मोजतबा कहाँ हैं?
जब भी उनके जीवित होने के सबूत का दबाव बढ़ता है, ईरानी शासन एक और जीवित-होने का दावा पेश कर देता है।
पॉटकिन अज़ारमेहर मूल रूप से ईरान से ताल्लुक़ रखने वाले ब्रिटिश खोजी पत्रकार और वृत्तचित्र निर्माता हैं। उन्होंने विभिन्न मीडिया संस्थानों और नीति अनुसंधान संस्थाओं के लिए योगदान दिया है, जहां उन्होंने मध्य-पूर्व के मामलों और पश्चिम में इस्लामी चरमपंथ का गहन विश्लेषण पेश किया है।

मोजतबा ख़ामेनेई के ज़िंदा होने का सबूत पेश करने की ताज़ा कोशिश ख़ामेनेई के क़रीबी दायरे से जुड़े एक शिया मद्दाह—यानी धार्मिक गायक और शोक-गायक—की ओर से आई है।
2 सितंबर 2026 को अब्बास हैदरज़ादेह (Abbas Heydarzadeh) ने कहा कि ख़ामेनेई अच्छी सेहत में हैं और उन्होंने अपने पिता के दफ़न की रात मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह में, अपने पिता के ताबूत के पास बिताई।
हैदरज़ादेह के मुताबिक़, दरगाह के मुतवल्ली ने उन्हें बताया कि मोजतबा क़रीब आधी रात को अपने पिता को दफ़नाने पहुँचे और सुबह सात बजे तक वहीं रहे। बताया गया कि उन्होंने आधा घंटा अपने पिता की क़ब्र पर बिताया और उनसे बातें कीं। हैदरज़ादेह ने यह भी दावा किया कि दरगाह के वरिष्ठ अधिकारियों ने मोजतबा के पीछे नमाज़ पढ़ी।
28 फ़रवरी 2026 को सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की मृत्यु के बाद से मोजतबा के भविष्य को लेकर उठता सवाल बेहद गोपनीय बना हुआ है। उनके ठिकाने, हालत और सत्ता चलाने की उनकी क्षमता पर परस्पर विरोधी ख़बरें, अफ़वाहें और शासन के भीतरी दायरे से आने वाले विस्तृत वृत्तांत सामने आते रहे हैं।
अपने पिता के अंतिम संस्कार में मोजतबा की ग़ैर-मौजूदगी ख़ास तौर पर हैरान करने वाली थी। इससे शासन के वफ़ादार समर्थकों के बीच भी यह सवाल उठा कि वे वहाँ क्यों नहीं आए।
मोजतबा की शारीरिक मौजूदगी साबित करने वाली ताज़ा कहानी गवाहों की एक कड़ी गढ़ने की कोशिश करती है—“अधिकारियों ने उन्हें देखा। उन्होंने उनके पीछे नमाज़ पढ़ी”—लेकिन तमाम कथित गवाहों के नाम नहीं बताए गए हैं और किसी ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
यह दावा उस असाधारण घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में आया है, जो अंतिम संस्कार के बाद सामने आया।
एक वीडियो क्लिप प्रसारित हुई, जिसमें आयतुल्लाह मोहम्मद बाक़िर ख़र्राज़ी (Mohammad Bagher Kharrazi) ने कहा कि मोजतबा को तीन साल तक उनके पिता के दफ़्तर से दूर रखा गया था। उनके मुताबिक़, यह काम अली-असग़र हेजाज़ी (Ali-Asghar Hejazi) ने किया, जो अली ख़ामेनेई के दफ़्तर की सबसे ताक़तवर शख़्सियतों में से एक थे और पूर्व सर्वोच्च नेता तक पहुँच को नियंत्रित करते थे। ख़र्राज़ी ने दावा किया कि उस अवधि में मोजतबा अपने घर तक सीमित थे और उनका काम सिर्फ़ ख़ुफ़िया तथा सुरक्षा से जुड़े पत्र लेना और अपने पिता तक पहुँचाना भर रह गया था।
ख़र्राज़ी कोई साधारण आयतुल्लाह नहीं हैं। वे धर्मगुरुओं के उस कुलीन वंश से आते हैं, जिसने 1979 की क्रांति के बाद अहम पद संभाले। उनके भाई मोहम्मद सादिक़ ख़र्राज़ी (Mohamad Sadegh Kharrazi) ईरान के पूर्व राजदूत रहे हैं, और उनके चाचा कमाल ख़र्राज़ी (Kamal Kharrazi), जो अमेरिका-ईरान युद्ध में मारे गए थे, पूर्व विदेश मंत्री थे। इससे भी अहम यह है कि आयतुल्लाह ख़र्राज़ी की बहन का विवाह मसूद ख़ामेनेई (Massoud Khamenei) से हुआ है, जो अली ख़ामेनेई के जीवित बचे तीन बेटों में से एक हैं। मसूद अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे।
उनके दावे मानो इस ओर इशारा करते थे कि मोजतबा कभी उत्तराधिकार की क़तार में थे ही नहीं, और परोक्ष रूप से यह भी सुझाते थे कि अली ख़ामेनेई के बाद उनके भाई मसूद ख़ामेनेई ज़्यादा उपयुक्त उम्मीदवार हैं।
ख़र्राज़ी एक सनकी धर्मगुरु हैं, जो अतीत में अनाप-शनाप बयान देते रहे हैं। लेकिन उल्लेखनीय है कि उन्होंने यह भविष्यवाणी भी सटीक रूप से की थी कि ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख के तौर पर मोहम्मद बाक़िर ज़ोलक़दर (Mohamad Bagher Zolghadr) की जगह मोहसिन रज़ाई (Mohsen Rezaei) आएँगे।
