अमेरिकी-इसराइली हमलों ने खोली ईरान की मिसाइल ताक़त की पोल
ईरानी शासन लगभग दस बड़े मिसाइल शहरों के साथ कम से कम सत्रह अतिरिक्त मिसाइल ठिकाने भी चला रहा है।
मार्डो सोगोम तीन दशकों तक Radio Free Europe/Radio Liberty में पत्रकार और संपादकीय प्रबंधक रहे। वहाँ उन्होंने 2020 तक ईरान और अफ़ग़ानिस्तान सेवाओं की देखरेख की और Iran International की अंग्रेज़ी वेबसाइट के प्रधान संपादक रहे।

मार्च 2026 के अमेरिकी-इसराइली हवाई अभियान के जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया, उसकी मिसाइल क्षमताओं के पैमाने और टिकाऊपन को रेखांकित करती है। मध्य पूर्व और उससे आगे तक ताक़त दिखाने की तेहरान की क्षमता को कमज़ोर करना शुरू करने भर के लिए हज़ारों लड़ाकू उड़ानें और मिसाइल से जुड़े लक्ष्यों पर सैकड़ों हमले करने पड़े हैं।
ईरान के मिसाइल ढाँचे का विशाल फैलाव—जिसका बड़ा हिस्सा ज़मीन के नीचे दबा है—अब स्पष्ट होता जा रहा है। मध्य ईरान के शहर यज़्द के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक ठिकाना कथित तौर पर ग्रेनाइट के पहाड़ के भीतर बना है, जिसके कुछ हिस्से 1,500 फ़ुट तक की गहराई में जाते हैं। कहा जाता है कि इस परिसर में रेल सुरंगें भी हैं, जो मिसाइलों को प्रक्षेपण स्थलों तक ले जाकर फिर उन्हें भूमिगत रास्तों की भूलभुलैया में वापस खींच सकती हैं। रिपोर्टों के मुताबिक़ इस ठिकाने पर कई बार हमले हुए हैं, जिससे कुछ नुक़सान हुआ है, लेकिन मूल ढाँचा अब भी सलामत है।
एक और बड़ा “मिसाइल शहर” तेहरान और कराज के बीच है। उपग्रह तस्वीरों के मुताबिक़ इसका आकार कराज के ही लगभग बराबर है—करीब दो मिलियन आबादी वाला शहरी इलाक़ा।
उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक़ ईरान के पास करीब दस बड़े मिसाइल शहर हैं, साथ ही कम से कम सत्रह अतिरिक्त मिसाइल ठिकाने भी हैं। इनमें से कई पश्चिमी ईरान में केंद्रित हैं, जहाँ से इसराइल तक उड़ान का समय कम लगता है, और कई दक्षिण में फ़ारस की खाड़ी के किनारे हैं। माना जाता है कि इन ठिकानों में 2,500 से 6,000 के बीच बैलिस्टिक मिसाइलें हैं; इसके अलावा क्रूज़, जहाज़-रोधी और कम दूरी की प्रणालियों की भी अज्ञात संख्या है, जो कुछ सौ मील के दायरे में लक्ष्यों पर हमला कर सकती हैं।
वर्षों से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) इन भूमिगत परिसरों की तस्वीरें दिखाता रहा है, जिनमें अक्सर वरिष्ठ कमांडर विशाल सुरंग नेटवर्क का दौरा करते नज़र आते थे। कई ईरानियों ने इन प्रदर्शनों को प्रचार मानकर ख़ारिज कर दिया था, यह सोचकर कि ताक़त दिखाने के लिए वही सुविधाएँ बार-बार दिखायी जा रही हैं।
अब यह धारणा ग़लत साबित होती दिख रही है। विश्लेषकों का लंबे समय से मानना था कि तेहरान ने करीब 1,500 मील की मारक-सीमा तय कर रखी है, जो इसराइल को निशाना बनाने के लिए पर्याप्त है। लेकिन डिएगो गार्सिया में संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश अड्डे की ओर मिसाइलों का प्रक्षेपण—जो 2,600 मील से भी दूर है—लंबी दूरी की प्रणालियों के अस्तित्व का संकेत देता है, जिससे यूरोप का बड़ा हिस्सा ईरान की पहुँच में आ जाता है।
इस समझ ने देश के भीतर असंतोष को हवा दी है। कई ईरानी अब उन संसाधनों की बढ़ती आलोचना कर रहे हैं, जो मिसाइल ढाँचे पर लगाए गए, जबकि पिछले दो दशकों में अर्थव्यवस्था गिरती रही। ग़रीबी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, ख़ासकर 2018 के बाद, जब वॉशिंगटन के परमाणु समझौते से हटने के बाद अमेरिका ने फिर से प्रतिबंध लगाए। बढ़ते आर्थिक दबाव के बावजूद सरकार सैन्य क्षमताओं और क्षेत्रीय प्रभाव को प्राथमिकता देती रही, जिसमें सहयोगी सशस्त्र गुटों को समर्थन भी शामिल है।
