सोमालिया में तुर्की के F-16, अंकारा को हथियार बेचने का ख़तरा उजागर
समझदारी इसी में है कि किसी भी संवेदनशील सैन्य तकनीक की ज़िम्मेदारी सौंपने के लिए अब तुर्की पर भरोसा न किया जाए।
माइकल रुबिन ईरान, तुर्की और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका के विशेषज्ञ हैं। उनके करियर में पेंटागन में अधिकारी के तौर पर काम करने का अनुभव शामिल है। इसमें ईरान, यमन और इराक़ में ज़मीनी स्तर के अनुभव के साथ-साथ 9/11 से पहले तालिबान के साथ संपर्क भी रहा है। श्री रुबिन ने सैन्य शिक्षा में भी योगदान दिया है और अमेरिकी नौसेना तथा मरीन इकाइयों को क्षेत्रीय संघर्षों और आतंकवाद के बारे में पढ़ाया है। उनके विद्वतापूर्ण काम में कई अहम प्रकाशन शामिल हैं, जैसे “Dancing with the Devil” और “Eternal Iran।” रुबिन ने येल यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएच.डी. और एम.ए., तथा जीव विज्ञान में बी.एस. की डिग्री हासिल की।

केन्या की सहान (Sahan) शोध संस्था के विश्लेषक और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका के संभवतः दुनिया के सबसे बड़े विशेषज्ञ रशीद अब्दी (Rashid Abdi) ने 28 जनवरी, 2026 को बताया कि तुर्की ने सोमालिया में तीन F-16 तैनात किए हैं। तुर्की के इस क़दम के बाद तुर्की को अमेरिकी सैन्य विमानों की आगे बिक्री या हस्तांतरण पर अमेरिकी कांग्रेस में चल रही किसी भी बहस का अंत हो जाना चाहिए।
बिक्री के समर्थकों का तर्क है कि NATO की सामूहिक रक्षा के लिए तुर्की को उन्नत लड़ाकू जेट की ज़रूरत है। तुर्की के पास सैन्यबल के लिहाज़ से दूसरा सबसे बड़ा सशस्त्र बल है, हालांकि यह ज़रूरी नहीं कि यह कोई प्रासंगिक पैमाना हो, अगर संघर्ष की घड़ी में तुर्की सरकार इन्हें योगदान के तौर पर देने से इनकार कर दे।
राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन के नेतृत्व में तुर्की ने दिखा दिया है कि NATO की रक्षा उसकी प्राथमिकता नहीं है। रूस/यूक्रेन संघर्ष में ‘सही पक्ष’ में खड़े होने की तुर्की की तमाम बातों के बावजूद हक़ीक़त यह है कि तुर्की दोनों पक्षों से खेलता है। उसके समर्थक यूक्रेन को ड्रोन बिक्री के मुद्दे पर तर्क देते हैं, लेकिन एर्दोआन की प्रतिबंधों से बचने की योजनाएँ ईरान की मदद करती हैं, जबकि इस्लामी गणराज्य ईरान रूस को ड्रोन बेच रहा है। और जबकि तुर्की अपने पाइपलाइन नेटवर्क को यूरोप को रूसी गैस पर निर्भरता से मुक्त कराने के तौर पर पेश करता है, तुर्की के अधिकारी यह तथ्य छिपाते हैं कि तुर्की की पाइपलाइनों से ढोई जाने वाली बड़ी मात्रा में गैस रूस से या रूसी कंपनियों से आती है।
अब तक अनसुलझा S-400 विवाद NATO के प्रति एर्दोआन की उपेक्षा और F-35 Joint Strike Fighter जैसी अमेरिकी तकनीक की सुरक्षा की किसी भी ज़िम्मेदारी के प्रति उनके तिरस्कार को दिखाता है। तुर्की अगर S-400 छोड़ने वाला कोई समझौता स्वीकार भी कर ले, तो इससे न एर्दोआन का फ़ैसला मिटता है और न ही उसकी पुनरावृत्ति रुकती है। समझदारी इसी में है कि किसी भी संवेदनशील सैन्य तकनीक के स्वामित्व के लिए अब तुर्की पर भरोसा न किया जाए।
और जब साइप्रस अमेरिका के लिए एक ज़्यादा भरोसेमंद—अगर बेहतर नहीं—साझेदार के रूप में उभर रहा है, तब तक अमेरिका के लिए कोई भी सैन्य तकनीक हस्तांतरित करना तर्कसंगत नहीं है, जब तक तुर्की उसके भूभाग पर क़ब्ज़ा किए है और उसके संसाधन चुरा रहा है।
सोमालिया में तुर्की द्वारा F-16 की तैनाती दिखाती है कि उसका ध्यान NATO की रक्षा पर नहीं, बल्कि अमेरिका-विरोध और इस्लामवादियों को सशक्त करने पर है। Transparency International के अनुसार, मोगादिशु की सोमाली सरकार दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों में से एक है और भ्रष्टाचार बढ़ता ही जा रहा है। तुर्की सोमालिया के बिना चुने राष्ट्रपति हसन शेख़ मोहमूद का समर्थन उसी वजह से करता है, जिस वजह से People’s Republic of China करती है: क्योंकि वह भ्रष्ट किया जा सकता है। तुर्की की यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब हसन शेख़ मोहमूद, सोमालीलैंड को इसराइल की मान्यता को नाकाम करने के लिए तुर्की-सऊदी-क़तरी गठजोड़ में शामिल हो रहे हैं।
जहां “Axis of the Ikhwan” के राजनयिक कहते हैं कि सोमालीलैंड की आज़ादी को मान्यता देना और एक पश्चिम समर्थक लोकतंत्र में सुरक्षा को मज़बूत करना सुरक्षा को कमज़ोर करता है, वहीं हक़ीक़त यह है कि एक भूभाग-लोलुप, विफल राज्य को उन्नत हथियार भेजना, जो सीरिया के Ahmed Al-Shabaab को पालता-पोसता है, यह संकेत देता है कि अंकारा ऐसी किसी भी व्यवस्था को स्वीकार करने के बजाय, जिसमें इस्लामवादियों का वर्चस्व न हो, क्षेत्रीय युद्ध का जोखिम उठाना पसंद करेगा। न ही तुर्की का यह कहना तर्कसंगत है कि उसे अपनी रक्षा के लिए उन्नत F-16 की ज़रूरत है, जब वह उन्हें 3,500 मील दक्षिण में तैनात कर रहा है।
एर्दोआन अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने और अमेरिका के क्षेत्रीय हितों का मुक़ाबला करने की अपनी मुहिम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक (Tom Barrack) को useful idiots की तरह इस्तेमाल करते हैं। तुर्की भले कहे कि उसे अपनी और NATO की सुरक्षा के लिए F-16 जेट की ज़रूरत है, लेकिन मोगादिशु में जेट की तैनाती के बाद ऐसा तर्क देने वाले को किसी भी कांग्रेस सदस्य, राजनयिक या पेंटागन अधिकारी को हँसकर कमरे से बाहर कर देना चाहिए।
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