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क्या तुर्की का UN महासचिव अमेरिकी हितों के अनुकूल होगा

वॉशिंगटन को फ़ेरिदुन सिनिरलिओलू के सुधार-प्रस्तावों और सुरक्षा परिषद के फ़ैसलों पर उनके रुख़ पर विचार करना चाहिए।

निकोलिटा कौरूशी साइप्रस में रहने वाली राजनीतिक वैज्ञानिक और पत्रकार हैं। उनका काम Phileleftheros अख़बार, Modern Diplomacy और Geostrategic Forecasting Corporation जैसे प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ पिरेयस (University of Piraeus) से अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय अध्ययन में MSc की डिग्री हासिल की है।

U. S. President Donald Trump and Turkish President Recep Tayyip Erdoğan at a multilateral meeting on Middle Eastern issues at the United Nations Headquarters in New York; September 30, 2025.
सितंबर 2025 में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन। · Shutterstock

अगले संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में किसी तुर्की राजनयिक की संभावना ऐसे समय में सामने आई है, जब पूर्वी भूमध्यसागर में अमेरिकी कूटनीति के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हैं। वॉशिंगटन ने ग्रीस और साइप्रस के साथ अपनी सुरक्षा साझेदारियां और गहरी की हैं, जबकि तुर्की के इन दोनों देशों के साथ रिश्ते अब भी तनावपूर्ण हैं। तुर्की सैनिक उत्तरी साइप्रस में अब भी तैनात हैं और समुद्री सीमाओं तथा ईजियन द्वीपों की स्थिति को लेकर अंकारा और एथेंस के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे माहौल में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष पद के लिए तुर्की के पूर्व विदेश मंत्री फ़ेरिदुन सिनिरलिओलू (Feridun Sinirlioğlu) का समर्थन करने से वॉशिंगटन को आख़िर क्या हासिल होगा?

हालाँकि सिनिरलिओलू ने एंतोनियो गुटेरेस की जगह लेने की दौड़ में आधिकारिक तौर पर प्रवेश नहीं किया है, रिपोर्टों के मुताबिक़ अंकारा ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से उनकी संभावनाओं को लेकर टटोलने वाली बातचीत की है। फ़्रांस ने किसी तुर्की उम्मीदवार को लेकर आपत्तियाँ जताई हैं। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने 12 अक्टूबर, 2026 को PassBlue से कहा कि वह उनकी उम्मीदवारी पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी अंतिम फ़ैसला नहीं किया गया है।

उनका करियर विचार के योग्य है। वे 2002 से 2007 तक इसराइल में तुर्की के राजदूत रहे और 2015 में विदेश मंत्री रहे। उन्होंने 2016 से 2023 के बीच संयुक्त राष्ट्र में तुर्की का प्रतिनिधित्व किया, और दिसंबर 2024 में उन्हें यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (OSCE) का महासचिव नियुक्त किया गया। ख़ास बात यह है कि तुर्की के साथ जारी विवादों के बावजूद ग्रीस ने उनकी नियुक्ति का समर्थन किया था।

साइप्रस को लेकर सिनिरलिओलू का रिकॉर्ड प्रासंगिक है। मई 2022 में सिनिरलिओलू ने गुटेरेस को पत्र लिखकर दावा किया था कि 1960 में बनी साझेदारी-राज्य व्यवस्था 1963 में समाप्त हो गई थी। उन्होंने तुर्की साइप्रस वासियों के लिए संप्रभु समानता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता की अंकारा की माँग की वकालत की, जिस रुख़ को साइप्रस गणराज्य ने ख़ारिज कर दिया। 2017 में उन्होंने तुर्की का यह दावा भी आगे बढ़ाया था कि साइप्रस के विशेष आर्थिक क्षेत्र का एक हिस्सा (ब्लॉक 6) तुर्की के महाद्वीपीय शेल्फ़ से ओवरलैप करता है, जिसे निकोसिया भी ख़ारिज करता है।

सिनिरलिओलू ने ये तर्क तुर्की के प्रतिनिधि के तौर पर रखे थे, इसलिए इससे अपने-आप यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि महासचिव के रूप में वे कैसा रुख़ अपनाएंगे। फिर भी, उनका यह अतीत संयुक्त राष्ट्र के लिए दोनों पक्षों के बीच भरोसा फिर से बहाल करना और मुश्किल कर सकता है। महासचिव दूत नियुक्त करता है, वार्ताओं की निगरानी करता है और सुरक्षा परिषद को रिपोर्ट देता है। साइप्रस में, जहाँ वर्षों की संयुक्त राष्ट्र मध्यस्थता के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल सका है, इस पद पर भरोसा बेहद अहम है।

