही राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन को यह तय करने पर मजबूर कर सकते हैं कि वह इस निवेश की सैन्य रूप से रक्षा करने के लिए कितनी दूर तक जाने को तैयार हैं।

फ़िकी का यह बयान युगांडा की सेना द्वारा तुर्की के साथ सैन्य सहयोग स्थगित किए जाने के ठीक एक हफ़्ते बाद आया। सार्वजनिक तौर पर वजह अंकारा का युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी (Yoweri Museveni) के आलोचक एक ब्लॉगर को प्रत्यर्पित करने से इनकार बताया गया, लेकिन असली मक़सद शायद मोहमूद की वह माँग थी कि युगांडा सोमालिया में अपनी तैनाती ख़त्म करे—उनका तर्क है कि तुर्की से प्रशिक्षित सोमाली ब्रिगेड राजधानी को संभाल सकती हैं। यह संकट भी उसी सिलसिले की एक और मिसाल है जिसमें सोमालिया, पूरे अफ़्रीका में एर्दोआन की धौंसबाज़ी और तू-तू-मैं-मैं में, ख़ुद को घसीटे जाने दे रहा है।

ख़बरों के मुताबिक़ तुर्की ने क़रीब 35,000 सोमाली सैनिकों को प्रशिक्षण दिया है, फिर भी तुर्की समर्थित बल सुरक्षा देने में नाकाम दिखते हैं। मोगादिशु से क़रीब 18 मील दूर बसरा 2011 के बाद से एक दर्जन से ज़्यादा बार हाथ बदल चुका है। अगस्त 2026 में सेना और तुर्की से प्रशिक्षित पुलिस इकाई हरमचाद (Haramcad) ने वहाँ एक हफ़्ते से ज़्यादा लड़ाई लड़ी, लेकिन 9 सितंबर तक स्थानीय सूत्रों ने सोमाली प्रसारक काब (Kaab) को बताया कि सरकारी सैनिक राजधानी के एक ज़िले दयनीले की ओर पीछे हट गए, जिससे अल-शबाब ने अफ़गोए सड़क के किनारे बिना लड़े ही इलाक़ा हासिल कर लिया।

सोमालिया एक संघीय गणराज्य है, जिसमें सदस्य-राज्यों को संविधान के तहत व्यापक स्वायत्तता हासिल है। लेकिन तुर्की के सहयोग और शायद उसके उकसावे के साथ मोहमूद देश को मोगादिशु के शासन के तहत केंद्रीकृत करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे न सिर्फ़ उत्तर में पुंटलैंड के साथ, बल्कि दक्षिण पश्चिम राज्य (South West State) और जुबालैंड के साथ भी विवाद खड़े हुए हैं।

28 सितंबर को दक्षिण पश्चिम राज्य के राष्ट्रपति अब्दिअज़ीज़ हसन मोहम्मद लफ़्तागरीन (Abdiaziz Hassan Mohamed Laftagareen) के वफ़ादार लड़ाके बैदोआ में दाख़िल हुए; लफ़्तागरीन को ख़ुद मोहमूद से विवाद के बाद 30 मार्च 2026 को हटा दिया गया था। 17 अगस्त 2026 के बाद से वहाँ लड़ाई का यह तीसरा दौर था। सोमालिया के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि अल-शबाब और लफ़्तागरीन की मिलिशिया का विलय हो गया है, लेकिन यह वास्तविकता से ज़्यादा उस पैटर्न का हिस्सा लगता है जिसमें मोहमूद सैन्य कार्रवाई को जायज़ ठहराने के लिए अपने राजनीतिक विरोधियों को अल-शबाब से जोड़ देते हैं। उधर तुर्की उनका खेल खेलने को तैयार दिखता है—बशर्ते मोहमूद अंकारा को मुनाफ़े वाले ठेके और सैन्य मौजूदगी देते रहें।

हालाँकि तुर्की अपने सैनिकों को अग्रिम मोर्चे पर उतारने से हिचकता रहा है—और इसकी दो वजहें हैं। पहली सीधी-सादी है: वह क़बीलाई लड़ाई में घसीटा जाना नहीं चाहता। उतनी ही अहम वजह यह है कि वह इथियोपिया से टकराव से बचना चाहता है, जिसके बल अफ़्रीकी संघ मिशन के तहत इस क्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बजाय तुर्की ज़ाहिर तौर पर मोगादिशु में तैनात ड्रोन और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करता है। हाल ही में इसका इस्तेमाल 3 सितंबर 2026 को दूलो में हुए एक रहस्यमय हवाई हमले में हुआ। सोमाली लोग तुर्की के ज़िम्मेदारी से इनकार को भरोसेमंद नहीं मानते।

