ईरान के इर्द-गिर्द अमेरिकी सैन्य जमावड़ा: तथ्य और मायने
अमेरिकी बलों की आवाजाही, अभियानगत तैयारी और टकराव बढ़ने के ख़तरों का खुले स्रोतों पर आधारित आकलन।
मुख्य बिंदु
- जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद से अमेरिका मध्य पूर्व में अपना सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा कर रहा है, जिसमें कई दिशाओं से बल फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र की ओर जुट रहे हैं।
- USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दक्षिण चीन सागर से होते हुए आ रहा है, जॉर्डन में लगभग 35 F-15E स्ट्राइक ईगल विमान तैनात किए गए हैं और अल उदेइद एयर बेस पर टैंकर विमानों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है।
- कैरियर विमानन, ज़मीन-आधारित लड़ाकू विमानों, टैंकरों और मिसाइल रक्षा की इस संयुक्त तैनाती से संकेत मिलता है कि तैयारी किसी सीमित, एकबारगी हमले की नहीं बल्कि किसी बड़ी आकस्मिक स्थिति की है।
ग्रेग रोमन (Gregg Roman) मिडिल ईस्ट फ़ोरम (Middle East Forum) के कार्यकारी निदेशक हैं। 2014 में ज्यूइश टेलीग्राफ़िक एजेंसी (Jewish Telegraphic Agency) ने उन्हें “दुनिया के दस सबसे प्रेरणादायी यहूदी नेताओं” में शामिल किया था और इससे पहले वह इसराइल के उप विदेश मंत्री के राजनीतिक सलाहकार रह चुके हैं तथा इसराइली रक्षा मंत्रालय के लिए काम कर चुके हैं। मध्य पूर्व के मामलों पर अक्सर बोलने वाले रोमन ने अमेरिकी कांग्रेस और क्नेसेट के सामने गवाही दी है और फ़ॉक्स न्यूज़, i24NEWS, अल जज़ीरा, BBC World News और इसराइल के चैनल 12 और 13 जैसे अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनलों पर नज़र आते हैं। उन्होंने अमेरिकन यूनिवर्सिटी और हर्ज़लिया स्थित इंटरडिसिप्लिनरी सेंटर में राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक संचार का अध्ययन किया है और The Hill, Newsweek, the Los Angeles Times, the Miami Herald और the Jerusalem Post में लिखते रहे हैं।

कार्यकारी सारांश
जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद से अमेरिका मध्य पूर्व में अपना सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा कर रहा है। इस्लामी गणराज्य ईरान में प्रदर्शनों की लहर के बीच और ट्रंप प्रशासन के निर्णायक कार्रवाई के लिए तैयार होने के संकेतों के साथ अमेरिकी बल कई दिशाओं से फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। यह विश्लेषण पड़ताल करता है कि इस जमावड़े के दायरे, संरचना और रणनीतिक निहितार्थों के बारे में ओपन-सोर्स ख़ुफ़िया जानकारी क्या बताती है।
जो तस्वीर उभरती है, वह सोची-समझी और बहु-क्षेत्रीय शक्ति-प्रक्षेपण की है। USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दक्षिण चीन सागर से आ रहा है, जिससे इस क्षेत्र में 20 दिनों का कैरियर-शून्य दौर खत्म होगा—अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार ऐसी अनुपस्थिति रही। लगभग 35 F-15E स्ट्राइक ईगल विमान जॉर्डन में तैनात किए गए हैं। क़तर के अल उदेइद एयर बेस पर टैंकर विमानों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है। खाड़ी क्षेत्र में अतिरिक्त मिसाइल रक्षा बैटरियाँ अपनी-अपनी जगह ले रही हैं।
फिर भी बड़ी अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं। USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, जो 13 जनवरी को नॉरफ़ॉक से रवाना हुआ, कहाँ जा रहा है, यह स्पष्ट नहीं है। डिएगो गार्सिया पर रणनीतिक बमवर्षकों की मौजूदा स्थिति अज्ञात है। पनडुब्बियों की तैनाती—जिसे हमेशा गोपनीय रखा जाता है—टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों की बड़ी क्षमता जोड़ सकती है, जिसकी हम पुष्टि नहीं कर सकते।
जो स्पष्ट है, वह यह कि प्रशासन बड़े आकस्मिक अभियानों के लिए साधन जुटा रहा है और साथ ही कूटनीतिक लचीलापन भी बनाए हुए है। 14 जनवरी को अल उदेइद एयर बेस को आंशिक रूप से खाली कराना और यह रिपोर्टें कि CENTCOM को 24/7 युद्ध-योजना की मुद्रा में रखा गया है, संकेत देती हैं कि निर्णय लेने वालों को कार्रवाई निकट होने की आशंका है।
