MEF रिपोर्ट: बमों से कमज़ोर हुआ ईरानी शासन, विकल्प राजनीति से ही
सेठ डी. कैपलन ने इस्लामी गणराज्य ईरान की जगह एक स्थिर, लोकतांत्रिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत ईरानी राष्ट्र खड़ा करने का रास्ता बताया है।

फ़िलाडेल्फ़िया – 28 अक्टूबर 2026 – फ़रवरी से अब तक अमेरिकी और इसराइली हमलों में ईरान के वरिष्ठ कमांडर मारे गए हैं, उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को नुक़सान पहुँचा है और चार दशकों में खड़े किए गए क्षेत्रीय प्रतिरोधक तंत्र के बड़े हिस्से को कमज़ोर किया गया है। इसके बावजूद इस्लामी गणराज्य सत्ता में बना हुआ है, लड़ाई जारी रखे हुए है और अब भी खाड़ी के जहाज़रानी मार्गों को ख़तरे में डाल सकता है।
“Fracturing the Iranian Regime” ( यहाँ क्लिक करें ) में जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज़ में प्रोफ़ेसरियल लेक्चरर सेठ डी. कैपलन (Seth D. Kaplan) बताते हैं कि ऐसा क्यों है और वॉशिंगटन तथा यरूशलम को आगे क्या करना चाहिए। उनका तर्क है कि शासन का टिके रहना उसकी बची हुई मिसाइलों से कम, और उस शासक गठजोड़ की एकजुटता पर ज़्यादा निर्भर है, जिसे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) संगठित करती और संरक्षण देती है। गार्ड विशाल व्यावसायिक परिसंपत्तियों के ज़रिए अपना ख़र्च चलाती है, घरेलू दमन संचालित करती है और प्रांतीय अधिकारियों, धार्मिक न्यासों और कारोबारी नेटवर्कों को एक ही उद्यम में बाँध देती है। जब तक यह ढाँचा क़ायम है, तेहरान चोट झेल सकता है और लड़ाई जारी रख सकता है।
दो दशकों से लाखों ईरानी शासन के ख़िलाफ़ मार्च कर रहे हैं, हड़तालें कर रहे हैं और संगठित हो रहे हैं। हर आंदोलन उसी दीवार से टकराया: एक एकजुट सुरक्षा तंत्र के सामने बिखरा हुआ विपक्ष, जिसके पास शासन का कोई विकल्प नहीं था। कैपलन लिखते हैं, “अकेली वैधता शासन-परिवर्तन नहीं लाती। संगठन लाता है।”
तानाशाहियाँ इसलिए शायद ही गिरती हैं कि उनके लोग ग़ुस्से में आ जाते हैं। कैपलन के शब्दों में, “सत्तावादी व्यवस्था का ढहना जनमत-निर्माण पर उतना निर्भर नहीं करता, जितना अभिजन वर्ग की अनिश्चितता पर।” इसलिए, “इसका केंद्रीय निहितार्थ यह है कि शासन में दरार एक प्रक्रिया है, कोई घटना नहीं।”
कैपलन चार परस्पर पूरक कार्य-दिशाएँ सुझाते हैं:
- विपक्ष को एकजुट करें। देश के भीतर और प्रवासी समुदाय के कार्यकर्ताओं को जोड़कर एक ही राजनीतिक मंच खड़ा किया जाए, जो हड़तालों का समन्वय कर सके, कूटनीति चला सके और समय आने पर शासन भी कर सके।
- शासन के गठजोड़ में फूट डालें। जिन्होंने दमन के आदेश दिए, उनके लिए जवाबदेही का वादा हो; और जिन्होंने नहीं दिए — तकनीकी विशेषज्ञ, सरकारी कर्मचारी, कारोबारी नेता और अनिवार्य सैन्य सेवा में भर्ती जवान — उनके लिए भविष्य का।
- सूचना की लड़ाई जीतें। सेंसरशिप-रोधी संचार साधनों को धन दें, अत्याचारों का दस्तावेज़ीकरण करें, भ्रष्टाचार उजागर करें और ईरानियों को दिखाएँ कि आगे क्या आने वाला है।
