अफ़रीन से ज़मीनी रिपोर्ट: विस्थापित कुर्दों की वापसी की संभावनाएँ
उत्तर-पश्चिमी सीरिया में संपत्ति की वापसी, सुरक्षा हालात और अल्पसंख्यक अधिकारों का जायज़ा।
मुख्य बिंदु
- फ़ील्ड वर्क, इंटरव्यू और ओपन सोर्स रिसर्च से पता चलता है कि अफ़रीन न तो उतना आदर्श है जितना संक्रमणकालीन सरकार के समर्थक बताते हैं और न ही उतना क़ानूनविहीन इलाक़ा है जितना SDF के कुछ समर्थक चित्रित करते हैं।
- कुर्द वाक़ई अफ़रीन लौट रहे हैं या वहाँ आ-जा रहे हैं, सार्वजनिक रूप से कुर्द भाषा बोल रहे हैं, शादियाँ कर रहे हैं और अपनी मर्ज़ी से कपड़े पहन रहे हैं, और उन्हें अधिकारियों की ओर से परेशान किए जाने का स्पष्ट डर नहीं दिखता।
- संपत्ति अधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेही की संभावना कम लगती है, और अफ़रीन में उल्लंघनों के आरोपी SNA समूहों के प्रमुख चेहरे नई सेना में वरिष्ठ पदों पर हैं।

अफ़रीन क्षेत्र और कुर्द आबादी
मिडिल ईस्ट फ़ोरम (Middle East Forum) के एक फ़ील्ड असाइनमेंट के तौर पर तैयार कराई गई यह रिपोर्ट तुर्की की सीमा से सटे उत्तर-पश्चिमी सीरिया के अफ़रीन क्षेत्र की गहन पड़ताल करती है। यह इलाक़ा युद्ध से पहले और 2018 तक कुर्द-बहुल आबादी के लिए जाना जाता था। 2018 में तुर्की समर्थित सीरियाई विद्रोहियों के नेतृत्व में हुए हमले के दौरान कुर्दों की बड़ी आबादी विस्थापित हुई; “ऑलिव ब्रांच” नामक इस अभियान के तहत विद्रोहियों ने इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया था। अफ़रीन क्षेत्र में सीरियाई सरकारी अधिकारियों के साथ किए गए साक्षात्कारों, क्षेत्र के भीतर यात्रा और अन्य स्रोतों पर आधारित यह रिपोर्ट असद शासन के पतन के बाद की स्थिति पर केंद्रित है, ख़ासकर मूल रूप से विस्थापित कुर्द आबादी की वापसी की संभावना पर। रिपोर्ट अफ़रीन क्षेत्र के छोटे यज़ीदी अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति का भी विश्लेषण करती है।
अफ़रीन क्षेत्र की पृष्ठभूमि
अफ़रीन क्षेत्र अलेप्पो प्रांत के उत्तर-पश्चिमी छोर पर है और तुर्की से सटा है। सीरिया के भीतर इसकी आंतरिक सीमाएँ मोटे तौर पर इसके पूर्व में आज़ाज़ क़स्बे तथा इसके दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में क्रमशः नुब्ल[i] और अतमेह क़स्बों से तय होती हैं। इसका प्रमुख केंद्र क्षेत्र के मध्य में स्थित अफ़रीन शहर है। हालाँकि अफ़रीन शहर की उत्पत्ति अपेक्षाकृत हाल की है (सीरिया में फ़्रांसीसी मैंडेट के दौर से इसका विकास शुरू हुआ), आम तौर पर यह माना जाता है कि क्षेत्र की कुर्द आबादी स्थानीय मूल की थी और संभवतः क्षेत्र की आबादी में बहुमत में थी। युद्ध से पहले अफ़रीन क्षेत्र में एक अरब अल्पसंख्यक आबादी भी बसी हुई थी, जिसकी जड़ें उत्तर-पूर्वी सीरिया के जज़ीरा क्षेत्र (यानी फ़रात नदी के पूर्व) से पहले हुए प्रवास से जुड़ी हैं।[ii]
जैसे-जैसे सीरिया गृहयुद्ध में धँसता गया, असद शासन के सामने शुरू से ही एक अहम समस्या दूरदराज़, मुख्यतः ग्रामीण इलाक़ों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए प्रभावी जनशक्ति की कमी थी। इसलिए 2012 से शासन ने देश के कुछ हिस्सों से सामरिक ढंग से पीछे हटना शुरू किया, ख़ासकर तुर्की से लगती सीरिया की उत्तरी सीमा के कुर्द-बहुल इलाक़ों से। इन वापसी कदमों से बने शून्य को मुख्य रूप से कुर्द नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक यूनियन पार्टी (PYD) ने भरा, जो कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) से जुड़ी है। PYD ने अपनी सशस्त्र शाखा—पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (YPG)[iii]—के ज़रिये सुरक्षा नियंत्रण क़ायम किया और “ऑटोनॉमस एडमिनिस्ट्रेशन” (Autonomous Administration) नाम से अपनी व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी की, जिसमें अफ़रीन क्षेत्र को “कैंटन” घोषित किया गया।
युद्ध के शुरुआती वर्षों में, विद्रोही-नियंत्रित इलाक़ों की तुलना में PYD की शासन-व्यवस्था के कुछ फ़ायदे थे। PYD आम तौर पर शासन के प्रति सक्रिय शत्रुता की नीति नहीं अपनाती थी; उसकी दिलचस्पी मुख्यतः उन कुर्द-बहुल इलाक़ों पर नियंत्रण में थी, जहाँ से शासन पीछे हट चुका था। इसका नतीजा यह रहा कि PYD-नियंत्रित इलाक़े आम तौर पर उन हवाई हमलों और अभियानों से बचे रहे, जो शासन विद्रोही-नियंत्रित क्षेत्रों पर करता था। इसके अलावा, PYD की व्यवस्था का व्यावहारिक अर्थ यह था कि एक ही गुट का बड़े और सटे हुए भूभाग पर वर्चस्व रहा; इसके उलट विद्रोही-नियंत्रित इलाक़ों में अक्सर कई गुटों का शासन होता था और इसलिए वहाँ अराजकता अधिक थी। इसी वजह से जब अफ़रीन कैंटन अस्तित्व में था, तो उसे अलेप्पो प्रांत के दूसरे हिस्सों के मुक़ाबले सुरक्षा और शांति देने वाला इलाक़ा माना जाता था।[iv] दूसरी ओर PYD की व्यवस्था की आलोचना अनिवार्य भर्ती, सत्तावादी चहेतावाद और विकास परियोजनाओं में नाममात्र या शून्य प्रगति को लेकर भी होती रही।[v]