ख़र्राज़ी की वीडियो क्लिप पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़े मीडिया की प्रतिक्रिया तुरंत आई। उन्होंने उन पर फूट डालने का आरोप लगाया और कुछ ने न्यायपालिका से उन्हें गिरफ़्तार करने की माँग की। ख़बरों के मुताबिक़, उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। इसके बाद ख़र्राज़ी ने एक और वीडियो जारी किया, जिसमें दावा किया कि उनके नाम से प्रसारित क्लिप को संपादित किया गया था और उसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार किया गया था।
इस विवाद के बाद शासन ने जनता को यह यक़ीन दिलाने की तीन एक साथ कोशिशें कीं कि मोजतबा अब भी जीवित हैं।
पहले मोजतबा के नाम से जारी बयानों में IRGC की 6 नई शीर्ष सैन्य नियुक्तियाँ सामने आईं। फिर एक वीडियो क्लिप आई, जिसमें मोजतबा अपने मदरसे के छात्रों के बीच दिखाए गए। अंत में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा कि वे 7 घंटे की एक बैठक में मोजतबा से आमने-सामने मिले।
इन कोशिशों ने शायद शासन के कट्टरपंथी समर्थकों और पश्चिम में ईरान पर नज़र रखने वाले कुछ लोगों को आश्वस्त कर दिया हो, लेकिन हर कोशिश में खामी है। नियुक्तियों की घोषणा करने वाले बयानों पर तारीख़ नहीं थी, जो सामान्य प्रचलन के ख़िलाफ़ है। मदरसे के छात्रों के बीच मोजतबा को दिखाने वाले वीडियो में कोई आवाज़ नहीं थी, और यह भी नहीं बताया गया कि यह कब या कहाँ रिकॉर्ड किया गया।
जहाँ तक पेज़ेशकियान की मोजतबा के साथ 7 घंटे की बैठक का सवाल है, राष्ट्रपति बस इतना ही कह सके कि यह एक गर्मजोशी भरी, ईमानदार और दोस्ताना बैठक थी। असामान्य रूप से लंबी इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसका कोई ब्योरा उन्होंने नहीं दिया।
पेज़ेशकियान के दावे पर भौंहें चढ़ने की एक अतिरिक्त वजह भी थी। मोजतबा से मुलाक़ात के बारे में सार्वजनिक बयान देने से पहले, पेज़ेशकियान ने ईरानी मीडिया की हस्तियों के साथ एक बंद बैठक में बिल्कुल अलग मुलाक़ात का ब्योरा दिया था। उनकी लीक हुई टिप्पणियों के मुताबिक़, पेज़ेशकियान ने कहा था कि उनकी आँखों पर पट्टी बाँधकर उन्हें मोजतबा से मिलने एक अज्ञात जगह ले जाया गया, लेकिन उन्होंने मोजतबा को असल में देखा ही नहीं। इसके बजाय, उनके बीच संवाद लिखित पर्चियों के आदान-प्रदान तक सीमित रहा।
अली ख़ामेनेई की मृत्यु के 6 महीने से ज़्यादा बीत जाने के बाद भी मोजतबा का एक भी वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग या हस्तलिखित नोट सार्वजनिक नहीं हुआ है। ईरान में असल में जो भी नेतृत्व चला रहा है, उसके लिए अब तक यह सुविधाजनक रहा है कि यह बनाए रखा जाए कि मोजतबा जीवित हैं और सभी मामलों में अंतिम फ़ैसला उन्हीं का है।
अगर लोगों को लगे कि वे जीवित हैं, तो शासन एक अन्यथा कलहग्रस्त राजनीतिक माहौल में उन्हें सर्वोच्च प्राधिकार के रूप में पेश कर सकता है। उनका नाम नियुक्तियों को वैधता दे सकता है, विवाद सुलझा सकता है और गुटीय प्रतिस्पर्धा को काबू में रख सकता है।
जब भी उनके जीवित होने के सबूत का दबाव बढ़ता है, एक और दावा सामने आ जाता है: मोजतबा देखे गए; मोजतबा किसी से मिले; मोजतबा ने नियुक्तियाँ जारी कीं; मोजतबा अपने छात्रों के बीच थे; मोजतबा अपने पिता के दफ़न में शामिल हुए। लेकिन यह सिलसिला कब तक चल सकता है, इसकी एक सीमा है।
किसी न किसी मोड़ पर वे कट्टरपंथी तत्व, जिन्हें लगता है कि उन्हें सत्ता के असली केंद्रों से बाहर रखा जा रहा है, वे भी इस बात का सबूत माँगने लगेंगे कि मोजतबा जीवित हैं और नेतृत्व करने में सक्षम हैं। अगर जवाब यह निकला कि मोजतबा इन तमाम महीनों से जीवित ही नहीं थे, तो इस्लामी गणराज्य ईरान के लिए इसके नतीजे बेहद बड़े हो सकते हैं।
निरंतरता का सावधानी से बनाए रखा गया यह कल्पित वृत्तांत ढह जाएगा। जिन गुटों ने मोजतबा को साझा प्राधिकार के रूप में पेश किया है, उनके पास यह विकल्प नहीं रहेगा। ईरान को कौन नियंत्रित कर रहा है, यह सवाल छिपाना असंभव हो जाएगा। जो अभी बंद दरवाज़ों के पीछे समेटा हुआ है, वह खुलकर सामने आ सकता है।
इससे शासन के भीतर पैदा होने वाली दरारें ऐसे पैमाने की आपसी लड़ाई में बदल सकती हैं, जैसी इस्लामी गणराज्य ईरान ने पहले कभी नहीं देखी।
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