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ईरान-इसराइल युद्ध और दुनिया की हीलियम आपूर्ति पर संकट

हीलियम सेमीकंडक्टर विनिर्माण, एयरोस्पेस उद्योग और MRI स्कैनर जैसे चिकित्सा ढाँचे के लिए अनिवार्य है।

उमुद शोकरी वॉशिंगटन, डी.सी. में स्थित ऊर्जा रणनीतिकार और विदेश नीति सलाहकार हैं। उन्हें ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु नीति और वैश्विक ऊर्जा संक्रमण के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है।

A QatarEnergy headquarters.
क़तरएनर्जी (QatarEnergy) का मुख्यालय। · Shutterstock

ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल के टकराव का एक अनदेखा असर वैश्विक हीलियम व्यापार को लगा झटका है। जहाँ सुर्ख़ियाँ तेल की क़ीमतों में उछाल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति में बाधा पर टिकी रहीं, वहीं प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण के उपोत्पाद के रूप में निकलने वाली हीलियम उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक रणनीतिक ‘चोकपॉइंट’ के रूप में उभरी है।

2025 में दुनिया की 190 मिलियन घन मीटर हीलियम आपूर्ति में क़तर का हिस्सा लगभग एक-तिहाई था। क़तर के रास लफ़्फ़ान औद्योगिक परिसर पर ईरानी ड्रोन हमलों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद हो जाने के बाद देश को दुनिया की सबसे बड़ी हीलियम इकाइयों में उत्पादन रोकना पड़ा।

यह व्यवधान लगभग 2 मार्च 2026 को शुरू हुआ, जब क़तरएनर्जी (QatarEnergy) ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस की खेपों पर फ़ोर्स मेज्योर (अप्रत्याशित परिस्थिति) घोषित किया। चूँकि प्राकृतिक गैस के तरलीकरण के दौरान ही हीलियम निकाली जाती है, इसलिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस का उत्पादन ठप होने से हीलियम उत्पादन भी भारी रूप से घट गया।

बाज़ारों ने तेज़ प्रतिक्रिया दी। संकट शुरू होने के बाद हाज़िर (स्पॉट) बाज़ार में हीलियम की क़ीमतें दोगुनी हो गईं और कुछ खंडों में साप्ताहिक बढ़ोतरी 35–50 प्रतिशत तक दर्ज हुई। विश्लेषकों की चेतावनी है कि अगर व्यवधान लंबा खिंचा तो अनुबंध क़ीमतें 2,000 डॉलर प्रति हज़ार घन फ़ुट के उन स्तरों की ओर जा सकती हैं, जो पिछली वैश्विक क़िल्लतों के दौरान देखे गए थे।

क़तरी हीलियम का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रास लफ़्फ़ान से आता है, जहाँ प्राकृतिक गैस का प्रसंस्करण और तरलीकरण होता है। जब ईरानी हमलों ने इस औद्योगिक शहर को निशाना बनाया और ईरानी बलों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही रोक दी, तो भंडारण और जहाज़रानी की क्षमता भर गई। क़तरएनर्जी ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस का उत्पादन रोक दिया, जिससे हीलियम का निष्कर्षण भी बंद हो गया।

सिद्धांततः हीलियम के कंटेनरों को सड़क मार्ग से ओमान या सऊदी अरब के बंदरगाहों तक ले जाया जा सकता था, लेकिन यह विकल्प स्रोत स्तर पर उत्पादन बंद होने की भरपाई नहीं कर सकता। क़तर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी (Saad al-Kaabi) ने चेताया कि अगर लड़ाई तुरंत भी रुक जाए, तो आपूर्ति बहाल करने में “कुछ हफ़्तों से लेकर कई महीनों” का समय लगेगा।

मार्च 2026 के मध्य तक, शुरुआती हमलों के नौ दिन बाद भी रास लफ़्फ़ान परिसर बंद ही रहा। इस बंदी से वैश्विक बाज़ार से हर महीने लगभग 5.2 मिलियन घन मीटर के बराबर हीलियम आपूर्ति बाहर हो गई।

हीलियम का रणनीतिक महत्व इसके भौतिक गुणों और उन्नत तकनीक की आपूर्ति शृंखलाओं में इसकी भूमिका से जुड़ा है। औद्योगिक पैमाने पर कोई दूसरी गैस अत्यंत कम क्वथनांक (4.2 केल्विन), रासायनिक निष्क्रियता, उच्च ऊष्मा चालकता और ग़ैर-ज्वलनशीलता का ऐसा संयोजन नहीं देती। सेमीकंडक्टर विनिर्माण माँग के सबसे बड़े स्रोतों में है और वैश्विक खपत का लगभग 21–25 प्रतिशत इसी से आता है, क्योंकि वेफ़र एचिंग, निक्षेपण (डिपॉज़िशन) और प्लाज़्मा प्रक्रियाओं के दौरान अत्यंत स्वच्छ शीतलन वातावरण बनाए रखने के लिए यह हीलियम पर निर्भर है। इंजीनियर उन्नत फैब्रिकेशन उपकरणों और पराबैंगनी लिथोग्राफ़ी प्रणालियों में सूक्ष्म रिसाव पकड़ने के लिए भी हीलियम का इस्तेमाल करते हैं।