विद्रोहियों और असद शासन के राजनीतिक विपक्ष के नज़रिये से PYD को कथित तौर पर शासन का सहयोगी मानते हुए संदेह की नज़र से देखा जाता था। इसके साथ ही, उसके स्वायत्त प्रशासन परियोजना की अक्सर इस आधार पर निंदा की जाती थी कि यह सीरिया को बाँटने की कोशिश है, जबकि विद्रोह और विपक्ष एक ही केंद्रीय सत्ता के तहत एकीकृत सीरिया को प्राथमिकता देते थे। अफ़रीन क्षेत्र के संदर्भ में PYD को लेकर संदेह इसलिए भी बढ़ा कि अफ़रीन कैंटन ने घिरे हुए, शासन-समर्थक शिया क़स्बों नुब्ल और अल-ज़हरा के लिए जीवनरेखा का काम किया (2012-2016), क्योंकि इन दोनों क़स्बों के निवासी अफ़रीन कैंटन से खाद्य आपूर्ति और अन्य सामान जुटा सकते थे।[vi] इसके अलावा, 2016 की शुरुआत में जब शासन और उसके विदेशी सहयोगी अलेप्पो शहर के विद्रोही-नियंत्रित हिस्सों को घेरने की कोशिश कर रहे थे और इसी घेराबंदी के तहत अलेप्पो शहर के उत्तर की ओर बढ़ रहे थे, तब YPG ने—SDF (सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़, जिसे ख़ुद अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ युद्ध के हिस्से के रूप में गढ़ा था)[vii] के नाम तले काम करते हुए—फ़रवरी 2016 में विद्रोहियों से तेल रिफ़अत क़स्बा और आसपास के अन्य इलाक़े छीन लिए, जिससे अधिकांश स्थानीय आबादी विस्थापित हो गई। यह क़दम संभवतः इसलिए उठाया गया क्योंकि YPG को उम्मीद थी कि उत्तरी अलेप्पो के ग्रामीण इलाक़ों में विद्रोही ढह जाएँगे और अंततः वह फ़रात नदी के पूर्व में मौजूद SDF से जुड़ सकेगी।
यह उम्मीद पूरी नहीं हुई, क्योंकि अगस्त 2016 के अंत में तुर्की ने “यूफ्रेट्स शील्ड” अभियान के तहत उत्तरी अलेप्पो के ग्रामीण इलाक़ों में हस्तक्षेप किया और विभिन्न सीरियाई विद्रोही गुटों के लिए सैनिक तथा सैन्य सहायता भेजी। बाद में इन गुटों को “सीरियन नेशनल आर्मी” (SNA) नामक गुटों के गठबंधन में संगठित किया गया, जो मूल रूप से तीन कोर में बँटा था। इसके घटक गुटों को तुर्की की सैन्य और ख़ुफ़िया मशीनरी का अलग-अलग स्तर का भरोसा हासिल था।
हालाँकि “यूफ्रेट्स शील्ड” का तात्कालिक लक्ष्य इस्लामिक स्टेट था, जिसके नियंत्रण में अलेप्पो शहर के उत्तर में विद्रोही-नियंत्रित छोटे परिक्षेत्र के पूर्व की ओर उत्तरी अलेप्पो के ग्रामीण इलाके का बड़ा हिस्सा था, लेकिन तुर्की संभवतः अफ़रीन-आधारित YPG के आगे और फैलाव को रोकना भी चाहता था। PKK से संबंधों के कारण तुर्की YPG को सुरक्षा ख़तरा मानता था। YPG को सुरक्षा ख़तरा मानने की इसी धारणा के चलते तुर्की ने SNA सहयोगियों के साथ “ऑलिव ब्रांच” अभियान तैयार किया, अफ़रीन क्षेत्र पर हमला किया और 2018 की शुरुआत में YPG को वहाँ से निकाल बाहर किया। यह आक्रमण तब शुरू हुआ जब रूस ने अफ़रीन से अपनी प्रतीकात्मक मौजूदगी हटा ली और इस तरह व्यावहारिक रूप से कार्रवाई के लिए सहमति दे दी; वरना उसकी मौजूदगी ऐसे क़दम को रोकती। मारक क्षमता और जनशक्ति में भारी असंतुलन के सामने अफ़रीन में YPG की रक्षा-व्यवस्था तेज़ी से ढह गई और उसके बचे हुए लड़ाके अलेप्पो शहर के कुर्द इलाक़ों (जहाँ YPG की मौजूदगी भी थी) और तेल रिफ़अत क्षेत्र की ओर भाग गए।[viii]
इस अभियान के चलते स्थानीय कुर्द आबादी का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ। तुर्की सेना और विद्रोहियों के हाथों दुर्व्यवहार का स्वाभाविक डर होने के कारण वे अलेप्पो में शासन और YPG-नियंत्रित इलाक़ों तथा सीरिया के अन्य हिस्सों में SDF-नियंत्रित इलाक़ों की ओर भागे। इसके बाद SNA के गुटों ने मौक़ापरस्ती से इस विस्थापन का फ़ायदा उठाया और विस्थापित कुर्दों की बड़ी मात्रा में अचल संपत्तियाँ ज़ब्त कर लीं—चाहे वे रिहायशी घर हों, कारोबार हों या कृषि भूमि। देश के अन्य हिस्सों से विस्थापित कई सीरियाई सुन्नी अरब—जैसे दमिश्क़ का पूर्वी ग़ूता क्षेत्र, जिस पर शासन ने 2018 के वसंत में क़ब्ज़ा कर लिया था—विस्थापित कुर्दों की संपत्तियों में रहने लगे, जिससे वास्तविक अर्थों में जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ।
इसके अलावा, तुर्की सेना ने अफ़रीन क्षेत्र में सैन्य अड्डे स्थापित किए।[ix] इन अड्डों में से कुछ के स्थल अब भी मौजूद हैं, लेकिन तुर्की सैनिक आम तौर पर अड्डों के भीतर ही रहते हैं और चौकियाँ चलाने जैसी भूमिकाओं के ज़रिये क़ब्ज़ा करने वाली सेना की तरह काम नहीं करते। 2018-2024 की अवधि में तुर्की प्रभाव के निशान अधिकतर “आज़ाद सीरिया” के झंडे के साथ तुर्की के झंडे दिखाने और तुर्की व अरबी के द्विभाषी इस्तेमाल के रूप में नज़र आते हैं (उदाहरण के लिए उस समय स्थानीय परिषदों की ओर से लगाए गए होर्डिंग्स पर, जिनमें स्थानीय परिषदों और उनकी परियोजनाओं के लिए तुर्की समर्थन के प्रति आभार जताया गया था)।[x] अफ़रीन शहर में कुछ कारोबारों के शटर पर तुर्की का झंडा रंगा हुआ है, जो कुछ हद तक वैसा ही है, जैसा पहले शासन-नियंत्रित इलाक़ों में कई दुकानों पर उस शासन के प्रति दिखावटी वफ़ादारी के तौर पर पुराने शासन का झंडा रंगा जाता था।[xi]
शासन के पतन के बाद ज़ब्त संपत्ति की वापसी
SNA गुटों द्वारा किए गए व्यापक संपत्ति-अधिकार उल्लंघन महज़ SDF/YPG समर्थकों के आरोप नहीं हैं; दो अवलोकन इनकी तस्दीक करते हैं। पहला, अफ़रीन क्षेत्र में यात्रा के दौरान कुछ संपत्तियों पर SNA गुटों की लिखावट (ग्राफ़िटी) दिखती है, जिससे संकेत मिलता है कि किसी समय उन्होंने उन संपत्तियों को ज़ब्त किया था।[xii]
दूसरा, असद शासन के पतन के बाद बनी संक्रमणकालीन सरकार ने विस्थापितों को ज़ब्त संपत्तियाँ लौटाने के लिए तंत्र बनाए हैं। अगर अफ़रीन क्षेत्र में संपत्ति-अधिकार उल्लंघन कोई बड़ा मुद्दा नहीं होता, तो ऐसे तंत्र बनाए ही नहीं जाते।