रणनीतिक संदर्भ
मौजूदा जमावड़े को समझने के लिए यह देखना ज़रूरी है कि इससे पहले क्या हुआ था। 13 से 24 जून 2025 तक अमेरिका और इसराइल ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर चलाया, जिसमें फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान स्थित ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया गया। यह अभियान ईरानी सैन्य और परमाणु ठिकानों पर एक सप्ताह से अधिक चले बढ़ते इसराइली हमलों के बाद हुआ।
इसमें अमेरिकी भागीदारी बड़ी थी। GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर बमों से लैस B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बमवर्षकों ने ज़मीन के भीतर गहराई में बने ठिकानों पर हमला किया। गाइडेड-मिसाइल पनडुब्बी USS जॉर्जिया (SSGN-729) ने इस्फ़हान पर 30 से अधिक टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें दाग़ीं। 12 दिन चले इस संघर्ष में 1,000 से अधिक ईरानी मारे गए और इसराइली इंटरसेप्टरों का भंडार ख़त्म हो गया।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बैलिस्टिक मिसाइलों से अल उदेइद एयर बेस को निशाना बनाया, जहाँ CENTCOM का अग्रिम मुख्यालय है। पैट्रियट बैटरियों ने आने वाली अधिकांश मिसाइलों को रोक दिया, लेकिन एक मिसाइल बेस पर गिरी और एक रेडोम को नुक़सान पहुँचा। इस हमले ने दिखाया कि ईरान सीधे अमेरिकी बलों पर हमला करने को तैयार है और यह भी कि आधुनिक वायु रक्षा के सामने उसकी क्षमताएँ सीमित हैं।
जून 2025 के अभियान ने कई ऐसी मिसालें क़ायम कीं जो मौजूदा हालात से प्रासंगिक हैं: इसने दिखाया कि अमेरिका ईरान के ख़िलाफ़ सीधे बल प्रयोग को तैयार है, संयुक्त वायु रक्षा अभियानों की प्रभावशीलता साबित हुई और ईरानी जवाबी कार्रवाई की क्षमताएँ तथा सीमाएँ—दोनों उजागर हुईं।
मौजूदा संकट 28 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जब देश की आर्थिक तबाही को लेकर पूरे ईरान में प्रदर्शन भड़क उठे। ईरानी रियाल का मूल्य धराशायी हो चुका था और 40 प्रतिशत से अधिक की अति-मुद्रास्फीति ने आम ईरानियों को तबाह कर दिया। जो आर्थिक शिकायतों के रूप में शुरू हुआ, वह तेज़ी से सत्ता-परिवर्तन की माँग में बदल गया और 100 से अधिक शहरों तक फैल गया।
सत्ता की प्रतिक्रिया क्रूर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक़ सुरक्षा बलों ने 1,000 से 12,000 के बीच प्रदर्शनकारियों को मार डाला है, हालाँकि अधिकारियों द्वारा लगाए गए इंटरनेट और टेलीफ़ोन ब्लैकआउट के कारण सटीक आँकड़ों की पुष्टि असंभव है। हताहतों के अनुमानों में यह भारी अंतर संचार बंदी से पैदा हुए सूचना-शून्य को दर्शाता है।
राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया दो-टूक रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है कि “मदद रास्ते में है”, प्रदर्शनकारियों को फाँसी दिए जाने की स्थिति में सैन्य हस्तक्षेप की धमकी दी है और सार्वजनिक रूप से कहा है कि “सभी विकल्प मेज़ पर हैं”। 14 जनवरी को उन्होंने कथित तौर पर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से “निर्णायक” सैन्य विकल्पों की माँग की। उसी दिन अल उदेइद एयर बेस को आंशिक रूप से खाली कराने का आदेश दिया गया।
हालात लगातार बदल रहे हैं। 16 जनवरी को ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने “प्रदर्शनकारियों को मारना बंद कर दिया है”—एक अस्थायी विराम, जिसकी पुष्टि संचार ब्लैकआउट के चलते संभव नहीं थी। 23-24 जनवरी तक वह फ़ारस की खाड़ी की ओर बढ़ते एक “विशाल बेड़े” का ज़िक्र कर रहे थे। अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने इस क्षेत्र से होकर जाने वाली उड़ानें रद्द करना शुरू कर दिया।
नौसैनिक बल
