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क्या मादुरो का अतीत एर्दोआन का भविष्य है?

निहत्थे कुर्द किसानों पर बम बरसाना एक बात है, अमेरिकी स्पेशल फ़ोर्सेज़ का सामना करना बिल्कुल दूसरी।

माइकल रुबिन ईरान, तुर्की और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका के विशेषज्ञ हैं। उनके करियर में पेंटागन में अधिकारी के तौर पर काम करने का अनुभव शामिल है। इसमें ईरान, यमन और इराक़ में ज़मीनी स्तर के अनुभव के साथ-साथ 9/11 से पहले तालिबान के साथ संपर्क भी रहा है। श्री रुबिन ने सैन्य शिक्षा में भी योगदान दिया है और अमेरिकी नौसेना तथा मरीन इकाइयों को क्षेत्रीय संघर्षों और आतंकवाद के बारे में पढ़ाया है। उनके विद्वतापूर्ण काम में कई अहम प्रकाशन शामिल हैं, जैसे “Dancing with the Devil” और “Eternal Iran।” रुबिन ने येल यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएच.डी. और एम.ए., तथा जीव विज्ञान में बी.एस. की डिग्री हासिल की।

Turkish President Recep Tayyip Erdoğan with U.S. President Donald Trump at a September 30, 2025, meeting on Middle East issues at the United Nations Headquarters in New York.
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 30 सितंबर, 2025 को मध्य पूर्व के मुद्दों पर हुई बैठक में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ। · Shutterstock

3 जनवरी, 2026 को काराकास समय के अनुसार रात 2 बजे के ठीक बाद अमेरिकी स्पेशल फ़ोर्सेज़ ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के परिसर में धावा बोला, उन्हें तेज़ी से क़ाबू में लिया और हेलीकॉप्टर, जहाज़ और विमान के ज़रिए न्यूयॉर्क सिटी ले गईं, जहां ख़ुद को क्रांतिकारी कहने वाले इस नेता पर अब अमेरिकी ज़िला अदालत, दक्षिणी न्यूयॉर्क ज़िला (United States District Court for the Southern District of New York) में नार्को-आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों से जुड़े आरोप हैं।

हालांकि कई अमेरिकी नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई की वैधता और उनकी मंशा—दोनों—की आलोचना की, लेकिन मादुरो के लिए किसी ने आँसू नहीं बहाए। वह एक क्रूर तानाशाह था, जिसके सत्ता में बिताए वर्षों ने—पहले उपराष्ट्रपति के रूप में और फिर ह्यूगो चावेज़ की मृत्यु के बाद राष्ट्रपति के रूप में—देश को कंगाल कर दिया। किसी भी दल के बहुत-से अमेरिकी अधिकारियों को मादुरो के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) या अमेरिका द्वारा घोषित आतंकी संगठनों—हिज़्बुल्लाह और हमास—से उसके रिश्तों पर भी कोई संदेह नहीं है।

मादुरो की गिरफ़्तारी की मिसाल पहले से मौजूद है। दिसंबर 1989 में राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश ने पनामा के तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को पकड़ने के लिए ऑपरेशन जस्ट कॉज़ शुरू किया था। सैन्य कार्रवाई एक महीने से कुछ ही अधिक समय बाद समाप्त हुई, जब अमेरिकी बलों ने नोरिएगा को पकड़कर निर्वासित कर दिया। मियामी की एक अदालत ने नोरिएगा पर मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े दस आरोप तय किए। शुरू में उन्हें चालीस साल की सज़ा सुनाई गई, जिसे एक न्यायाधीश ने घटाकर तीस साल कर दिया। अच्छे आचरण के कारण नोरिएगा ने केवल सत्रह साल जेल में बिताए। इसके बाद उन्हें फ़्रांस में मुक़दमे का सामना करना पड़ा और अन्य आरोपों में पनामा की जेल जाना पड़ा, जहां आखिरकार 2017 में उनकी मौत हो गई।