संक्रमणकालीन सरकार की कार्रवाइयों के पीछे एक अहम वजह सीरिया में केंद्रीकृत सत्ता-व्यवस्था को लेकर उसकी परिकल्पना है। शासन गिरने से पहले अफ़रीन इलाक़ा तुर्की समर्थित SNA के एक परिक्षेत्र का हिस्सा था, जो प्रशासनिक रूप से इदलिब और उसके आसपास के उस क्षेत्र से अलग था, जिस पर हयात तहरीर अल-शाम (HTS) और उसकी साल्वेशन गवर्नमेंट (SG) का नियंत्रण था—इसी धड़े ने असद शासन को गिराने वाले अभियान की अगुवाई की। संक्रमणकालीन सरकार, जिसके सबसे अहम पद HTS और SG की हस्तियों के पास हैं,[xiii] ने पहले अलग-अलग रहे परिक्षेत्रों को एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था के तहत लाने की कोशिश की है। साथ ही संक्रमणकालीन सरकार SDF के इस दावे को खारिज करना चाहती है कि केवल विकेंद्रीकृत, संघीय व्यवस्था (जिसका मतलब होगा उत्तर और पूर्वी सीरिया में SDF की स्वायत्त व्यवस्था को केंद्र सरकार की मान्यता) ही सीरिया के जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की गारंटी दे सकती है। इसलिए केंद्र सरकार की दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से इस बात में है कि विस्थापित कुर्द लौटें और यह दिखाने की कोशिश हो कि अफ़रीन में उनके अधिकार सुरक्षित हैं।[xiv]
प्रशासनिक स्तर पर अफ़रीन क्षेत्र में एक उल्लेखनीय बदलाव यह हुआ है कि वहाँ की अलग-अलग स्थानीय परिषदों को रद्द कर दिया गया है, जो आम तौर पर एक-दूसरे से स्वतंत्र थीं। इनकी जगह अफ़रीन क्षेत्र के लिए एक केंद्रीय निदेशालय (“अफ़रीन क्षेत्र प्रशासन”) बनाया गया है, जो अलेप्पो प्रांत के गवर्नर को जवाबदेह है।[xv] इसके बाद अफ़रीन क्षेत्र को ज़िला निदेशालयों में बाँटा गया है, जो केंद्रीय क्षेत्रीय प्रशासन के प्रति जवाबदेह हैं। यह प्रशासनिक बदलाव कुछ हद तक वैसा ही है जैसा शासन गिरने से पहले SG के इलाक़ों में हुआ था, जब कई स्थानीय परिषदों को ख़त्म कर उनकी जगह कई इलाक़ों को समेटने वाले नगरपालिका कार्यालय बनाए गए थे।
ये निदेशालय संपत्ति की वापसी की निगरानी के लिए ज़िम्मेदार हैं। ख़ास तौर पर, अफ़रीन और जिंदिरिस निदेशालयों के प्रमुखों के मुताबिक़,[xvi] जो भी विस्थापित व्यक्ति अपनी संपत्ति वापस पाना चाहता है, उसे यह करना होगा: पहले, स्वामित्व साबित करने वाले दस्तावेज़ों को संबंधित ज़िले के लिए अनुमोदित वकील से सत्यापित कराना होगा। सत्यापन सामान्यतः किसी स्थानीय मुख़्तार (गाँव या मोहल्ले का वह व्यक्ति जो अधिकारियों के साथ लेन-देन में दस्तावेज़ प्रमाणित कराने में मदद करता है) और स्थानीय गवाहों की सहायता से हो जाता है। अगर वकील दस्तावेज़ सत्यापित कर देता है, तो व्यक्ति को वे दस्तावेज़ ज़िला निदेशालय द्वारा संचालित “आर्थिक समिति”[xvii] के कार्यालय में जमा करने होते हैं। इसके बाद “आर्थिक समिति” का कार्यालय अंतिम सत्यापन के लिए अफ़रीन क्षेत्र की केंद्रीय आर्थिक समिति को मामला भेजता है।[xviii] इस आधिकारिक विवरण के अनुसार, दावेदार के पास स्वामित्व का पर्याप्त प्रमाण हो तो संपत्ति लौटाने के लिए वही काफ़ी है।
जब मैंने पूछा कि उस स्थिति में क्या होता है, जब ज़ब्त संपत्ति पर ऐसे विस्थापित परिवार का क़ब्ज़ा है जो अपने मूल घर में इसलिए नहीं लौट सकता क्योंकि वह नष्ट हो चुका है, तो अफ़रीन प्रशासन प्रमुख ने दावा किया कि या तो विस्थापित परिवार और मूल मालिकों के बीच किसी तरह के समझौते (जैसे किराये का अनुबंध) की कोशिश की जाएगी या फिर विस्थापित परिवार को शिविरों में वैकल्पिक आवास दिया जाएगा।[xix]
इसी तरह, जिंदिरिस ज़िला निदेशक ने कहा कि कुछ मूल मालिक अपने घरों में रह रहे लोगों को किराये का अनुबंध देना पसंद करते हैं। लेकिन अफ़रीन क्षेत्रीय प्रशासन के समन्वय से 3,000 अपार्टमेंट (जिन्हें मुख्यतः 2023 के भूकंप के बाद NGOs ने बनाया था) उन लोगों को बसाने के लिए अलग रखे गए हैं, जिन्हें शायद घर खाली करना पड़े, लेकिन जो वैकल्पिक ठिकाना नहीं जुटा सकते।[xx] उन्होंने यह भी कहा कि ज़ब्त संपत्ति लौटाने में प्रशासन कोई भेदभाव नहीं करता; उदाहरण के लिए, जो व्यक्ति अफ़रीन कैंटन के “ऑटोनॉमस एडमिनिस्ट्रेशन” में काम कर चुका हो, उसे संपत्ति वापस लेने से नहीं रोका जाना चाहिए।[xxi] कथित तौर पर एकमात्र अपवाद वह है जिसे राज्य के ख़िलाफ़ हथियार उठाए माना जाए—व्यवहार में इसका मतलब SDF की सेनाओं के सक्रिय सदस्यों को संपत्ति वापस लेने से बाहर रखना है।
सरकार-समर्थक मीडिया और स्रोतों ने ज़ब्त संपत्ति लौटाए जाने के कथित उदाहरणों का प्रचार किया है और इस संबंध में कुछ आँकड़े भी दिए हैं।[xxii] उदाहरण के लिए, सरकार-समर्थक स्रोतों ने नवंबर में दावा किया कि अफ़रीन में लगभग 5,000 घर मूल मालिकों को लौटा दिए गए, जहाँ क़ाबिज़ लोग चले गए थे।[xxiii] इसके अलावा, कथित तौर पर 500,000 से ज़्यादा ज़ैतून के पेड़ (जिनके लिए अफ़रीन क्षेत्र मशहूर है) भी उनके मूल मालिकों को लौटाए गए।[xxiv]
आलोचक—ख़ासकर SDF समर्थक—कहते हैं कि “आर्थिक समिति” के तंत्र का मक़सद सशस्त्र गुटों द्वारा संपत्ति ज़ब्त करने की कार्रवाई को वैध ठहराना है, और संपत्ति लौटाने की प्रक्रिया मनमानी है। उदाहरण के लिए, SDF समर्थक टिप्पणीकारों ने सितंबर की शुरुआत में जिंदिरिस के एक व्यक्ति का वीडियो साझा किया, जो तुर्की में निर्वासन में रह रहा था। उसका दावा था कि उसने हमा से विस्थापित लोगों के क़ब्ज़े वाले अपने घर की वापसी के लिए कई बार गुहार लगाई, लेकिन नाकाम रहा।[xxv] जिंदिरिस के क्षेत्रीय निदेशक ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए संकेत दिया कि यह क्लिप भ्रामक है, क्योंकि जिस घर के सामने उसने वीडियो बनाया, वह वास्तव में उसका था ही नहीं; निदेशालय किसी दूसरी संपत्ति को बहाल करने की प्रक्रिया में था, जिसके बारे में वह स्वामित्व साबित कर सकता था।[xxvi]
अफ़रीन में कुर्दों की मौजूदगी