5 से 25 जनवरी 2026 तक CENTCOM के ज़िम्मेदारी वाले क्षेत्र में कोई अमेरिकी विमानवाहक पोत तैनात नहीं था—अक्टूबर 2023 के बाद ऐसा पहली बार हुआ। कुछ विश्लेषकों ने जिसे “मनोवैज्ञानिक विसंगति” कहा, वह ठीक उस समय हुई जब ईरान के साथ तनाव बढ़ रहा था। यह दो वर्षों में पाँचवाँ मौक़ा था जब किसी विमानवाहक पोत को एशिया से मध्य पूर्व भेजा गया, जो इस क्षेत्र की अमेरिकी नौसैनिक शक्ति पर लगातार बनी माँग और प्रशांत क्षेत्र की प्रतिबद्धताओं पर पड़ने वाले दबाव—दोनों को रेखांकित करता है।
USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) और उसका कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अब दक्षिण चीन सागर से ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है। यह स्ट्राइक ग्रुप लगभग 15 जनवरी को फ़िलीपींस से रवाना हुआ और 25-26 जनवरी तक ईरान के नज़दीकी जलक्षेत्र में पहुँचने की उम्मीद है। लिंकन पर सवार कैरियर एयर विंग नाइन (CVW-9) में मरीन फाइटर अटैक स्क्वाड्रन 314 (VMFA-314) के F-35C लाइटनिंग II स्टेल्थ लड़ाकू विमान, F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट के कई स्क्वाड्रन, EA-18G ग्रोलर इलेक्ट्रॉनिक वारफ़ेयर विमान, E-2D एडवांस्ड हॉकआई हवाई पूर्व-चेतावनी विमान, CMV-22B ऑस्प्रे रसद विमान और MH-60R/S हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
स्ट्राइक ग्रुप के सुरक्षा बेड़े में डिस्ट्रॉयर स्क्वाड्रन 21 शामिल है, जिसमें गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक USS स्प्रूएंस (DDG-111), USS माइकल मर्फ़ी (DDG-112) और USS फ़्रैंक ई. पीटरसन जूनियर (DDG-121), साथ ही गाइडेड-मिसाइल क्रूज़र USS मोबाइल बे शामिल हैं। संभवतः कम से कम एक तेज़ हमलावर पनडुब्बी भी इस समूह के साथ है, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं की जाती।
एक बड़ी अनिश्चितता USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN-77) को लेकर है, जो 13 जनवरी 2026 को वर्जीनिया के नॉरफ़ॉक से रवाना हुआ। इस विमानवाहक पोत ने अपना कंपोज़िट ट्रेनिंग यूनिट एक्सरसाइज़ (COMPTUEX) पूरा नहीं किया था, जो तैनाती से पहले ज़रूरी अंतिम प्रमाणन है। इसके गंतव्य की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अगर बुश मध्य पूर्व की ओर जा रहा है, तो वह लिंकन के कई हफ़्ते बाद पहुँचेगा, जिससे संभव है कि इस क्षेत्र में अमेरिका के एक साथ दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप हों। यह नौसैनिक विमानन शक्ति का एक बड़ा जमावड़ा होगा। हालाँकि, ऐसे विमानवाहक पोत की तैनाती जिसने अपना पूरा प्रशिक्षण चक्र पूरा न किया हो, असामान्य होगी और यह या तो असाधारण तात्कालिकता का संकेत देती है या फिर किसी बिलकुल अलग गंतव्य का।
यह ध्यान देने योग्य है कि दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत और सबसे शक्तिशाली एयर विंग को संभालने में सक्षम USS जेराल्ड आर. फ़ोर्ड (CVN-78) मध्य पूर्व के अभियानों के लिए उपलब्ध नहीं है। फ़ोर्ड इस समय सदर्न कमांड के अधीन कैरेबियाई क्षेत्र में ऑपरेशन सदर्न स्पीयर के तहत तैनात है और वेनेज़ुएला से जुड़े अभियानों में सहयोग दे रहा है। इससे खाड़ी में अतिरिक्त कैरियर शक्ति-प्रक्षेपण के विकल्प सीमित हो जाते हैं।
कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के अलावा कई सतही युद्धपोत फ़ारस की खाड़ी और आसपास के जलक्षेत्र में तैनात हैं। गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक USS मिट्चर (DDG-57) और USS रूज़वेल्ट (DDG-80) इस क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं, और रूज़वेल्ट की मौजूदगी लाल सागर में भी बताई गई है। तीन लिटोरल कॉम्बैट शिप—USS कैनबरा (LCS-30), USS तुल्सा (LCS-16) और USS सांता बारबरा (LCS-32)—बारूदी सुरंग-रोधी उपकरणों से लैस हैं, जो किसी भी ऐसे संघर्ष में अनिवार्य क्षमता होगी जिसमें ईरान होरमुज़ जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश करे।
