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ईरान का तेल उत्पादन और निर्यात तेज़ी से गिरा

अगर ईरान पर नाकेबंदी जारी रही, तो दो महीने के भीतर तेहरान के पास चीन को भेजने लायक उपलब्ध तेल भंडार ख़त्म हो सकते हैं।

डाल्गा ख़ातिनोग्लू ईरान की ऊर्जा और समष्टि-अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ हैं और अज़रबैजान, मध्य एशिया और अरब देशों में ऊर्जा पर शोधकर्ता हैं।

China’s imports of Iranian oil have fallen sharply since the start of U.S.-Israel operations against the Islamic Republic on February 28, 2026.
28 फ़रवरी 2026 को इस्लामी गणराज्य ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इसराइल के अभियान शुरू होने के बाद से चीन का ईरानी तेल आयात तेज़ी से घटा है। · Shutterstock

जहाज़रानी और ऊर्जा बाज़ार के नए आँकड़ों से संकेत मिलता है कि ईरान का तेल क्षेत्र पिछले कई वर्षों की सबसे गंभीर रुकावट झेल रहा है। बीते छह हफ़्तों में क्षेत्रीय जलक्षेत्रों के ज़रिए ईरानी कच्चे तेल का पारगमन व्यावहारिक रूप से ठप हो गया है, और चीन—जो इस्लामी गणराज्य का एकमात्र बड़ा तेल ग्राहक है—ने भी ईरानी कच्चे तेल की ख़रीद लगातार घटाई है।

कमोडिटी इंटेलिजेंस कंपनी केप्लर (Kpler) के आँकड़ों के मुताबिक़ हाल के महीनों में चीन का ईरानी तेल आयात तेज़ी से घटा है। मई 2026 में डिलिवरी अप्रैल 2026 के मुक़ाबले 25 प्रतिशत और मार्च 2026 के मुक़ाबले 38 प्रतिशत कम रही।

चीनी रिफ़ाइनरियाँ इस समय ईरान से प्रतिदिन 10 लाख बैरल से कुछ ज़्यादा तेल आयात कर रही हैं। हालांकि ये खेप सीधे ईरानी निर्यात टर्मिनलों से नहीं, बल्कि ईरान के फ़्लोटिंग स्टोरेज भंडार से आ रही हैं—यानी वह कच्चा तेल जो चीन, मलेशिया, सिंगापुर और अन्य एशियाई जलक्षेत्रों के पास लंगर डाले टैंकरों पर रखा है।

एशियाई जलक्षेत्रों में ईरान का फ़्लोटिंग ऑयल स्टोरेज भी इस्लामी गणराज्य के ख़िलाफ़ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी अभियान शुरू होने के बाद से तेज़ी से घटा है। केप्लर का अनुमान है कि ये ऑफ़शोर भंडार क़रीब 33 मिलियन बैरल घट चुके हैं, जिससे ईरान के पास फ़्लोटिंग स्टोरेज में लगभग 89 मिलियन बैरल तेल बचा है।

केप्लर के वरिष्ठ विश्लेषक होमायून फ़लकशाही (Homayoun Falakshahi) चेतावनी देते हैं कि अगर ईरान के ख़िलाफ़ समुद्री दबाव अभियान जारी रहा, तो 60–70 दिनों के भीतर तेहरान के पास चीन को डिलिवरी के लिए उपलब्ध तेल आपूर्ति ख़त्म हो सकती है।

ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए इसके निहितार्थ गंभीर हो सकते हैं। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के आँकड़ों के अनुसार, ईरान ने पिछले साल प्रतिदिन लगभग 2 मिलियन बैरल कच्चा तेल, कंडेनसेट और परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए। उधर, ईरान के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी आँकड़े बताते हैं कि देश के कुल निर्यात में तेल राजस्व की हिस्सेदारी क़रीब 65 प्रतिशत रही—जो अर्थव्यवस्था की हाइड्रोकार्बन बिक्री पर गहरी निर्भरता को रेखांकित करता है।

