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Observer

एरिट्रिया पर प्रतिबंध हटाना अमेरिका के लिए रणनीतिक हार

बुलोस के मेल-मिलाप प्रस्ताव को आगे बढ़ाना ट्रंप के लिए इथियोपियाई और एरिट्रियाई मूल के अमेरिकियों का अपमान भी होगा।

माइकल रुबिन ईरान, तुर्की और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका के विशेषज्ञ हैं। उनके करियर में पेंटागन में अधिकारी के तौर पर काम करने का अनुभव शामिल है। इसमें ईरान, यमन और इराक़ में ज़मीनी स्तर के अनुभव के साथ-साथ 9/11 से पहले तालिबान के साथ संपर्क भी रहा है। श्री रुबिन ने सैन्य शिक्षा में भी योगदान दिया है और अमेरिकी नौसेना तथा मरीन इकाइयों को क्षेत्रीय संघर्षों और आतंकवाद के बारे में पढ़ाया है। उनके विद्वतापूर्ण काम में कई अहम प्रकाशन शामिल हैं, जैसे “Dancing with the Devil” और “Eternal Iran।” रुबिन ने येल यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएच.डी. और एम.ए., तथा जीव विज्ञान में बी.एस. की डिग्री हासिल की।

President Donald Trump and U.S. Envoy Massad Boulos, to the left of Trump, meet with African leaders at the White House in July 2025.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी दूत मसाद बुलोस, बैठे हुए · Daniel Torok, White House photo via Wikimedia Commons

अदीस अबाबा, इथियोपिया—23 अप्रैल, 2026 को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने ख़बर दी कि अमेरिकी दूत मसाद बुलोस (Massad Boulos) एरिट्रिया पर लगे कुछ प्रतिबंध हटवाना चाहते हैं और संभव है कि अफ़्रीका के राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से सबसे अलग-थलग पड़े इस देश के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में भी बढ़ें। बताया जाता है कि इस पहल में मध्यस्थता मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तेह अल-सीसी ने की, जिसमें एरिट्रियाई तानाशाह इसाइयास अफ़वेर्की और बुलोस के बीच मिस्र में गुप्त वार्ता शामिल थी।

काग़ज़ पर इसका रणनीतिक तर्क समझ में आता है: लाल सागर व्यापार के लिए एक अहम गलियारा है। एरिट्रिया के पास 840 मील लंबा समुद्र तट है और वह तट से दूर कई द्वीपों पर भी दावा करता है। ईरान इस जलमार्ग को लेकर चुनौती बढ़ा रहा है—सिर्फ़ यमन में हूती मौजूदगी के ज़रिए ही नहीं, बल्कि सूडानी सशस्त्र बलों के कमांडर जनरल अब्देल फ़तेह अल-बुरहान के ज़रिए भी, जिनके नियंत्रण में सूडान का लाल सागर तट है।

हक़ीक़त में यह विचार एक आपदा है। बुलोस भोले हैं। सीसी एक ही वजह से एरिट्रिया के साथ अमेरिकी मेल-मिलाप कराना चाहते हैं: नील नदी की दो शक्तियों के बीच चल रहे स्थानीय शीत युद्ध के तहत इथियोपिया को घेरना। सीसी को स्वेज़ नहर से होकर नौवहन की स्वतंत्रता की चिंता ज़रूर है, लेकिन अगर उन्हें सचमुच अमेरिकी सुरक्षा की परवाह होती तो वे हूती-मित्र बुरहान का समर्थन नहीं करते।

इसाइयास का पुनर्वास कराने की कोशिश वैसी है जैसे 25 साल के मुक्केबाज़ी चैंपियन के ख़िलाफ़ इनामी मुक़ाबले के लिए कैंसरग्रस्त, अंधे, कटे अंग वाले और कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति को चुना जाए। आख़िरकार, इसाइयास 80 साल के हैं। बताया जाता है कि उन्हें स्ट्रोक या अन्य स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ा है। अफ़्रीका के सबसे अधिनायकवादी देश में उत्तराधिकार भी स्पष्ट नहीं है।

अगर इसाइयास टिके भी रहें, तो वे कुख्यात रूप से भरोसेमंद नहीं हैं। अलग-अलग समय पर उन्होंने इसराइल और फिर ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और फिर क़तर, रूस और अब शायद अमेरिका—सबके साथ गठजोड़ किया है। उन्होंने हर पड़ोसी पर हमला किया है—इथियोपिया, जिबूती और सूडान। 1998 में उन्होंने एरिट्रियाई बलों को विवादित सीमावर्ती क़स्बे बादमे पर क़ब्ज़े के लिए इथियोपिया पर हमला करने का आदेश दिया, जिस युद्ध में शायद 100,000 से अधिक लोग मारे गए। हाल के वर्षों में उन्होंने सोमाली सशस्त्र बलों को प्रशिक्षण देने की पेशकश की और फिर उन्हें इथियोपिया में अपनी ओर से लड़ने पर मजबूर किया। किसी भी वस्तुनिष्ठ कसौटी पर एरिट्रिया आतंकवाद का राज्य-प्रायोजक भी है। पाँच साल पहले, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने तिग्राय में उनकी कार्रवाइयों के लिए एरिट्रियाई रक्षा बलों के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ फ़िलिपोस वोल्डेयोहानेस पर प्रतिबंध लगाए थे।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बुलोस के मेल-मिलाप प्रस्ताव को आगे बढ़ाना इथियोपियाई और एरिट्रियाई मूल के अमेरिकियों का अपमान भी होगा। इसाइयास का एरिट्रिया मूलतः एक ग़ुलाम राज्य है, जहाँ की आबादी को अनिश्चितकालीन और बिना वेतन की सैन्य सेवा करनी पड़ती है। कई इथियोपियाई लोगों के रिश्तेदार इसाइयास द्वारा शुरू किए गए युद्धों में मारे गए या आतंकित हुए हैं। अमेरिका के भीतर एरिट्रियाई राजनयिक और उनके मुखौटा संगठन एरिट्रियाई प्रवासी समुदाय की जासूसी करते हैं और उनसे पैसे वसूलते हैं।

बुलोस यह कहने में सही हैं कि एरिट्रिया एक रणनीतिक देश है, लेकिन बेहतर रास्ता यह होगा कि एरिट्रिया पर वेनेज़ुएला वाला मॉडल लागू किया जाए और इसाइयास को न्याय के कठघरे में लाया जाए; देशों की एक लंबी सूची है जो उन पर मुक़दमा चलाना चाहेगी। तथाकथित ब्लू रिवोल्यूशन में सक्रिय एरिट्रियाई लोग अभी से अगले दिन की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कोई क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा नहीं है और वे स्वाभाविक रूप से पश्चिम-समर्थक हैं। ट्रंप और बुलोस को लंबी रणनीति अपनानी चाहिए, न कि ऐसे तानाशाह पर दाँव लगाना चाहिए जिसने बार-बार ख़ुद को पश्चिम के प्रति शत्रुतापूर्ण, अक्षम और कपटी साबित किया है।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Lifting Sanctions on Eritrea Will Lead to U.S. Strategic Defeat

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