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन को बहुत चिंतित होना चाहिए। चावेज़ की तरह और उनके ज़रिए मादुरो की तरह, एर्दोआन ने भी शुरुआती चुनावी जीत को सत्ता पर लोहे की पकड़ में बदल दिया है। दो दशकों में उन्होंने कोई भी चुनाव वैध तरीक़े से नहीं जीता—या तो नतीजों में हेरफेर किया या विपक्षी उम्मीदवारों को जेल में डाल दिया। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स प्रेस पर हमलों के मामले में तुर्की और वेनेज़ुएला को साथ-साथ रखता है। एर्दोआन और मादुरो—दोनों—ने हमास और हिज़्बुल्लाह समेत क्रांतिकारी और आतंकी समूहों को अपनाया है, अगर समर्थन नहीं दिया तो भी। एर्दोआन के परिवार के सदस्यों ने इस्लामिक स्टेट (ISIS) के साथ तेल और व्यापार से मुनाफ़ा कमाया।

शायद एर्दोआन को इसकी परवाह न हो, बल्कि वह मानता हो कि ट्रंप के साथ अपने निजी रिश्तों के दम पर वह सचमुच हत्या करके भी बच निकल सकता है। यह उसकी भूल होगी। व्हाइट हाउस के साथ उसके क़रीबी रिश्ते ट्रंप के पद छोड़ते ही संभवतः चकनाचूर हो जाएंगे। दरअसल, एर्दोआन को उन दूसरे नेताओं पर भी गौर करना चाहिए, जिन्होंने कभी वॉशिंगटन से नज़दीकी पर दांव लगाया था। नोरिएगा और मादुरो—दोनों—का राजनीतिक भाग्य अमेरिकी राजनीति के साथ बदला। राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और केंद्रीय खुफ़िया एजेंसी (CIA) ने शुरू में नोरिएगा को कम्युनिस्ट विद्रोहों के ख़िलाफ़ एक संभावित सहयोगी के रूप में अपनाया था, लेकिन बाद में केंद्रीय खुफ़िया एजेंसी के पूर्व निदेशक जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश ने तय किया कि नोरिएगा की गतिविधियों और व्यवहार को बर्दाश्त करने की क़ीमत बहुत ज़्यादा है। इसी तरह, ओबामा प्रशासन ने भी कभी चावेज़/मादुरो के नैरेटिव को अपनाया था। 2004 में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉन केरी ने कहा था कि वह चावेज़ जैसे लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए नेताओं का समर्थन करेंगे, भले ही वे “अपूर्ण” हों।

ऐसे पलटाव केवल लैटिन अमेरिका तक सीमित नहीं हैं। रीगन द्वारा इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को मध्य पूर्व में संयम की एक ताक़त बताए जाने के एक दशक से भी कम समय बाद वरिष्ठ बुश उनके खिलाफ़ युद्ध में थे। ट्रंप के बाद आने वाला कोई प्रगतिशील उत्तराधिकारी इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को साझेदार नहीं, बल्कि अछूत की तरह देख सकता है।

एर्दोआन के सामने जो आ सकता है, वह केवल किस्मत का ढलना नहीं, बल्कि मादुरो जैसा सलूक भी हो सकता है। ख़बरों के मुताबिक़ मादुरो की पत्नी ने तुर्की में नशीले पदार्थों के धंधे का पैसा सफ़ेद किया, और मादुरो का आने वाला मुक़दमा इसे उजागर कर सकता है। एर्दोआन ने ईरान के साथ कई अरब डॉलर की सोने-के-बदले-तेल वाली प्रतिबंध-चोरी की योजना की निगरानी की। हमास और हिज़्बुल्लाह से लेकर कश्मीर में भारत-विरोधी समूहों तक को उसका समर्थन जगज़ाहिर है। 2015 में तुर्की के दैनिक अख़बार जुमहूरियत (Cumhuriyet) ने तुर्की की ख़ुफ़िया सेवा की—जिसके तत्कालीन निदेशक आज विदेश मंत्री हैं—अल क़ायदा से जुड़े समूहों को हथियार पहुंचाने की तस्वीरें और वीडियो प्रकाशित किए। अल क़ायदा के तुर्क आपूर्तिकर्ताओं पर शिकंजा कसने के बजाय एर्दोआन ने अपने न्याय मंत्रालय को अख़बार पर मुक़दमा चलाने का आदेश दिया। मादक पदार्थों की तस्करी में एर्दोआन की कथित संलिप्तता से जुड़ी अफ़वाहें और सबूत चारों ओर फैले हुए हैं।