इसी बीच ईरान का तेल उत्पादन तेज़ी से गिर रहा है। OPEC के आँकड़े बताते हैं कि 28 फ़रवरी 2026 को इस्लामी गणराज्य के ख़िलाफ़ अमेरिका-इसराइल अभियानों की शुरुआत से पहले दर्ज स्तरों की तुलना में अप्रैल 2026 में ईरानी कच्चे तेल का उत्पादन प्रतिदिन 350,000 बैरल घट गया। अप्रैल 2026 में ईरानी उत्पादन लगभग 2.85 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा।

निर्यात अवसंरचना की सीमाएँ समस्या को और बढ़ा रही हैं। केप्लर के शिपिंग आँकड़े बताते हैं कि इस महीने ईरानी टर्मिनलों पर तेल लोडिंग गतिविधि घटकर महज़ 640,000 बैरल प्रतिदिन रह गई है। ईरानी जलक्षेत्र के पास लंगर डाले टैंकर पहले ही क्षमता के क़रीब पहुँच चुके हैं और ज़मीनी भंडारण सुविधाएँ भी भर रही हैं; ऐसे में तेहरान के पास जल्द ही उत्पादन में और कटौती करने के अलावा शायद कोई विकल्प न बचे।

ऐसी स्थिति में ईरान को कच्चे तेल का उत्पादन घटाकर घरेलू खपत के स्तर के क़रीब लाना पड़ सकता है, जिसका अनुमान लगभग 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। यह परिदृश्य ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिकी प्रतिबंधों के दोबारा लागू होने के बाद से ईरानी तेल उत्पादन में सबसे तीखी गिरावटों में से एक होगा।

लेकिन कमजोर पड़ती चीनी मांग से जूझने वाला अकेला तेल आपूर्तिकर्ता ईरान नहीं है। हाल के महीनों में चीनी रिफ़ाइनरियों ने व्यापक रूप से कच्चे तेल का आयात घटाया है, क्योंकि ऊँची वैश्विक तेल क़ीमतें और सुस्त औद्योगिक गतिविधि मुनाफ़े के मार्जिन और खपत पर दबाव डाल रही हैं। मार्च और अप्रैल में चीन का कुल कच्चा तेल आयात पहले के दौर की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत घटा।

रूस से चीन को होने वाला तेल निर्यात भी प्रभावित हुआ है। चीनी सीमा शुल्क के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले महीने रूसी कच्चे तेल का आयात 11 प्रतिशत घटकर लगभग 2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया।

उथल-पुथल ऊर्जा बाज़ारों तक सीमित नहीं है। चीन और खाड़ी सहयोग परिषद के देशों के बीच व्यापार प्रवाह में भी बड़ा व्यवधान आया है। पहले, इस क्षेत्र के अरब देशों को चीनी निर्यात औसतन 13 अरब डॉलर से 14 अरब डॉलर प्रति माह के बीच था। लेकिन चीनी सीमा शुल्क के आँकड़े बताते हैं कि मार्च और अप्रैल में यह आंकड़ा लगभग आधा रह गया।

चीन के साथ ईरान का ग़ैर-तेल व्यापार इससे भी ज़्यादा तेज़ी से बिगड़ा है। बताया जाता है कि इसी अवधि में द्विपक्षीय ग़ैर-ऊर्जा कारोबार 70 प्रतिशत गिरकर केवल लगभग 200 मिलियन डॉलर प्रति माह रह गया।

इसी दौरान, व्यापक क्षेत्रीय उथल-पुथल के बावजूद चीन और इसराइल के बीच व्यापार अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। चीनी सीमा शुल्क के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले महीने इसराइल के साथ चीन का व्यापार, ईरान के साथ उसके ग़ैर-तेल व्यापार से लगभग 13 गुना बड़ा था। इस साल के पहले चार महीनों में इसराइल से चीन का आयात 62 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.5 अरब डॉलर हो गया, जबकि इसराइल को चीनी निर्यात भी 4 प्रतिशत बढ़कर इसी स्तर के आसपास पहुँच गया। ये आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र में बीजिंग की कारोबारी प्राथमिकताएँ कैसे बदल रही हैं, जबकि तेहरान के साथ उसके आर्थिक रिश्ते बढ़ते दबाव में आते जा रहे हैं।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Iran’s Oil Production and Exports Enter a Steep Decline

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