29 सितंबर को मोहमूद क्षेत्रीय सुरक्षा पर इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद से बात करने के लिए अदीस अबाबा गए। नैरोबी में रहने वाले और अच्छे संपर्कों वाले विश्लेषक रशीद अब्दी (Rashid Abdi) ने लिखा कि मोगादिशु बैदोआ पर नियंत्रण खो रहा है और चाहता है कि इथियोपियाई सैनिक लड़ाई में शामिल हों।

इथियोपिया के राज़ी होने की संभावना कम है। महज़ दो साल पहले मोहमूद ने हर इथियोपियाई सैनिक को सोमालिया से बाहर निकालने की धमकी दी थी; इसलिए प्रधानमंत्री अबी अहमद मोहमूद की माँग को लेकर संशय में हैं, ख़ासकर तब जब मोहमूद की हरकतों के चलते युगांडाई सैनिकों की वापसी हुई। इथियोपिया के लिए मोहमूद की यह माँग इससे बुरे वक़्त पर नहीं आ सकती थी। इथियोपिया के तिग्रे क्षेत्र में और इरिट्रिया की सीमा पर फिर से युद्ध भड़क उठा है। अफ़्रीकी संघ की घटती फ़ंडिंग पहले ही इथियोपियाई सैनिकों को क़ानसाख़्दीरे से बाहर खींच चुकी है। उत्तरी इथियोपिया में बड़ा युद्ध इथियोपिया की सामूहिक वापसी की वजह बन सकता है, जिससे पैदा हुए ख़ालीपन को अल-शबाब भर सकता है।

लगता है मोहमूद समझ चुके हैं कि इथियोपियाइयों से उन्हें कोई सहारा नहीं मिलेगा। 2 अक्तूबर 2026 को सोमाली राष्ट्रपति मिस्र, इरिट्रिया और सूडान के नेताओं के साथ शिखर बैठक के लिए काहिरा पहुँचे, जिन सभी के इथियोपिया के साथ तनावपूर्ण रिश्ते हैं।

सोमालिया में जो हो रहा है, वह वॉशिंगटन के लिए मायने रखना चाहिए। फ़रवरी 2025 के बाद से ट्रंप प्रशासन ने सोमालिया में लगभग चार गुना हवाई और ड्रोन हमले किए हैं, जितने बाइडन प्रशासन ने चार साल में किए थे, लेकिन अमेरिकी धैर्य सीमित है। वॉशिंगटन ने अफ़्रीकी संघ से कह दिया है कि वह साल के अंत तक इस मिशन के लिए संयुक्त राष्ट्र सहायता कार्यालय की फ़ंडिंग रोक देगा, क्योंकि ऐसी कोई ज़मीनी ताक़त नहीं है जो हवाई ताक़त से ख़ाली कराए गए इलाक़े को संभाल सके। मोहमूद भले ही तुर्की के गुण गाएँ, अमेरिकी विश्लेषकों को तुर्की से प्रशिक्षित सोमाली बलों पर वैसा भरोसा नहीं है।

हालाँकि अमेरिका के लिए यह संभव नहीं कि वह मोहमूद के स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों पर सोमाली या तुर्की की ओर से चिपकाए गए अल-शबाब के ठप्पे को मान ले, लेकिन अल-शबाब के उभार का डर वास्तविक है। प्रधानमंत्री हमज़ा अब्दी बर्रे ने माना है कि अल-शबाब के पूर्व सदस्य अब सरकार में काम कर रहे हैं, कुछ तो वरिष्ठ पदों पर। अफ़्रीका सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (Africa Center for Strategic Studies) का अनुमान है कि अल-शबाब वसूली के ज़रिए सालाना क़रीब $100 मिलियन जुटाता है और मोगादिशु की पुलिस के 30 प्रतिशत तक लोग समझौता कर चुके हो सकते हैं। व्यापारी बताते हैं कि वे राज्य और विद्रोहियों, दोनों को कर देते हैं। हमलों की घटती दर सुरक्षा योजना की सफलता जितनी ही आसानी से समझौते का संकेत भी हो सकती है। हालाँकि, जब अल-शबाब मोगादिशु से महज़ एक दर्जन मील से कुछ ही ज़्यादा दूरी पर इलाक़ा हासिल कर रहा हो, तो सैन्य कामयाबी का दावा करना मुश्किल है।

अब तुर्की के सामने एक विकल्प है: अगर इथियोपिया भी युगांडा की तरह अल-शबाब विरोधी अभियानों को स्थगित कर देता है, तो तुर्की को या तो यह मानना होगा कि अपने निवेश को सुरक्षित करने के लिए हवाई ताक़त और प्रशिक्षण काफ़ी नहीं होंगे। उसे या तो सीधे लड़ाई में उतरना पड़ सकता है या अल-शबाब को अपने साथ मिलाना पड़ सकता है। किसी भी सूरत में, सोमालिया में तुर्की के निवेश की क़ीमत—ख़ून और ख़ज़ाने, दोनों के लिहाज़ से—आसमान छूने की कगार पर दिखती है।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Will Turkey Double Down on Somalia as Mogadishu’s African Partners Depart?

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