अमेरिका के प्रति एर्दोआन के अहंकार ने कई पुल जला दिए हैं। वॉशिंगटन, डी.सी. के शेरिडन सर्कल में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर एर्दोआन के अंगरक्षकों के हमले से जुड़ा वर्षों लंबा मुक़दमा तुर्की अभी-अभी हारा है। तुर्की का दूतावास बहुत पहले तुर्की के हितों का प्रतिनिधित्व करना छोड़ चुका है और अब एर्दोआन की राजनीतिक पार्टी के एक राजनीतिक कार्यालय की तरह काम करता है। अमेरिकी राजनीति के हर धड़े के सांसद एर्दोआन से घृणा करते हैं।

एर्दोआन लंबे समय से अमेरिकी राष्ट्रपतियों की पसंद बनने में माहिर रहा है, लेकिन उसकी किस्मत का यह दौर जल्द ही खत्म हो सकता है। जिस सवाल पर उसे विचार करना चाहिए, वह यह है कि क्या यह संभव है कि कोई भावी अमेरिकी राष्ट्रपति एर्दोआन के ख़िलाफ़ मादुरो जैसा ऑपरेशन करने का आदेश दे दे। जिस तरह केंद्रीय खुफ़िया एजेंसी ने मादुरो की लोकेशन पर नज़र रखने के लिए काराकास में अपनी इकाइयां डालीं, संभव है उसने तुर्की में भी ऐसा किया हो। एर्दोआन की गतिविधियां तुर्कों के लिए भले गुप्त हों, अमेरिकियों के लिए नहीं।

एर्दोआन के महलों का आकार और उनका अपेक्षाकृत अलग-थलग होना ‘पकड़ो और ले उड़ो’ जैसी कार्रवाई को अपेक्षाकृत आसान बनाता है। एर्दोआन ने सेना में सफ़ाया करके अपने चारों ओर वफ़ादारों को तो इकट्ठा कर लिया है, लेकिन यह तुर्की सेना की अपनी क्षमता की क़ीमत पर हुआ है। निहत्थे कुर्द किसानों पर बम बरसाना एक बात है; अमेरिकी स्पेशल फ़ोर्सेज़ का सामना करना बिल्कुल दूसरी।

तुर्की NATO की दुहाई दे सकता है, लेकिन यह दलील उस सूरत में बेअसर रहेगी जब यह निष्कर्ष निकाला जाए कि आगामी 2028 के चुनावों में एर्दोआन की संभावित धांधली उसे तुर्की के वैध नेता के रूप में अयोग्य ठहराती है। NATO को अनुच्छेद 5 के तहत निष्कर्ष भी देना होगा, लेकिन वह अमेरिका के ख़िलाफ़ ऐसा कभी नहीं करेगा, भले ही यूरोपीय नेताओं में एर्दोआन के कुछ दोस्त हों भी—जो उससे डरते हों, पर उसे पसंद नहीं करते। अगर अमेरिकी स्पेशल फ़ोर्सेज़ द्वारा उसे उठाए जाने से पहले किसी अमेरिकी अदालत ने उसके खिलाफ़ आरोप तय कर दिए, तो एर्दोआन के लिए सहानुभूति जुटाना और भी मुश्किल होगा। खासकर इसलिए कि उसने और विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने राजनीतिक और धार्मिक असहमति रखने वालों को तुर्की लौटाने के लिए एक वैश्विक प्रत्यर्पण अभियान रचा, ताकि उन्हें यातना और क़ैद झेलनी पड़े।

आज यह दूर की कौड़ी लग सकता है कि भविष्य में एर्दोआन को सदर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ न्यूयॉर्क तक पहुंचाने के लिए कोई ऑपरेशन हो, लेकिन अगर एर्दोआन खुद को मादुरो की नियति से सुरक्षित मान बैठा, तो वह अपना आख़िरी दांव लगा सकता है। उसे पता चल सकता है कि जिस क्षण उसके हाथ पीठ पीछे ज़िप-टाई से बांध दिए जाएंगे और उसके सिर पर संवेदना-हरण वाले चश्मे और कान के कवर चढ़ा दिए जाएंगे, वे सारे दोस्त—जिनकी आराधना का वह कभी आनंद लेता था—गायब हो जाएंगे।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Is Maduro’s Past Erdoğan’s Future?

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