अकेले मिसाइल ढाँचे का वित्तीय पैमाना ही बहुत बड़ा है। यूरोपीय आयोग के अनुमानों के मुताबिक़ कठोर चट्टान में बनाई गई सुरंग की लागत प्रति किलोमीटर 40 मिलियन डॉलर तक, यानी प्रति मील 60 मिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है। विशेष सैन्य मज़बूतीकरण और संचालन संबंधी सहायता जोड़ने पर यह लागत प्रति किलोमीटर 80 मिलियन डॉलर तक पहुँच सकती है। ईरान के मुख्य भूमिगत मिसाइल शहरों में से एक के बारे में कहा जाता है कि उसमें 30 मील सुरंगें हैं। इसलिए एक ही परिसर की लागत आसानी से कम से कम 4 अरब डॉलर रही होगी। इस तरह, ईरान ने केवल 27 भूमिगत मिसाइल सुविधाओं पर ही 100 अरब डॉलर से अधिक ख़र्च किए होंगे, और इसमें हज़ारों बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास व उत्पादन के लिए ज़रूरी धन शामिल नहीं है।
ईरान के मिसाइल कार्यक्रम की कुल लागत के कोई आधिकारिक आँकड़े नहीं हैं। हालांकि, तेहरान के लिए मिसाइल कार्यक्रम के महत्व को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि शासन ने पिछले तीन दशकों में सैन्य ख़र्च का 30 प्रतिशत तक मिसाइल क्षमताओं पर लगाया। ईरान का आधिकारिक रक्षा बजट—आमतौर पर सालाना करीब 7–8 अरब डॉलर—तस्वीर का सिर्फ़ एक हिस्सा दिखाता है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर और उससे जुड़े संस्थान बजट से बाहर के बड़े संसाधनों तक पहुँच रखते हैं, जिनमें तेल आवंटन, ठेकेदारी नेटवर्क और निर्माण, ऊर्जा व दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में व्यापक हिस्सेदारी शामिल है। आय के ये समानांतर स्रोत राज्य को औपचारिक बजट-सीमाओं से परे रणनीतिक कार्यक्रमों के लिए धन जुटाने की गुंजाइश देते हैं।
ताज़ा बजट में रिवोल्यूशनरी गार्ड को कथित तौर पर निर्यात के लिए प्रतिदिन 600,000 बैरल तक तेल आवंटित किया गया, जिससे संभवतः करीब 15 अरब डॉलर का राजस्व बन सकता है। अगर IRGC से जुड़ा कुल सैन्य ख़र्च सतर्क अनुमान के तहत सालाना 18 अरब डॉलर माना जाए, और इसका लगभग एक-तिहाई मिसाइलों पर जाता हो, तो 30 वर्षों में कुल निवेश 200 अरब डॉलर के करीब पहुँच सकता है—और भूमिगत ढाँचे तथा संबंधित सुविधाओं को जोड़ दें तो शायद 300 अरब डॉलर तक।
तुलना के लिए, इसी अवधि में ईरान ने तेल निर्यात से लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर कमाए हैं। इससे संकेत मिलता है कि मिसाइल विकास और उससे जुड़े ढाँचे ने इस राजस्व का एक-पाँचवें हिस्से से अधिक खपाया होगा।
लेकिन मिसाइलें ईरान की व्यापक रणनीति का सिर्फ़ एक घटक हैं। सरकार ने अपने परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क, धार्मिक प्रसार और घरेलू सुरक्षा में भी निवेश किया है। इन ख़र्चों के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध भी लगे, जिसने आर्थिक वृद्धि को और सीमित किया।
इन प्राथमिकताओं को एक साथ देखें तो एक केंद्रीय विरोधाभास समझ में आता है: बड़े तेल भंडार और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार समेत विशाल प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद ईरान में जीवन स्तर गिरा है। शासन का प्रचार भले प्रतिबंधों या बाहरी ताक़तों को दोष दे, लेकिन ईरानी नेतृत्व ने गुप्त कार्यक्रमों में जो पैसा लगाया है, वह एक अलग हक़ीक़त की तरफ़ इशारा करता है।
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