ज़ब्त संपत्तियों की दावा की गई वापसी के सटीक आँकड़ों की पुष्टि करना कठिन है, लेकिन अवलोकन और साक्षात्कारों के ज़रिये यह परखा जा सकता है कि क्या कुर्द वास्तव में अफ़रीन लौट रहे हैं। इन आधारों पर बनती छाप यह है कि कुर्दों का अफ़रीन लौटना, या कम-से-कम वहाँ आकर जाना, एक वास्तविक परिघटना है—ऐसी परिघटना जो शासन के पतन से पहले मौजूद नहीं थी। उदाहरण के लिए, अफ़रीन शहर और आसपास के व्यापक क्षेत्र में अब कुर्दों को सड़कों और दुकानों में अपेक्षाकृत आसानी से देखा जा सकता है।[xxvii] क्षेत्र की कुर्द महिलाएँ, ख़ासकर युवा पीढ़ी की, अक्सर हिजाब न पहनने और पश्चिमी शैली के कपड़े पहनने के कारण अलग पहचान में आती हैं। इसके उलट अफ़रीन की पहले से मौजूद अरब आबादी और हाल में आए अरब आंतरिक विस्थापितों में अपेक्षाकृत रूढ़िवादी पहनावा और हिजाब आम है।[xxviii] मुझे यह आभास नहीं हुआ कि इन महिलाओं को अपने अधिक रूढ़िवादी पड़ोसियों से अलग तरह का पहनावा रखने के कारण परेशान किए जाने का डर है। इसी तरह, जिंदिरिस के क्षेत्रीय निदेशक के साथ बैठक में भाग लेने वालों ने साफ़ किया कि हिजाब व्यक्तिगत पसंद का मामला है, जिसमें सरकार हस्तक्षेप नहीं करती।
इसके अलावा, वहाँ मौजूद कुर्द सार्वजनिक जगहों पर बेझिझक कुर्द भाषा का इस्तेमाल करते हैं और मुझे कभी यह महसूस नहीं हुआ कि वे कुर्द बोलने से डरते हों। अफ़रीन क्षेत्र में कुर्द भाषा (कुर्मांजी- लैटिन लिपि) में लिखे कुछ दुकान-चिह्न और सूचना-पट्ट भी दिखाई देते हैं। जिंदिरिस ज़िले में, ज़िला निदेशक से मुलाक़ात के बाद मैं एक हॉल में जा सका, जहाँ कुर्दों की एक जीवंत शादी चल रही थी। पास ही एक रेस्तराँ में भी गया, जहाँ शराब बिक्री के लिए उपलब्ध थी। दोनों जगहों पर किसी ने यह दावा नहीं किया कि संगीत चलाने या शराब बेचने जैसे कारणों से उन्हें अधिकारियों की तरफ़ से परेशान किया जा रहा है। न ही उन्हें यह लगा कि कुर्द पहचान और संस्कृति को मनाने की उनकी आज़ादी दबाई जा रही है।
हालाँकि, इस संदर्भ में स्कूलों में कुर्द भाषा पढ़ाने के मुद्दे पर कुछ टिप्पणियाँ ज़रूरी हैं। अफ़रीन में कुर्द भाषा पढ़ाने की कुछ व्यवस्था तो है, लेकिन साफ़ है कि इसे शिक्षा का प्राथमिक माध्यम बनाने का कोई इरादा नहीं है; बल्कि इसे एक विदेशी भाषा की तरह पढ़ाया जा रहा है।[xxix] इलाके के कुछ कुर्द व्यावहारिक कारणों से इस क़दम का विरोध ज़रूरी नहीं कि करते हों। मिसाल के तौर पर, जिंदिरिस के एक कुर्द कारोबारी ने तुलना करते हुए बताया कि इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार (KRG) वाले क्षेत्र में कुर्द भाषा शिक्षा का प्राथमिक माध्यम बन गई, जिसका नतीजा यह हुआ कि KRG में अरबी पर पकड़ रखने वाले कुर्दों की संख्या लगातार घटती जा रही है, और इस वजह से उनके लिए KRG के बाहर या व्यापक क्षेत्र में काम करना मुश्किल हो जाता है।[xxx] बेशक, SDF के कुछ समर्थक, जो शिक्षा में कुर्द भाषा को ज़्यादा केंद्रीय भूमिका देने के पक्षधर हैं, अफ़रीन की इस व्यवस्था को नापसंद करेंगे।
अफ़रीन लौट चुके विस्थापित कुर्दों के प्रतिशत के अनुमान अलग-अलग हैं। इतनी व्यापक रेंज को देखते हुए उनकी सत्यता के बारे में आश्वस्त होना मुश्किल है। उदाहरण के लिए, अफ़रीन के एक कुर्द निवासी ने कहा कि लौटने वालों का अनुपात 30-40 प्रतिशत के दायरे में है।[xxxi] इसके उलट, SDF के क़ब्ज़े वाले इलाक़ों में रहने वाले एक व्यक्ति, जो अफ़रीन के विस्थापित कुर्दों के एक संगठन के प्रमुख हैं, ने लौटने वालों का प्रतिशत 60 बताया और यह भी कहा कि उनका अपना परिवार अफ़रीन लौट चुका है।[xxxii]
फिर भी, उन्होंने दावा किया कि संक्रमणकालीन सरकार मूल मालिकों को संपत्ति लौटाने के लिए सक्रिय क़दम नहीं उठा रही: “क्योंकि अफ़रीन, आज़ाज़, अल-बाब, जराबुलुस और मनबिज तुर्की की संरक्षकता में हैं: जिनके पास अधिकार है वे अमशात,[xxxiii] हमज़ात[xxxiv] और सुल्तान मुराद हैं, जबकि अम्न आम[xxxv] की भूमिका इस समय कमज़ोर है।” लेकिन जब उनसे पूछा गया कि अगर ऐसा है तो शासन के पतन के बाद से अफ़रीन के 60 प्रतिशत विस्थापित कैसे लौट सकते थे, तो उन्होंने स्पष्ट किया: “शासन के पतन से पहले अफ़रीन में हालात बहुत-बहुत बुरे थे, लेकिन शासन के पतन के बाद कुछ बदलाव आया है, फिर भी अब भी जुल्म है।”[xxxvi] उनके मुताबिक़, अफ़रीन के विस्थापित कुर्दों की बड़े पैमाने पर वापसी में बाधा डालने वाले कारणों में तुर्की समर्थित SNA गुटों का असर भी शामिल है: “समस्या यह है कि तुर्की से जुड़े गुट अब भी वहाँ सब मौजूद हैं। अगर अफ़रीन पर अकेले अम्न आम का नियंत्रण होता, तो आप पाते कि 99 प्रतिशत लोग लौट चुके होते।”[xxxvii] इसके उलट, अफ़रीन के क्षेत्रीय निदेशक ने SDF और उस कुर्द मीडिया को भी आंशिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराया, जो SDF को कुर्दों का रक्षक बताकर पेश करता है। उन्होंने, मिसाल के तौर पर, कहा कि क़ामिश्ली की एक यात्रा के दौरान SDF ने उन्हें अफ़रीन के विस्थापित लोगों से मिलने नहीं दिया, ताकि इस पर चर्चा की जा सके कि वे घर कैसे लौट सकते हैं।[xxxviii] हालांकि, उन्होंने अफ़रीन इलाके में कुर्दों की वापसी के कुछ आँकड़े ज़रूर दिए। उनका दावा था कि 14,000 परिवार लौटे और उन्होंने अपनी संपत्ति फिर हासिल की, लेकिन बाद में अलेप्पो शहर और हसाका जैसे दूसरे इलाक़ों में चले गए, जबकि 12,000 परिवार लौटे और वहीं टिके रहे।[xxxix]