पनडुब्बियों की तस्वीर, हमेशा की तरह, धुँधली है। हमें पता है कि USS जॉर्जिया (SSGN-729) ने जून 2025 के हमलों में हिस्सा लिया था और इस्फ़हान पर 30 से अधिक टॉमहॉक दाग़े थे। नौसेना के पास ओहायो श्रेणी की चार गाइडेड-मिसाइल पनडुब्बियाँ (SSGN) हैं—ओहायो, फ़्लोरिडा, मिशिगन और जॉर्जिया—जिनमें से हर एक 154 टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें ले जाने में सक्षम है। सितंबर 2025 में नौसेना ने USS ओहायो और USS फ़्लोरिडा को वित्त वर्ष 2026 की निष्क्रियकरण सूची से हटा दिया, जिससे यह विशाल प्रहार क्षमता बरक़रार रही। SSGN की मौजूदा स्थिति अज्ञात है, लेकिन इस क्षेत्र में एक भी हो तो वह बड़ी मारक क्षमता जोड़ देगी।
वायु सेनाएँ
मौजूदा जमावड़े का सबसे दिखाई देने वाला हिस्सा जॉर्डन के मुवफ़्फ़क़ साल्ती एयर बेस पर F-15E स्ट्राइक ईगल विमानों की तैनाती है। 18 से 21 जनवरी 2026 के बीच 494वें एक्सपेडिशनरी फाइटर स्क्वाड्रन के लगभग 35 विमान ब्रिटेन के RAF लेकनहीथ से पहुँचे। 12 विमानों का दूसरा जत्था 21 जनवरी को ब्रिटेन से रवाना हुआ।
CENTCOM ने 20 जनवरी को सार्वजनिक रूप से इस तैनाती को स्वीकार करते हुए कहा कि “F-15 की मौजूदगी युद्ध-तत्परता बढ़ाती है।” यह दुर्लभ सार्वजनिक स्वीकृति उस संदेश को रेखांकित करती है जो प्रशासन देना चाहता है। F-15E दोहरी भूमिका वाला लड़ाकू विमान है, जो हवाई वर्चस्व और गहरे हमले—दोनों अभियानों में सक्षम है, और बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफ़ेयर क्षमताओं के लिए ईगल पैसिव/ऐक्टिव वॉर्निंग सर्वाइवेबिलिटी सिस्टम (EPAWSS) से लैस है।
F-15E का चुनाव महत्वपूर्ण है। अप्रैल 2024 में इसराइल पर हुए हमले के दौरान F-15E विमानों ने 80 से अधिक ईरानी ड्रोन मार गिराए थे, जिससे मानवरहित प्रणालियों के ख़िलाफ़ उनकी प्रभावशीलता साबित हुई—ये प्रणालियाँ ईरानी और प्रॉक्सी क्षमताओं का अहम हिस्सा हैं। इन विमानों को 70mm हाइड्रा रॉकेटों से लैस देखा गया है, जो उस मुठभेड़ में बेहद कारगर साबित हुए थे।
जॉर्डन का मुवफ़्फ़क़ साल्ती एयर बेस लगभग एक दशक से रोटेशन पर F-15E तैनातियों की मेज़बानी करता रहा है। यह बेस पश्चिमी ईरान पर हमले की सीमा के भीतर है और कैरियर विमानन का एक ज़मीनी विकल्प देता है—खाड़ी देशों में अपने क्षेत्र से हमले किए जाने को लेकर मेज़बान देशों की संवेदनशीलता को देखते हुए यह अहम पहलू है।
अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की तैनाती की ख़बरें हैं, लेकिन उनकी पुष्टि कम ठोस है। F-22 रैप्टर स्टेल्थ लड़ाकू विमान संयुक्त अरब अमीरात के अल धफ़रा एयर बेस पर तैनात हैं, जो हवाई वर्चस्व क्षमता और क्षेत्रीय प्रतिरोध प्रदान करते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक़ एक F-16 स्क्वाड्रन सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर तैनात किया गया है और एक A-10 स्क्वाड्रन F-15E के साथ मुवफ़्फ़क़ साल्ती पर हो सकता है। बताया जाता है कि दो F-35 स्क्वाड्रन भी रणक्षेत्र में हैं, हालाँकि उनके ठीक-ठीक ठिकानों की पुष्टि नहीं हुई है।
अल धफ़रा पर MQ-4C ट्राइटन उच्च-ऊँचाई, लंबी अवधि वाले मानवरहित विमान भी तैनात हैं, जो ईरानी सैन्य गतिविधियों और खाड़ी में समुद्री आवाजाही पर लगातार निगरानी की क्षमता देते हैं—जो बेहद अहम है।
डिएगो गार्सिया, ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र का दूरस्थ प्रवाल द्वीप जहाँ एक बड़ा अमेरिकी सैन्य ठिकाना है, ऐतिहासिक रूप से मध्य पूर्व में रणनीतिक बमवर्षक अभियानों के लिए मंच का काम करता रहा है। यह बेस ईरान से लगभग 2,358 मील दूर है—B-2 स्पिरिट और B-52H स्ट्रैटोफ़ोर्ट्रेस की मारक सीमा के भीतर।
मार्च 2025 में छह B-2 स्पिरिट डिएगो गार्सिया भेजे गए थे—यानी पूरे B-2 बेड़े का लगभग 30 प्रतिशत। B-52H स्ट्रैटोफ़ोर्ट्रेस मई 2025 में पहुँचे। B-2 विमानों का इस्तेमाल यमन में हूती ठिकानों पर हमलों में किया गया, जिसके बाद मई में युद्धविराम होने पर वे व्हाइटमैन एयर फ़ोर्स बेस लौट गए। सुरक्षा के लिए मई 2025 में F-15 लड़ाकू विमान इस बेस पर तैनात किए गए।