दक्षिण कोरिया की सेमीकंडक्टर कंपनियाँ तुरंत असर की जद में हैं। 2025 में उन्होंने अपनी हीलियम ज़रूरत का लगभग 64.7 प्रतिशत क़तर से आयात किया। SK हाइनिक्स जैसी कंपनियों ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता तलाशते हुए अपने भंडार खपाने शुरू कर दिए हैं।

हीलियम महत्वपूर्ण चिकित्सा अवसंरचना को भी सहारा देती है। तरल हीलियम मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (MRI) स्कैनरों में इस्तेमाल होने वाले सुपरकंडक्टिंग चुंबकों को ठंडा रखती है और दुनिया भर में ऐसे 14,000 से अधिक स्कैनर काम कर रहे हैं। एयरोस्पेस उद्योग रॉकेट ईंधन टैंकों में दबाव बनाने, प्रणोदन प्रणालियों को पर्ज करने और अंतरिक्ष यान के घटकों में रिसाव की जाँच के लिए हीलियम का उपयोग करते हैं। CERN के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर जैसी वैज्ञानिक शोध सुविधाएँ हीलियम क्रायोजेनिक प्रणालियों पर निर्भर हैं। 2035 तक माँग लगभग दोगुनी हो सकती है, क्योंकि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस सेमीकंडक्टर विनिर्माण का विस्तार कर रहा है और सरकारें अंतरिक्ष अन्वेषण तथा संलयन (फ़्यूज़न) अनुसंधान में निवेश कर रही हैं।

तेल के उलट, औद्योगिक पैमाने पर हीलियम के विकल्प बहुत कम हैं। कुछ बंद-चक्र प्रणालियों में पुनर्चक्रण संभव है, जैसे सीलबंद चुंबकों वाले MRI डिज़ाइन में, लेकिन ज़्यादातर सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस प्रक्रियाएँ हीलियम को वायुमंडल में छोड़ देती हैं। भंडारण भी सीमित है, क्योंकि तरल हीलियम ‘बॉयल-ऑफ़’ के जरिए धीरे-धीरे वाष्पित होती रहती है, इसलिए इसकी व्यावहारिक शेल्फ लाइफ़ लगभग 45 दिन रह जाती है।

पिछली क़िल्लतें दिखाती हैं कि व्यवधानों का असर आपूर्ति शृंखलाओं में कितनी तेज़ी से फैलता है। 2006 के बाद से दुनिया पाँच हीलियम आपूर्ति संकट झेल चुकी है। आपूर्तिकर्ता अस्पतालों और रक्षा ठेकेदारों को प्राथमिकता देते हैं और वेल्डिंग या ग़ुब्बारा निर्माण जैसे कम मूल्य वाले उपयोगों पर पाबंदी लगा देते हैं।

मौजूदा संकट हीलियम आपूर्ति के भौगोलिक संकेन्द्रण को रेखांकित करता है। अमेरिका और क़तर मिलकर वैश्विक उत्पादन के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से के लिए ज़िम्मेदार हैं। कारोबार में आने वाली बड़ी मात्रा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है। जापानी आपूर्तिकर्ता इवातानी (Iwatani) ने झटका कम करने के लिए अमेरिकी भंडारों का सहारा लिया है, लेकिन दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे सेमीकंडक्टर केंद्र अब भी जोखिम में हैं।

हीलियम सलाहकार फ़िल कॉर्नब्लूथ (Phil Kornbluth) पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि ऐसा परिदृश्य वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के लिए लगभग सबसे ख़राब संभावित नतीजा होगा। यह संकट हीलियम उत्पादन में दीर्घकालिक बदलावों को भी तेज़ कर रहा है। सुरक्षित आपूर्ति स्रोतों की तलाश में लगी कंपनियों के कारण निवेशक कनाडा और अमेरिकी रॉकीज़ में नई दिलचस्पी दिखा रहे हैं। नीति-निर्माता भी घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करने और क़तर पर निर्भरता घटाने के लिए हीलियम को अमेरिका का ‘क्रिटिकल मिनरल’ (महत्वपूर्ण खनिज) घोषित करने की दिशा में दबाव बना रहे हैं।

रूस की देरी का शिकार अमूर रिफ़ाइनरी और अल्जीरिया की विस्तार योजनाएँ भविष्य में आपूर्ति बढ़ा सकती हैं, लेकिन नई परियोजनाओं को विकसित होने में वर्षों लगते हैं और उन्हें राजनीतिक तथा वित्तीय जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

क़तर में हीलियम उत्पादन के बंद होने से एक व्यापक सबक सामने आता है: आधुनिक तकनीक की आपूर्ति शृंखलाएँ अब भी मध्य पूर्व की स्थिरता से जुड़ी हैं। तेल बाज़ार आपूर्ति या खपत के पैटर्न बदलकर खुद को ढाल सकते हैं, लेकिन सीमित स्रोतों और विशिष्ट अवसंरचना के कारण हीलियम बाज़ार के सामने कहीं कड़ी पाबंदियाँ हैं।

मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ें: Why the Iran-Israel War Matters for the World’s Helium Supply

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