सुरक्षा कारकों से इतर, कुछ कुर्दों की अफ़रीन इलाके में वापसी के लिए एक संभावित प्रोत्साहन यह हो सकता है कि सेवाओं की स्थिति पूर्व शासन और/या SDF के नियंत्रण वाले इलाक़ों की तुलना में बेहतर हो। मिसाल के तौर पर, ख़ुद अफ़रीन शहर की कई सड़कों का नवीनीकरण और विकास हुआ है, जैसा आज़ाज़ क़स्बे में भी देखा जा सकता है। इसके अलावा, अफ़रीन शहर व्यापक तुर्की बिजली नेटवर्क से जुड़ा है, जिससे निवासियों को पूर्व शासन-नियंत्रित और SDF-नियंत्रित इलाक़ों की तुलना में कहीं सस्ती और ज़्यादा बिजली मिलती है। नगर परिषद ने सीवेज नेटवर्क में भी मरम्मत व सुधार किए हैं और नई स्वास्थ्य सुविधाएँ बनाई हैं।[xl] एक इंटरव्यू में अफ़रीन क्षेत्रीय प्रशासन के प्रमुख ने इन उपलब्धियों की ओर इशारा किया और मुझसे कहा कि, इसके उलट, यह भी देखिए कि SDF और शासन ने तेल रिफ़अत को क्या बना दिया—इसे एक ऐसे सैन्य क्षेत्र में तब्दील कर दिया गया जो काफ़ी हद तक अपने मूल निवासियों से ख़ाली है।[xli]
अफ़रीन में SNA गुट? “संक्रमणकालीन न्याय” के सवाल
क्या अफ़रीन में SNA गुटों की मौजूदगी को लेकर SDF-समर्थक रिपोर्टों में लगाए गए आरोप सही हैं? निश्चित रूप से, शासन के पतन से पहले अफ़रीन इलाके में इन गुटों की मौजूदगी और उनका प्रभाव बहुत वास्तविक था। जिंदिरिस ज़िला निदेशक के साथ एक बैठक में एक कुर्द साक्षात्कारकर्ता ने बताया कि “ऑलिव ब्रांच” दौर (2018-2024) की एक समस्या यह थी कि इलाक़ा अलग-अलग गुटों में बँट गया था और चेकपॉइंट्स की संख्या बहुत ज़्यादा थी।[xlii] उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब वह जिंदिरिस से शेख़ हदीद जाते थे, तो उन्हें 22 चेकपॉइंट्स से होकर गुज़रना पड़ता था।
इसके उलट, जब मैंने अफ़रीन इलाके की यात्रा की, तो यह बात चौंकाने वाली थी कि उन गुटों की मौजूदगी के कितने निशान हटा दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, मैदानकी झील (Maydanki Lake) जाने वाले एक रास्ते पर मुझे एक ऐसे चेकपॉइंट के अवशेष मिले, जिसे सुल्तान मुराद डिवीज़न (Sultan Murad Division)[xliii] चलाता था, लेकिन शासन के पतन के बाद इसे हटा दिया गया। कुल मिलाकर, अफ़रीन इलाके में चेकपॉइंट्स की संख्या काफ़ी घट गई है। मैंने ख़ुद कोई ऐसा चेकपॉइंट नहीं देखा, जिसे साफ़ तौर पर SNA गुटों के सदस्य चला रहे हों। बल्कि, चेकपॉइंट संभालने वाले या तो अम्न आम (Amn Aam)[xliv] के लग रहे थे या संक्रमणकालीन सरकार की सेना के कर्मी, जो सीरिया के दूसरे हिस्सों की तरह अक्सर गाड़ियों को बहुत कम या बिना किसी पूछताछ के जाने देते थे। इसी तरह, अफ़रीन क़स्बे के भीतर भी SNA गुटों की मौजूदगी के कुछ अवशेष दिखे।
मिसाल के तौर पर, मैंने अफ़रीन में एक छोटे गोलचक्कर पर सीरियाई कुर्द विपक्षी नेता मशाल तम्मो (Meshaal Tammo) (जिनकी 2011 में हत्या हुई थी और जो असद शासन के विरोधियों में लोकप्रिय थे) को समर्पित एक स्मारक देखा, जिसे SNA गुट जैश अल-शर्क़िया (Jaysh al-Sharqiya) ने बनवाया था।[xlv] लेकिन कई अन्य सार्वजनिक प्रदर्शन—जैसे SNA गुटों के “शहीदों” का महिमामंडन करने वाले पोस्टर—हटा दिए गए थे। जिस कुर्द साक्षात्कारकर्ता ने पहले चेकपॉइंट्स की समस्या का ज़िक्र किया था, उन्होंने शेख़ हदीद में भी गुटों के पोस्टर और इसी तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन हटाए जाने के बारे में यही बात कही।[xlvi]
बाहरी पर्यवेक्षकों को प्रभावित करने की महज़ एक प्रचार कवायद भर होने के बजाय, ये प्रयास संक्रमणकालीन सरकार की उस मंशा के अनुरूप हैं, जिसमें वह विद्रोह से उपजे गुटवाद को ख़त्म करना और अलग-अलग सशस्त्र समूहों को नई सेना व सुरक्षा ढाँचों में समाहित करना चाहती है। यह एकीकरण प्रयास शासन के पतन से पहले SNA की उस हक़ीक़त के उलट है, जिसमें गुटों को डिवीज़न और ब्रिगेड नंबर तो दे दिए गए थे, लेकिन वे अपनी गुटीय पहचान नहीं छोड़ पाए थे—ठीक उसी तरह जैसे हश्द आयोग (Hashd Commission) में समाहित कई इराक़ी मिलिशिया गुटों ने कभी अपनी गुटीय पहचान नहीं छोड़ी। अफ़रीन इलाके में मौजूद नई सेना की सबसे उल्लेखनीय डिवीज़न डिवीज़न 80 है, जिसका नेतृत्व इस समय अहमद रिज़्क़ (Ahmad Rizq)[xlvii] कर रहे हैं और जिसमें हरकत नूर अल-दीन अल-ज़िंकी (Harakat Nur al-Din al-Zinki), लिवा समरक़ंद (Liwa Samarqand), लिवा अल-शमाल (Liwa al-Shamal), फ़यलक़ अल-शाम (Faylaq al-Sham), और मुतासिम डिवीज़न (Mutasim Division)[xlviii] के कर्मियों का मिश्रण है—दूसरे शब्दों में, मुख्यतः SNA समूह और HTS के कनिष्ठ साझेदार। इसके उलट, “अमशात” को बड़े पैमाने पर डिवीज़न 62 में शामिल कर दिया गया है, जिसके प्रमुख अबू अमशा (Abu Amsha) हैं और जो मुख्यतः हमा प्रांत में सक्रिय है, जबकि “हमज़ात” को मुख्यतः डिवीज़न 76 में शामिल किया गया है। “अहरार अल-शर्क़िया” (Ahrar al-Sharqiya, यानी पूर्वी क्षेत्र के स्वतंत्र जन), एक और गुट जो अफ़रीन में और अन्य जगहों पर कुर्दों के ख़िलाफ़ किए गए उल्लंघनों के लिए कुख्यात हुआ,[xlix] को डिवीज़न 86 (जिसका नेतृत्व अहरार अल-शर्क़िया के नेता के हाथ में है) में शामिल कर दिया गया है और यह मुख्यतः इराक़ की सीमा के पास दयर अल-ज़ूर के पूर्वी क्षेत्र में तैनात है, जिसमें सीमा का क़स्बा अल्बूकमाल भी शामिल है।
लेकिन गुटीय नामों का हटना और समूहों का नई सेना की डिवीज़नों में समाहित हो जाना इस संभावना को ख़ारिज नहीं करता कि पुराने गुटों के भीतर के कुछ व्यक्ति और कमांडर—जो अब नई सेना की डिवीज़नों के तहत काम कर रहे हैं—अब भी अफ़रीन में ज़ब्त की गई अचल संपत्ति अपने क़ब्ज़े में रखे हुए हों और वैकल्पिक आवास की कमी, आत्म-संवर्धन और संरक्षण नेटवर्क जैसे कारणों से इन संपत्तियों को उनके मूल मालिकों को सौंपने से इनकार कर रहे हों।[l]