डिएगो गार्सिया पर रणनीतिक बमवर्षकों की मौजूदा स्थिति अज्ञात है। जनवरी 2026 के अंत तक उनकी मौजूदगी या अनुपस्थिति की पुष्टि करने वाली कोई हालिया उपग्रह तस्वीर या विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं है। अगर B-2 विमान इस बेस पर लौट आए हैं, तो वे मज़बूत भूमिगत ठिकानों के ख़िलाफ़ GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर का इस्तेमाल करने में सक्षम होंगे। B-52H ईरानी वायु रक्षा की सीमा से बाहर रहकर AGM-158 जॉइंट एयर-टू-सरफ़ेस स्टैंडऑफ़ मिसाइलें (JASSM) दाग़ सकते हैं।
ईरान ने साफ़ तौर पर धमकी दी है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में वह डिएगो गार्सिया पर हमला करेगा, क्योंकि वह इसे बमवर्षक ठिकाने के रूप में इसकी अहमियत समझता है। क्या ईरान के पास इतनी दूरी पर ऐसी धमकी को अंजाम देने की क्षमता है, यह सवाल बना हुआ है।
अभियानगत तैयारियों का शायद सबसे स्पष्ट संकेत टैंकर विमानों की संख्या में अचानक हुई बढ़ोतरी है। 22 जनवरी तक अल उदेइद एयर बेस पर कम से कम 20 KC-135 स्ट्रैटोटैंकर मौजूद थे—सामान्य स्तर से कहीं अधिक। 14 जनवरी को आंशिक खाली कराने के दौरान छह KC-135 रात क़रीब 10 बजे बेस से रवाना हुए। जनवरी के मध्य में 48 घंटों के भीतर एक दर्जन KC-135 यूरोपीय ठिकानों से मध्य पूर्व पहुँचे। चार अतिरिक्त टैंकर F-15E के साथ जॉर्डन भेजे गए।
हवा में ईंधन भरने की क्षमता लंबे हवाई अभियानों को संभव बनाती है। जॉर्डन, खाड़ी देशों या विमानवाहक पोतों के डेक से उड़ान भरने वाले हमलावर विमानों को ईरान के भीतर गहरे लक्ष्यों तक पहुँचने और सुरक्षित लौटने के लिए टैंकर सहयोग चाहिए। डिएगो गार्सिया से उड़ने वाले रणनीतिक बमवर्षकों को आने-जाने के मिशन के लिए कई बार ईंधन भरना पड़ेगा। टैंकरों का यह जमावड़ा संकेत देता है कि योजना किसी सीमित, एक बार के हमले की नहीं, बल्कि निरंतर हवाई अभियानों की है।
हवाई परिवहन गतिविधि भी काफ़ी बढ़ी है। दो दिनों के भीतर इंग्लैंड से जॉर्डन के लिए 10 से अधिक C-17 ग्लोबमास्टर III उड़ानों को ट्रैक किया गया, जो संभवतः F-15E तैनाती के समर्थन के लिए उपकरण और कर्मी पहुँचा रही थीं। C-5M गैलेक्सी भारी परिवहन विमान पूर्व की ओर जाते देखे गए हैं। डिएगो गार्सिया के लिए C-17 उड़ानों की ख़बरें हैं, जिनसे संभवतः उस बमवर्षक ठिकाने पर अतिरिक्त हथियार या उपकरण पहुँचाए जा रहे हैं।
मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ
टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफ़ेंस (THAAD) प्रणाली अमेरिकी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा की ऊपरी परत है। 22 जनवरी को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि अतिरिक्त THAAD बैटरियाँ मध्य पूर्व भेजी जा रही हैं। अक्टूबर 2023 से एक बैटरी इसराइल में है, जिसे लगभग 100 अमेरिकी कर्मी संचालित करते हैं।
THAAD की क्षमताएँ प्रभावशाली हैं: यह 150-200 किलोमीटर की दूरी और 150 किलोमीटर से अधिक ऊँचाई पर—यानी वायुमंडल से काफ़ी ऊपर—बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक सकती है। हर बैटरी की क़ीमत लगभग $2.73 billion है, जबकि एक इंटरसेप्टर की क़ीमत $12.7 million है।
लेकिन इस प्रणाली के सामने एक गंभीर अड़चन है: भंडार। जून 2025 के संघर्ष के दौरान THAAD बैटरियों ने ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों से इसराइल की रक्षा करते हुए 92 इंटरसेप्टर ख़र्च कर दिए। उस मुठभेड़ से पहले कुल THAAD इंटरसेप्टर भंडार 632 था। रक्षा अधिकारियों का अनुमान है कि उत्पादन की मौजूदा दर को देखते हुए इसकी भरपाई में तीन से आठ साल लगेंगे। इस सीमित भंडार का अर्थ है कि THAAD का इस्तेमाल चुनिंदा तौर पर सबसे ख़तरनाक आने वाली मिसाइलों के ख़िलाफ़ करना होगा, जबकि कम चुनौतीपूर्ण ख़तरों से निचली परत की प्रणालियाँ निपटेंगी।