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिडिस (Nikos Christodoulides) ने किसी तुर्की उम्मीदवार के विचार का विरोध किया है। 2 अक्टूबर को सिनिरलिओलू संबंधी रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने तर्क दिया कि तुर्की का आचरण इस पद की ज़िम्मेदारियों से मेल नहीं खाता और अंकारा पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया। उनकी आलोचना तुर्की की नीतियों पर केंद्रित थी, सिनिरलिओलू के व्यक्तिगत अनुभव पर नहीं। 13 अक्टूबर को क्रिस्टोडुलिडिस ने यह भी ज़ोर देकर कहा कि जो भी महासचिव बनेगा, वह साइप्रस पर सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों से बँधा होगा।

यह अंतर इसलिए अहम है क्योंकि परिषद लंबे समय से द्वि-क्षेत्रीय, द्वि-सामुदायिक संघीय ढाँचे का समर्थन करती रही है, जबकि तुर्की दो-राज्य समाधान का समर्थक है। सिनिरलिओलू ख़ुद को ऐसी प्रक्रिया में मध्यस्थता करते पाएंगे, जहाँ अंकारा के पक्ष में की गई उनकी पिछली वकालत परिषद के स्थापित ढाँचे से टकराती है।

वॉशिंगटन के साथ तुर्की का रिश्ता एक और अड़चन है। दोनों देशों के NATO सहयोगी होने के बावजूद, अंकारा द्वारा रूस की S-400 मिसाइल प्रणाली की ख़रीद और सीरिया में अमेरिकी नीति को लेकर तनाव रहे हैं। लीबिया में तुर्की की सैन्य संलिप्तता, पूर्वी भूमध्यसागर में उसके समुद्री दावे और इसराइल के साथ उसके तनावपूर्ण रिश्तों ने भी अमेरिकी कूटनीति को जटिल बनाया है।

सीरिया इसका साफ़ उदाहरण है, जहाँ हित टकराते हैं। अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट (ISIS) के ख़िलाफ़ कुर्द नेतृत्व वाली सेनाओं के साथ साझेदारी की है, जबकि तुर्की प्रमुख कुर्द मिलिशिया को आतंकवादी समूह मानता है। तुर्की ने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप किया है और विपक्षी गुटों का समर्थन किया है। वहीं संयुक्त राष्ट्र ने राजनीतिक वार्ता और मानवीय सहायता पर ध्यान केंद्रित रखा है। महासचिव के रूप में सिनिरलिओलू को ऐसी सरकारों के साथ काम करना होगा जिनके हित अंकारा के विपरीत हैं, और साथ ही सबको अपनी स्वतंत्रता का भरोसा भी दिलाना होगा।

ख़बरों के मुताबिक़ ट्रंप प्रशासन ने गुटेरेस के उत्तराधिकारी की तलाश में संयुक्त राष्ट्र सुधार को प्राथमिकता दी है। वॉशिंगटन को सिनिरलिओलू के सुधार संबंधी विचारों के साथ-साथ सुरक्षा परिषद के फ़ैसलों पर उनके रुख़ पर भी विचार करना चाहिए। लेकिन उनकी राजनयिक योग्यताएँ प्रभावशाली होने के बावजूद, अनुभव भर से यह नहीं पता चलता कि अपनी पूर्व सरकार से जुड़े विवादों को वे कैसे संभालेंगे।

वॉशिंगटन के लिए सिनिरलिओलू का समर्थन करने के जोखिम संभावित लाभों से भारी दिखते हैं। उनकी नियुक्ति से तुर्की और अमेरिकी साझेदारों के बीच के विवाद नहीं सुलझेंगे और ऐसा कोई संकेत भी नहीं है कि इससे अमेरिका-तुर्की रिश्ते बेहतर होंगे। उलटे, इससे साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता और कठिन हो सकती है और अमेरिकी सुरक्षा के लिए अहम सरकारों के साथ तनाव बढ़ सकता है।

हालाँकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन की बात मान लेते हैं, ट्रंप ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें एर्दोआन के इस वादे पर यक़ीन है कि तुर्की ऐसी सुरक्षा भूमिका निभा सकता है, जिससे अमेरिका इस क्षेत्र से हट सके। लेकिन सिनिरलिओलू का समर्थन करने से वह उद्देश्य पूरा नहीं होगा। किसी मज़बूत रणनीतिक लाभ के बिना यह समझना कठिन है कि वॉशिंगटन उनकी उम्मीदवारी का समर्थन क्यों करेगा।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Would a Turkish U.N. Secretary-General Serve American Interests?

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