जिंदिरिस ज़िला निदेशक ने बताया कि अब औपचारिक रूप से भंग किए जा चुके SNA गुटों के सदस्य अब भी “सैन्य बैरकों” में मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि नागरिक जीवन में हस्तक्षेप करने में उनकी कोई भूमिका है और/या SNA गुट अब इकाइयों के रूप में मौजूद हैं।[li] उन्होंने यह भी माना कि शुरुआत में ज़ब्त घरों में सैन्य कर्मियों की मौजूदगी और SNA गुटों का डर, मूल मालिकों को अपनी संपत्ति वापस लेने की कोशिश से रोकता रहा।[lii] हालांकि, उन्होंने कहा कि ज़िला आर्थिक समिति रक्षा मंत्रालय की एक समिति के साथ तालमेल कर रही है ताकि उन ज़मीन और संपत्ति परिसंपत्तियों की पहचान की जा सके, जिनका इस्तेमाल अब भंग हो चुके गुटों के कर्मी कर रहे हैं, और यह तय किया जा सके कि कौन-सी रक्षा मंत्रालय की निगरानी में आनी चाहिए। लेकिन किसी भी हाल में, जो व्यक्ति किसी संपत्ति पर अपना स्वामित्व साबित कर सके, उसे आर्थिक समिति से वह संपत्ति मिल जाएगी, भले ही उस पर क़ाबिज़ कोई भी हो।[liii] पहले उल्लिखित उस कुर्द साक्षात्कारकर्ता ने, जिसने गुटों के चेकपॉइंट्स की समस्याएँ बताई थीं, उसी बैठक में दावा किया कि SNA गुटों की तथाकथित “युद्ध-लूट” (यानी उनके द्वारा ज़ब्त किए गए कुर्द कारोबार और अन्य संपत्ति परिसंपत्तियाँ) आर्थिक समितियों को सौंप दी गई हैं।[liv]
व्यापक तौर पर, ज़ब्त की गई अचल संपत्ति लौटाने का सवाल असद-पश्चात सीरिया में “संक्रमणकालीन न्याय” और जवाबदेही के मुद्दे खड़े करता है। क्या अफ़रीन में संपत्ति अधिकारों के उल्लंघन के दोषियों को उनके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा? अगर ऐसे लोगों पर, ज़ब्त संपत्ति लौटाने के लिए महज़ कहे या मजबूर किए जाने से आगे बढ़कर, क़ानूनी परिणाम भुगतने की गंभीर संभावना हो, तो इससे अफ़रीन के अब भी विस्थापित निवासियों को यह भरोसा मिल सकता है कि इलाक़ा सिर्फ़ सशस्त्र गिरोहों के शासन में नहीं है, और इस तरह वापसी के लिए एक प्रोत्साहन मिल सकता है।
हालांकि, ऐसा लगता है कि ऐसी जवाबदेही सामने नहीं आएगी, क्योंकि नई सरकार ने गृहयुद्ध के दौरान असद शासन द्वारा किए गए अपराधों पर ध्यान केंद्रित करने का फ़ैसला किया है और उसे अपने जनाधार को नाराज़ करने का डर है। जब मैंने इस संदर्भ में जवाबदेही की संभावना के बारे में पूछा, तो अफ़रीन प्रशासन प्रमुख ने माना कि मैंने एक अहम मुद्दा उठाया है, लेकिन यह भी समझाया कि अगर सीरिया में किए गए हर उल्लंघन पर जवाबदेही तय की जाए, तो साफ़ हाथों वाले बहुत कम बचेंगे, शायद कोई भी नहीं।[lv] यह, बेशक, सच है कि अपर्याप्त सबूत, अपराधियों का पता-ठिकाना न मालूम होना और ऐसे ही अन्य कारणों से हर उल्लंघन के लिए पूरी जवाबदेही सुनिश्चित करना मुश्किल है, अगर नामुमकिन नहीं। लेकिन जब अफ़रीन के कुछ विस्थापित लोग देखते हैं कि अफ़रीन में उल्लंघनों के आरोपी SNA समूहों के प्रमुख चेहरे न सिर्फ़ किसी जवाबदेही का सामना नहीं कर रहे, बल्कि नई सेना में वरिष्ठ पदों का आनंद ले रहे हैं, तो यह समझना मुश्किल नहीं कि वे अब भी इस बात को लेकर चिंतित क्यों हैं कि अफ़रीन में इन समूहों का असर है या नहीं—भले ही उनकी यह धारणा हक़ीक़त से कुछ हद तक कटी हुई हो।
यज़ीदी अल्पसंख्यक पर एक टिप्पणी
हालाँकि यज़ीदियों को मुख्यतः इराक़ और वहाँ समुदाय के ख़िलाफ़ इस्लामिक स्टेट (ISIS) की नरसंहार की कोशिश से जोड़कर देखा जाता है, अफ़रीन इलाके में भी यज़ीदी अल्पसंख्यक की एक छोटी आबादी है। क़िबार (Qibar) गाँव यज़ीदी आबादी वाली प्रमुख बस्तियों में से एक है, लेकिन समुदाय के बुज़ुर्ग अबू स्तयफ़ (Abu Stayf) के मुताबिक़, वहाँ की आबादी का सिर्फ़ लगभग आधा हिस्सा ही यज़ीदी है।[lvi] शेष आबादी में मुख्यतः इलाके के सुन्नी कुर्द और अरब, और वे अरब शामिल हैं जो सीरिया के अन्य हिस्सों से विस्थापित होकर आए, जिनमें मुतासिम डिवीज़न और फ़यलक़ अल-रहमान (Faylaq al-Rahman) (दूसरा, मूल रूप से पूर्वी ग़ूता में आधारित समूह था, लेकिन जिसके सदस्य 2018 में उत्तर की ओर विस्थापित कर दिए गए) जैसे गुटों के कुछ सदस्य भी हैं। हालाँकि गुटीय पहचानें औपचारिक रूप से छोड़ दी गई हैं और अबू स्तयफ़ ने बताया कि SNA गुटों की ओर से आम तौर पर उनके साथ सम्मान का व्यवहार किया गया, इन सशस्त्र समूहों के कुछ सदस्य अब भी ज़ब्त घरों में मौजूद हैं और मूल मालिकों ने उनसे घर खाली करने को कहा है, लेकिन वे इनकार कर रहे हैं।[lvii] कुछ अन्य मामलों में, ज़ब्त घर छोड़ने वाले लोग फाटक और दरवाज़े जैसे हिस्से उखाड़कर ले गए। संपत्ति की वापसी के लिए स्थानीय अधिकारियों के पास अपील का तंत्र होने के बावजूद, अबू स्तयफ़ ने बताया कि गाँव के यज़ीदियों में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने को लेकर डर है।
अबू स्तयफ़ ने यह भी बताया कि समुदाय को उन मुसलमानों की ओर से कुछ उत्पीड़न झेलना पड़ा है, जो यज़ीदियों का इस्लाम में धर्मांतरण कराना चाहते हैं। उनके मुताबिक़, धर्मप्रचारक (संभावित तौर पर सलफ़ी) असद शासन के पतन से पहले (यानी 2018-2024 की अवधि में) 4 बार और शासन के पतन के बाद 1 बार उनके पास आए। इसके अलावा, कुछ यज़ीदी क़ब्रों और मज़ारों के साथ तोड़फोड़ हुई है। कुल मिलाकर, अबू स्तयफ़ को नहीं लगता कि इलाके में यज़ीदी समुदाय का कोई दीर्घकालिक भविष्य है, क्योंकि यह एक छोटा अल्पसंख्यक है जो विवाह सिर्फ़ अपने समुदाय में कर सकता है, उत्पीड़न और सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करता है, और कहीं और (जैसे यूरोप में निर्वासन) बेहतर आर्थिक और जीवन संबंधी संभावनाएँ हासिल कर सकता है।