अतिरिक्त पैट्रियट PAC-3 बैटरियाँ भी इस क्षेत्र में तैनात की जा रही हैं। पैट्रियट प्रणालियाँ कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज़ मिसाइलों और विमानों के ख़िलाफ़ निचली परत की रक्षा देती हैं। ये बैटरियाँ सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन, इराक़, क़तर और संयुक्त अरब अमीरात में तैनात हैं।
मार्च 2025 में बढ़ते तनाव के बीच कम से कम दो पैट्रियट बैटरियाँ एशिया से मध्य पूर्व भेजी गईं। दक्षिण कोरिया की एक यूनिट 30 अक्टूबर 2025 को प्रायद्वीप लौट आई, ताकि उपकरणों को उन्नत करने के बाद कोरियाई प्रायद्वीप की रक्षा में अपनी भूमिका फिर से संभाल सके। यह रोटेशन दिखाता है कि मध्य पूर्व की माँगें वैश्विक स्तर पर प्रतिबद्ध बलों पर कितना दबाव डालती हैं।
अल उदेइद पर जून 2025 के हमले के दौरान पैट्रियट बैटरियों ने अधिकांश ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया, हालाँकि एक मिसाइल बेस पर गिरी। प्रणाली के प्रदर्शन ने वर्षों के निवेश को सही ठहराया, लेकिन यह भी दिखाया कि दृढ़ संकल्प के साथ किए गए मिसाइलों के झुंड-हमले के सामने कोई भी रक्षा निर्दोष नहीं होती।
12 जनवरी 2026 को अल उदेइद एयर बेस पर एक नया वायु रक्षा समन्वय केंद्र—मिडिल ईस्ट एयर डिफ़ेंस-कंबाइंड डिफ़ेंस ऑपरेशंस सेंटर (MEAD-CDOC)—शुरू हुआ। यह केंद्र 17 देशों के बीच मिसाइल रक्षा अभियानों को जोड़ता है, जिससे इंटरसेप्ट अभियानों का वास्तविक समय में समन्वय और सेंसर साझा करना संभव होता है। यह बहुपक्षीय तरीक़ा अलग-अलग राष्ट्रीय प्रणालियों की प्रभावशीलता कई गुना बढ़ा देता है और कवरेज में छेद रहने का ख़तरा घटाता है।
ज़मीनी बल और क्षेत्रीय मौजूदगी
2025 के मध्य तक मध्य पूर्व में लगभग 40,000 से 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात थे, जिनमें स्थायी ठिकानों के कर्मी और छोटे अग्रिम ठिकानों पर तैनात कर्मी—दोनों शामिल हैं। अक्टूबर 2023 में इसराइल-हमास युद्ध शुरू होने से पहले यह संख्या क़रीब 34,000 थी।
सबसे बड़ा जमावड़ा कुवैत में है, जहाँ कैंप अरिफ़जान क्षेत्रीय अभियानों के लिए मुख्य रसद और हवाई परिवहन केंद्र का काम करता है। क़तर का अल उदेइद एयर बेस CENTCOM के अग्रिम मुख्यालय के रूप में काम करता है, हालाँकि दोहा ने अपने क्षेत्र से आक्रामक हमले किए जाने का विरोध जताया है। बहरीन में अमेरिकी पाँचवें बेड़े का मुख्यालय है, जिससे वह खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक अभियानों का केंद्र बन जाता है।
प्रमुख बेस अवसंरचना
अल उदेइद मध्य पूर्व का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य बेस है और CENTCOM के अग्रिम मुख्यालय का काम करता है। इस बेस पर लगभग 10,000 कर्मी तैनात हैं और यह इराक़, सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान में अभियानों के लिए केंद्रीय रहा है। जून 2025 के संघर्ष के दौरान कई हवाई अभियानों का समन्वय अल उदेइद से ही किया गया था।
इस बेस का महत्व इसे अमूल्य भी बनाता है और असुरक्षित भी। जून 2025 की जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अल उदेइद को निशाना बनाया था, जिसमें एक बैलिस्टिक मिसाइल ठिकाने पर गिरी और एक रेडोम को नुक़सान पहुँचा। 14 जनवरी 2026 को आंशिक खाली कराने का आदेश दिया गया और “सैकड़ों” कर्मियों को दूसरी सुविधाओं तथा स्थानीय होटलों में भेजा गया। उसी शाम क़रीब 10 बजे छह KC-135 टैंकर बेस से रवाना हुए।
क़तर का राजनीतिक रुख़ इस मामले को और उलझा देता है। दोहा कह चुका है कि वह अपनी ज़मीन से अमेरिकी हमले शुरू किए जाने का विरोध करता है, हालांकि किसी वास्तविक संघर्ष के दौरान इस रुख़ को व्यावहारिक तौर पर कैसे लागू किया जाएगा, यह अभी अस्पष्ट है। ख़बरों के मुताबिक़, अल उदैद पर तैनात ब्रिटिश बलों ने भी अपनी मौजूदगी घटाई है।
जॉर्डन का मुवफ़्फ़क़ साल्ती एयर बेस मौजूदा सैन्य जमावड़े में एक अहम केंद्र के रूप में उभरा है। इस अड्डे पर अब लगभग 35 F-15E Strike Eagles हैं और हाल के दिनों में यहां मालवाहक विमानों की आवाजाही काफ़ी बढ़ी है। खाड़ी देशों के उलट, जॉर्डन की ईरान के साथ कोई समुद्री सीमा नहीं है, जिससे ईरानी नौसैनिक ख़तरों के प्रति उसकी जोखिम-क्षमता घटती है, जबकि स्ट्राइक विमान फिर भी ईरानी ठिकानों की मारक सीमा के भीतर रहते हैं।