- आर्थिक मोर्चे पर मुक़ाबला करें। हड़ताली मज़दूरों का साथ दें, प्रतिबंधों का निशाना आम परिवारों के बजाय IRGC को बनाएँ और पुनर्बहाली की एक भरोसेमंद योजना पेश करें।
पर्चे का सबसे साहसी प्रस्ताव ईरान के भीतर विपक्ष के संरक्षित क्षेत्रों (enclaves) की माँग करता है। सीरिया में बाहरी प्रतिरोधकता ने विपक्ष के क़ब्ज़े वाले इदलिब को इतने समय तक ज़िंदा रखा कि वहाँ की संस्थाएँ देश के अंतिम सत्ता-हस्तांतरण में शामिल हो सकीं। ईरान में ऐसे क्षेत्र संभवतः पहले कुर्दिस्तान और बलूचिस्तान में उभरेंगे, लेकिन कैपलन चेताते हैं कि उन्हें फ़ारसी-बहुल मुख्य भूभाग तक फैलना होगा, वरना शासन के अलगाववाद वाले आख्यान को ही बल मिलेगा। ज़मीन से ज़्यादा मायने वह संदेश रखता है जो इससे जाता है: तेहरान का अपने ही नक़्शे पर निर्विवाद नियंत्रण जैसे ही ख़त्म होता है, उसके अधिकारी बचाव के रास्ते तलाशने लगते हैं।
कैपलन वॉशिंगटन और यरूशलम को एक-दूसरे के पूरक भूमिकाएँ सौंपते हैं। अमेरिका को राजनीतिक, आर्थिक, सूचना-संबंधी और सत्ता-हस्तांतरण की योजना बनाने वाले प्रयास का नेतृत्व करना चाहिए — फ़ारसी भाषा के मीडिया से लेकर उन आकस्मिक योजनाओं तक, जो शासन के गिरने के अगले ही दिन मंत्रालयों और आवश्यक सेवाओं को चलता रखें। इसराइल को IRGC कमांडरों, मिसाइल बलों, ड्रोन ढाँचे और हिज़्बुल्लाह से लेकर हूतियों तक के प्रॉक्सी गुटों पर सैन्य और ख़ुफ़िया दबाव बनाए रखना चाहिए। दोनों को यह काम चुपचाप करना चाहिए। कैपलन आगाह करते हैं कि दिखाई देने वाली विदेशी पृष्ठपोषकता शासन को उसका मनपसंद प्रचार-वाक्य थमा देगी। सत्ता-हस्तांतरण “निस्संदेह रूप से ईरानी नेतृत्व वाला” रहना चाहिए।
संक्षेप में, लक्ष्य शासन को कमज़ोर करने से हटकर उसका उत्तराधिकारी खड़ा करने पर आ जाता है। कैपलन निष्कर्ष देते हैं, “इस परिमाण के रणनीतिक अवसर कम ही आते हैं।” सैन्य दबाव के साथ-साथ राजनीतिक संगठन न हुआ, तो “शासन एक बार फिर ख़ुद को ढाल सकता है, अपनी बची हुई ताक़तों को समेट सकता है और बचा रह सकता है।”
MEF के ईरान फ़्रीडम प्रोजेक्ट (Iran Freedom Project) के निदेशक मेहरदाद मार्टी यूसेफ़ियानी (Mehrdad Marty Youssefiani) ने कहा, “सेठ कैपलन ठीक-ठीक पहचानते हैं कि असली गुरुत्व-केंद्र मिसाइलें या सेंट्रीफ़्यूज नहीं, बल्कि शासन के धनकुबेरों के साथ IRGC-केंद्रित गठजोड़ है। रणनीतिक दबाव के साथ एक भरोसेमंद राजनीतिक विकल्प, अभिजन वर्ग से अलग-अलग ढंग का संपर्क और पुनर्बहाली का स्पष्ट रास्ता जोड़ना ईरानी पहलकदमी और संस्थागत निरंतरता को प्राथमिकता देता है। इसी तरह सैन्य उपलब्धियाँ टिकाऊ सत्ता-हस्तांतरण में बदलती हैं।”
MEF के कार्यकारी निदेशक ग्रेग रोमन (Gregg Roman) ने कहा, “सेठ कैपलन समझते हैं कि ईरान में शासन-परिवर्तन केवल एक बहुआयामी रणनीति से ही लाया जा सकता है, जो IRGC के नेतृत्व वाली सरकार को सैन्य रूप से और भीतर से भी कमज़ोर करे, और साथ ही नागरिक समाज तथा एक चलती-फिरती अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के अवसर भी पैदा करे। उनके तर्क पैने, मौलिक और प्रभावशाली हैं।”
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