निष्कर्ष और सिफ़ारिशें
फ़ील्ड वर्क, इंटरव्यू और ओपन सोर्स रिसर्च को जोड़कर अपनाया गया दृष्टिकोण बताता है कि अफ़रीन की हक़ीक़त न तो उतनी आदर्श है, जितनी संक्रमणकालीन सरकार के कुछ समर्थक बताते हैं, और न ही यह अपने मूल निवासियों से ख़ाली कोई अराजक इलाक़ा है, जैसा SDF के कुछ समर्थक चित्रित करते हैं। इसके बजाय, अफ़रीन की स्थिति नीति-निर्माताओं के लिए संक्रमणकालीन सरकार के साथ रचनात्मक, लेकिन आलोचनात्मक संवाद का आधार देती है—और यह संवाद संक्रमणकालीन सरकार की उस घोषित इच्छा पर टिका हो सकता है, जिसके तहत वह एक मज़बूत केंद्रीय राज्य चाहती है जो क़ानून-व्यवस्था लागू करे और सशस्त्र समूहों के गुटवाद को ख़त्म करे।
इस बिंदु पर यह उम्मीद करना यथार्थवादी नहीं है कि संक्रमणकालीन सरकार अफ़रीन क्षेत्र SDF को सौंप देगी, या निकट भविष्य में अफ़रीन को किसी तरह अपने-आप में एक स्वायत्त क्षेत्र बना दिया जाएगा। लेकिन अफ़रीन के मूल निवासियों की वापसी को बढ़ावा देने के लिए और भी बहुत कुछ किया जा सकता है:
अफ़रीन में ऐसे प्रचारित मामलों की जाँच करने और उन पर पारदर्शिता बरतने के लिए क्षेत्रीय प्रशासन को प्रोत्साहित किया जाए, जिनमें संपत्ति के मूल मालिकों को अपनी संपत्ति लौटाने से इनकार कर दिया गया है।
- इस बात पर ज़ोर दिया जाए कि संपत्ति ज़ब्ती के मामलों में कोई भी क़ानून से ऊपर नहीं है। मिसाल के तौर पर, अगर नई सीरियाई सेना के कर्मी अब भी घरों पर क़ाबिज़ पाए जाते हैं और उन्हें मूल मालिकों को सौंपने से इनकार करते हैं, तो उन्हें साफ़ बता दिया जाना चाहिए कि उन्हें जुर्माने जैसे क़ानूनी परिणाम भुगतने होंगे।
- संक्रमणकालीन सरकार को प्रोत्साहित किया जाए कि वह “संक्रमणकालीन न्याय” की अवधारणा का दायरा बढ़ाए और उसमें 2018-2024 की अवधि के दौरान SNA समूहों के भीतर किसी भी प्रमुख हस्ती द्वारा किए गए पुराने उल्लंघनों की जाँच को शामिल करे। साथ ही, तटीय नरसंहारों के लिए जिन मुक़दमों का अब प्रचार किया जा रहा है, उन्हीं की तरह सार्वजनिक मुक़दमों की संभावना भी रखी जाए। ऐसी जवाबदेही से अफ़रीन के विस्थापित लोगों को यह अतिरिक्त भरोसा मिलने की संभावना है कि इलाक़ा महज़ अराजक और क़ानूनविहीन नहीं है।
- संक्रमणकालीन सरकार को प्रोत्साहित किया जाए कि वह यज़ीदी अल्पसंख्यक की सुरक्षा के लिए और क़दम उठाए—जैसे यज़ीदियों के उत्पीड़न और यज़ीदी स्थलों के अपमान की घटनाओं की जाँच और अभियोजन के लिए ज़्यादा प्रयास।
टिप्पणियाँ
[i] ख़ास तौर पर, नुब्ल के ठीक पश्चिम में कुछ कुर्द गाँव (बुर्ज अल-क़ास और धूक़ अल-कबीर) हैं, जो शासन के पतन से पहले उसके क़ब्ज़े में थे।
[ii] अफ़रीन प्रशासन भवन में अफ़रीन के एक अरब निवासी से बातचीत, नवंबर 2025।
[iii] यह भी ध्यान देने योग्य है कि युद्ध के शुरुआती वर्षों में जभात अल-अकराद (Jabhat al-Akrad, कुर्द मोर्चा) ने YPG के एक “कुर्द FSA” अग्रिम-संगठन के रूप में काम किया और प्रभावी तौर पर अलेप्पो में सक्रिय विद्रोहियों के साथ संपर्क-कड़ी की भूमिका निभाई। जभात अल-अकराद बाद में SDF के “संस्थापक घटकों” में से एक बन गया।
[iv] जिंदिरिस में जिंदिरिस ज़िला निदेशक और विभिन्न नागरिक समाज हस्तियों के साथ बैठक, अक्टूबर 2025।
[v] वही।
[vi] हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि YPG ने नुबुल और अल-ज़हरा’ की रक्षा कर रही ताक़तों को हथियार या गोला-बारूद मुहैया कराया हो, जिनका संबंध शासन की सेना, ईरान और हिज़्बुल्लाह से था।
[viii] तुर्की समर्थित विद्रोहियों की आगे की बढ़त थामने के लिए और उस वक्त शासन तथा विद्रोहियों के बीच मोर्चों को ‘फ़्रीज़’ करने को लेकर तुर्की-रूस की समझ के व्यापक आधार पर कार्रवाई करते हुए, शासन ने तेल रिफ़अत इलाके में भी बल तैनात किए। इस तरह वह प्रभावी तौर पर YPG-शासन के संयुक्त नियंत्रण में आ गया, हालांकि तेल रिफ़अत के निवासियों का दावा है कि वहां मुख्य ताक़त YPG ही थी। निवासियों के साक्षात्कार, जुलाई 2025।
[ix] एक अफ़रीन शहर के केंद्र में है। मैंने शर्रान गांव (मैदानकी झील के दक्षिण-पूर्व में स्थित) में एक और अड्डा देखा।
[x] कुल मिलाकर, शासन के पतन के बाद उत्तरी अलेप्पो के ग्रामीण इलाक़ों में तुर्की की मौजूदगी घट गई है, जो आम तौर पर एकीकृत, मज़बूत केंद्रीय सीरियाई सरकार के विचार को तुर्की के समर्थन के अनुरूप है। हालांकि इससे तुर्की के प्रभाव के अन्य रास्ते खारिज नहीं होते, जैसे सीरियाई अर्थव्यवस्था में निवेश, नई सीरियाई सेना को तुर्की द्वारा हथियार मुहैया कराना, नई सीरियाई सेना के भीतर तुर्की की प्रशिक्षण व सलाहकार भूमिकाएं, और अफ़रीन इलाके में तुर्की ख़ुफ़िया एजेंसी के लिए मुखबिर के तौर पर काम करने वाले पूर्व SNA कर्मी।
[xi] अफ़रीन शहर की यात्रा के दौरान देखा गया, नवंबर 2025।
[xii] मिसाल के तौर पर, मैंने “सफ़ीरा शहीद ब्रिगेड” (Safira Martyrs Brigade) की मार्किंग वाली संपत्ति देखी—यह एक इकाई है जिसके लड़ाके अलेप्पो प्रांत के सफ़ीरा इलाके से आते हैं—जो सुल्तान मुराद डिवीज़न (Sultan Murad Division) से संबद्ध है, जो तुर्की समर्थित मुख्य SNA गुटों में से एक है।
[xiii] सबसे स्पष्ट तौर पर, बेशक, HTS नेता अहमद अल-शरा (Ahmad al-Sharaa) का राष्ट्रपति होना। अन्य उल्लेखनीय मामलों में मुरहफ़ अबू क़सरा (Murhaf Abu Qasra) का रक्षा मंत्री के तौर पर, अनस ख़त्ताब (Anas Khattab) का गृह मंत्री के तौर पर, और मुज़हिर अल-वैस (Muzhhar al-Ways) का न्याय मंत्री के तौर पर होना शामिल है।