मुवफ़्फ़क़ साल्ती पर लंबे समय से जारी अमेरिकी मौजूदगी—लगभग एक दशक से F-15E की बारी-बारी से तैनाती—ऐसा ढांचा और मेज़बान देश की परिचितता उपलब्ध कराती है, जो पहले से स्थापित है। जॉर्डन का राजतंत्र ऐतिहासिक रूप से क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थक रहा है, जिससे आक्रामक अभियानों के लिए वह कुछ खाड़ी विकल्पों की तुलना में राजनीतिक रूप से ज़्यादा भरोसेमंद अड्डा बन जाता है।
अमेरिकी सैन्य शक्ति-प्रक्षेपण में डिएगो गार्सिया की स्थिति अलग है। हिंद महासागर में स्थित यह प्रवाल द्वीप ईरान से 2,358 मील दूर है—इतना दूर कि अधिकांश ईरानी हथियारों की पहुंच से बाहर रहे, लेकिन इतना पास कि हवा में ईंधन भरने के साथ बमवर्षक अभियान संभव हों। इस अड्डे का एकांत और ब्रिटिश संप्रभुता वैसा राजनीतिक आवरण देती है, जो मुस्लिम-बहुल खाड़ी देशों के अड्डे नहीं दे सकते। अगर रणनीतिक बमवर्षक मौजूद हैं, तो ईरान के मज़बूत किलेबंद ठिकानों पर हमलों के लिए डिएगो गार्सिया ही संभवतः उनका प्रस्थान-बिंदु होगा।
बलों की आवाजाही का कालक्रम
5 जनवरी: CENTCOM के ज़िम्मेदारी क्षेत्र में शून्य विमानवाहक पोत (स्रोत)—अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार। 9 जनवरी: ईरानी विरोधों के बावजूद CENTCOM ने बल-संरचना में “कोई बदलाव नहीं” की घोषणा की (स्रोत)। 12 जनवरी: अल उदैद पर नई वायु रक्षा समन्वय इकाई (MEAD-CDOC) शुरू हुई (स्रोत)। 13 जनवरी: USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश नॉरफ़ॉक से रवाना (स्रोत); गंतव्य अज्ञात। 14 जनवरी: अल उदैद से आंशिक निकासी का आदेश (स्रोत); छह KC-135 रवाना। ट्रंप ने पोस्ट किया, “मदद रास्ते में है।” 15 जनवरी: USS अब्राहम लिंकन के फ़िलीपींस से पश्चिम की ओर बढ़ने की पुष्टि (स्रोत)। 16 जनवरी: ट्रंप का दावा कि ईरान ने “प्रदर्शनकारियों को मारना बंद कर दिया”—अस्थायी विराम, असत्यापनीय। 18 जनवरी: पहले F-15E जॉर्डन के मुवफ़्फ़क़ साल्ती पहुँचे (स्रोत); डिएगो गार्सिया के लिए C-17 उड़ानों की ख़बर। 20 जनवरी: CENTCOM ने सार्वजनिक रूप से F-15E की तैनाती स्वीकार की (स्रोत)। 21 जनवरी: 12 F-15E की दूसरी खेप ब्रिटेन से रवाना; लगभग 35 अब रंगमंच में। 22 जनवरी: अल उदैद पर बीस या उससे अधिक KC-135 (स्रोत); THAAD/पैट्रियट तैनाती की ख़बर। 23-24 जनवरी: ट्रंप ने खाड़ी की ओर बढ़ते “विशाल बेड़े” का ज़िक्र किया (स्रोत); एयरलाइनों ने मध्य पूर्व की उड़ानें रद्द कीं। 25-26 जनवरी: USS अब्राहम लिंकन ओमान की खाड़ी में पहुँचा (स्रोत)। 27 जनवरी: अमेरिका ने पूरे मध्य पूर्व में क्षेत्रीय ‘हवाई अभ्यास’ की घोषणा की (स्रोत)। जनवरी मध्य: ख़बरों के मुताबिक़ CENTCOM को “अगले महीने” के लिए 24/7 युद्ध-योजना मुद्रा में रहने का आदेश दिया गया (स्रोत)।
जो हम नहीं जानते
खुले स्रोतों पर आधारित विश्लेषण की अपनी सीमाएं होती हैं और कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। इन खाली जगहों को समझना उतना ही ज़रूरी है, जितना यह समझना कि हम क्या जानते हैं।
USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश का गंतव्य और समय-सारणी: प्रमाणन प्रशिक्षण पूरा किए बिना और गंतव्य की घोषणा किए बिना इस विमानवाहक पोत का रवाना होना इस बारे में बड़ी अनिश्चितता पैदा करता है कि क्या क्षेत्र में दूसरा विमानवाहक पोत पहुंचेगा।
डिएगो गार्सिया पर रणनीतिक बमवर्षकों की मौजूदगी: किसी ताज़ा उपग्रह तस्वीर या भरोसेमंद रिपोर्ट से यह पुष्टि नहीं होती कि B-2 या B-52 इस अड्डे पर लौटे हैं या नहीं। जून 2025 के हमलों में बमवर्षकों की भूमिका को देखते हुए यह सबसे अहम खाली जगहों में से एक है।
पनडुब्बियों की तैनाती: SSGN और तेज़-मार पनडुब्बियों की अवस्थिति सबसे कड़ाई से गोपनीय रखी जाने वाली बातों में शामिल है। एक अकेला SSGN भी उपलब्ध हमला-पैकेज में 154 Tomahawk cruise missiles जोड़ देता है।
अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की तैनाती: पुष्ट F-15E के अलावा F-16, A-10 और F-35 की तैनाती की ख़बरें अब भी असत्यापित हैं।
मिसाइल रक्षा की सटीक तैनाती: हालांकि हमें पता है कि THAAD और Patriot सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं, लेकिन उनकी विशिष्ट जगहें और संख्या अब भी स्पष्ट नहीं हैं।
RC-135 टोही विमान: 14 जनवरी तक किसी RC-135 Rivet Joint signals intelligence विमान को मध्य पूर्व की ओर जाते नहीं देखा गया था—यह हैरान करने वाली बात है, क्योंकि संघर्ष से पहले ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने में आम तौर पर इनकी भूमिका होती है।
ईरानी विरोध प्रदर्शनों में हताहत: अनुमान 100 से लेकर 12,000 से अधिक मारे गए लोगों तक जाते हैं। संचार ठप होने के कारण सत्यापन असंभव है, जिससे शासन की स्थिरता और हस्तक्षेप के औचित्य का आकलन जटिल हो जाता है।
आकलन
संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के ख़िलाफ़ लगातार अभियान चलाने में सक्षम एक बहु-क्षेत्रीय हमला-पैकेज तैयार कर रहा है। विमानवाहक पोतों की वायु क्षमता, ज़मीन-आधारित लड़ाकू विमानों, टैंकर समर्थन और मिसाइल रक्षा प्रणालियों की एक साथ तैनाती बताती है कि तैयारी किसी सीमित, एकबारगी हमले की नहीं, बल्कि किसी बड़ी आकस्मिक स्थिति की है।
यह मुद्रा तीन संभावित उपयोगों का संकेत देती है: वास्तविक युद्ध के बिना ईरानी आचरण में बदलाव के इरादे से निवारक संदेश; प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई कर रहे IRGC और बसीज बलों पर हमलों की तैयारी; या ईरानी सैन्य और परमाणु ढांचे के ख़िलाफ़ व्यापक अभियान की बुनियाद।
कई कारक अमेरिकी इरादों और क्षमताओं को लेकर अनिश्चितता पैदा करते हैं। अब तक मौजूद विमानवाहक पोतों की कमी ने क्षमता घटने की एक खिड़की छोड़ी। उपलब्ध सैन्य शक्ति का बड़ा हिस्सा हाल ही में वेनेज़ुएला अभियानों के लिए कैरिबियन में बढ़ाया गया था। मेज़बान देशों की अनुमति—ख़ासकर क़तर और खाड़ी देशों की—राजनीतिक बाधा बनी हुई है, क्योंकि इन सरकारों को ईरानी जवाबी कार्रवाई का डर है। एक पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने पत्रकारों से कहा कि कोई भी बड़ा अभियान “विशाल होगा” और “हाल के अतीत में हमने जो कुछ भी संभवतः किया है, उसे बौना कर देगा।”
इसराइल का रुख़ जटिलता की एक और परत जोड़ता है। ख़बरों के मुताबिक़, इसराइली अधिकारियों ने आग्रह किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका किसी भी हमले को तब तक टाल दे, जब तक ईरानी जवाबी कार्रवाई से बचाव में मदद के लिए पर्याप्त अमेरिकी बल तैनात न हो जाएं। जून 2025 के संघर्ष में इसराइली इंटरसेप्टर भंडार ख़त्म हो गए थे, और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कथित तौर पर वॉशिंगटन को बता दिया है कि इसराइल इस समय किसी बड़े ईरानी जवाब से बचाव के लिए तैयार नहीं है।
ईरान ने, अपनी ओर से, किसी भी अमेरिकी हमले के जवाब में “पूर्ण युद्ध” की धमकी दी है और क्षेत्रीय मेज़बानों को चेतावनी दी है कि उनके ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। ईरानी क्षमताएं इस बयानबाज़ी के अनुरूप हैं या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन जून 2025 के अनुभव ने दिखाया कि ईरान अमेरिकी अड्डों पर सीधे हमला करने की इच्छा रखता है।
यह जमावड़ा वास्तविक है, पर्याप्त है और तेज़ी पकड़ रहा है। यह सैन्य कार्रवाई में बदलेगा या किसी कूटनीतिक नतीजे के लिए दबाव के साधन के तौर पर इस्तेमाल होगा, यह वॉशिंगटन, तेहरान और क्षेत्रीय राजधानियों में निर्णय लेने वालों के हाथ में है। जो बात निश्चित है, वह यह कि संयुक्त राज्य अमेरिका खुद को ऐसी स्थिति में ला रहा है, जहां उसके पास विकल्प हों।
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