[xiv] मिसाल के तौर पर, सरकार और उसके समर्थक अक्टूबर 2025 में हुई जन परिषद (सीरियाई संसद) के चुनावों में अफ़रीन से तीन कुर्दों के चुने जाने को भी रेखांकित करते हैं, लेकिन उन्हें एक छोटी-सी चुनाव समिति ने चुना था।
[xv] लेखन के समय तक अलेप्पो प्रांत के गवर्नर अज़्ज़ाम अल-ग़रीब (Azzam al-Gharib) हैं, जो पहले SNA धड़े अल-जबहा अल-शामिया (al-Jabha al-Shamiya) के नेता रह चुके हैं।
[xvi] अफ़रीन क्षेत्र प्रशासन के प्रमुख मसूद बतल (Masoud Batal) हैं, जो मूल रूप से क़ामिश्ली के कुर्द हैं। उन्होंने बताया कि वे पहले इदलिब के सरमदा क्षेत्र में SG के साथ थे। वे PYD के विरोधी रहे हैं। साक्षात्कार, नवंबर 2025। जिंदिरिस निदेशालय के प्रमुख मूल रूप से अज़ाज़ क्षेत्र के एक अरब हैं (साक्षात्कार, अक्टूबर 2025)। वे HTS के भी सहयोगी थे।
[xvii] जिसे “अधिकार बहाली समिति” (Restoration of Rights Committee) के नाम से भी जाना जाता है।
[xviii] इस प्रक्रिया को अफ़रीन क्षेत्र प्रशासन की ओर से जारी परिपत्र संख्या 6, दिनांक 18 सितंबर 2025, के जरिए औपचारिक रूप दिया गया है।
[xix] साक्षात्कार, नवंबर 2025।
[xx] साक्षात्कार, अक्टूबर 2025।
[xxi] वही।
[xxii] मिसाल के तौर पर, स्थानीय प्रशासन से जुड़े “अफ़रीन मीडिया सेंटर” (Afrin Media Centre) ने 11 अक्टूबर 2025 को एक वीडियो प्रकाशित किया, जिसमें दावा किया गया कि उसी दिन उसने अफ़रीन के शेख़ हदीद ज़िले में 10,000 से ज़्यादा जैतून के पेड़ उनके मूल मालिकों को लौटाए। वीडियो में “आर्थिक समिति/अधिकार बहाली समिति” में अपील करने की एक नमूना प्रक्रिया का प्रचार किया गया था।
[xxiii] साक्षात्कार, नवंबर 2025।
[xxiv] वही।
[xxv] “अफ़रीन नाउ” (Afrin Now) द्वारा पोस्ट किया गया वीडियो, 1 सितंबर 2025।
[xxvi] साक्षात्कार, अक्टूबर 2025।
[xxvii] बेशक, कुछ कुर्द अफ़रीन से कभी गए ही नहीं और वहीं बने रहे। SNA धड़ों के दौर के नकारात्मक अनुभवों ने उन्हें बोलने से कतराने वाला बना दिया है। मिसाल के तौर पर, अफ़रीन शहर के एक रेस्तरां मालिक ने साक्षात्कार देने से इनकार कर दिया और दावा किया कि बोलने के कारण SNA गुटों ने उन्हें कैद किया था। उन्होंने यह भी कहा कि 2004 में कुर्द विद्रोह पर कार्रवाई के दौरान शासन ने उन्हें गिरफ़्तार किया था। बातचीत, नवंबर 2025।
[xxviii] अफ़रीन शहर, जिंदिरिस, नबी हूरी और मैदानकी की यात्राओं के दौरान देखा गया, अगस्त-नवंबर 2025।
[xxix] जिंदिरिस ज़िला निदेशक और नागरिक समाज की हस्तियों के साथ साक्षात्कार व बैठक, अक्टूबर 2025।
[xxx] वही।
[xxxi] बातचीत, नवंबर 2025।
[xxxii] साक्षात्कार, नवंबर 2025।
[xxxiii] SNA धड़े सुल्तान सुलेमान शाह डिवीज़न (Sultan Sulayman Shah Division) के लिए प्रचलित उपनाम, जिसका नाम इसके नेता पर रखा गया है, जिन्हें व्यापक रूप से अबू अमशा (Abu Amsha) के नाम से जाना जाता है।
[xxxiv] SNA धड़े हमज़ा डिवीज़न (Hamza Division) के लिए प्रचलित उपनाम।
[xxxv] ‘जन सुरक्षा’ (Public Security)— संक्रमणकालीन सरकार के आंतरिक सुरक्षा बलों के लिए, जो गृह मंत्रालय से संबद्ध हैं।
[xxxvi] साक्षात्कार, नवंबर 2025।
[xxxvii] वही।
[xxxviii] साक्षात्कार, नवंबर 2025।
[xxxix] वही।
[xl][xl] अफ़रीन शहर की यात्राओं के दौरान किए गए अवलोकन, और अफ़रीन नगर परिषद/नगरपालिका द्वारा लेखक को उपलब्ध कराए गए दस्तावेज़ के आधार पर।
[xli] साक्षात्कार, नवंबर 2025।
[xlii] साक्षात्कार, अक्टूबर 2025।
[xliii] अगस्त 2025 में मैदानकी झील की यात्रा के दौरान देखा गया।
[xliv] यह भी ध्यान देने योग्य है कि जिंदिरिस ज़िला निदेशक ने दावा किया कि अफ़रीन में अम्न आम (Amn Aam) में कुर्दों को भर्ती किया गया है। साक्षात्कार, अक्टूबर 2025। हालांकि, अफ़रीन क्षेत्र में अपनी यात्राओं के दौरान मैं किसी ऐसे अम्न आम कर्मी से नहीं मिला और न ही ऐसा कोई देखा, जो पहचान में कुर्द हो।
[xlv] “पूर्वी क्षेत्र की सेना” (Army of the Eastern Region)— जैसा कि इसके नाम से ज़ाहिर है, इसके कर्मी मुख्यतः पूर्वी सीरिया से आते थे।
[xlvi] साक्षात्कार, अक्टूबर 2025।
[xlvii] उन्होंने हरकत नूर अल-दीन अल-ज़िंकी (Harakat Nur al-Din al-Zinki) के एक पुनर्गठित संस्करण का नेतृत्व किया। तौफ़ीक़ शिहाब अल-दीन (Tawfiq Shihab al-Din) के नेतृत्व वाले मूल समूह को HTS ने 2019 में पश्चिमी अलेप्पो के ग्रामीण इलाक़ों से निकाल दिया था।
[xlviii] अज़ाज़ के एक मीडिया एक्टिविस्ट से बातचीत, अगस्त 2025।
[xlix] खास तौर पर, इस समूह पर अक्टूबर 2019 में कुर्द नेता हेवरीन ख़लफ़ (Hevrin Khalaf) की हत्या का आरोप है (उस “पीस स्प्रिंग” (Peace Spring) ऑपरेशन के दौरान, जो तुर्की ने SNA धड़ों के साथ मिलकर उत्तरी रक़्क़ा और हसाका प्रांतों में SDF के ख़िलाफ़ शुरू किया था)। इसी वजह से इस समूह पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं।
[l] मिसाल के तौर पर, अक्टूबर 2025 में सोशल मीडिया की कुछ पोस्ट में बताया गया कि उपिला गांव (बुलबुल ज़िला, अफ़रीन) में डिवीज़न 76 का एक कमांडर स्थानीय लौटने वालों को जैतून की फ़सल काटने से रोक रहा था और इसके बजाय सिर्फ़ अपने कमान के अधीन कर्मियों या अपने क़रीबी लोगों को ही ऐसा करने दे रहा था।
[li] साक्षात्कार, अक्टूबर 2025।
[lii] वही।
[liii] वही।
[liv] वही।
[lv] साक्षात्कार, नवंबर 2025।
[lvi] साक्षात्कार, नवंबर 2025।
[lvii] वही।
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